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Kidney health tips : डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसका सीधा असर किडनी पर पड़ रहा है. अक्सर शुगर के मरीज या तो दवाइयां नहीं खाना चाह रहे हैं या नियमित रूप से नहीं खा रहे हैं. इसकी वजह से किडनी पर दबाव बढ़ रहा है और उनकी किडनी खराब हो रही है. लोकल 18 से बात करते हुए मऊ के चिकित्सक डॉ. अर्पित बताते हैं कि जंक फूड, ज्यादा नमक, शक्कर और प्रोस्टेट खाद्य पदार्थ किडनी पर दबाव डालते हैं. शारीरिक गतिविधि की कमी भी जोखिम को बढ़ाते हैं.
मऊ. देश में गुर्दे (किडनी) से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. अस्पतालों और डायलिसिस केंद्रों में बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि किडनी रोग अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रहा, बल्कि युवा और मध्य आयु वर्ग भी इसकी चपेट में आ रहा है. आइए जानते हैं कि इस बीमारी से कैसे बचें और कैसे अपनी सेहत का ख्याल रखें. लोकल 18 से बात करते हुए प्रेमा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल (मऊ) के गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पित गुप्ता बताते हैं कि गुर्दे की बीमारियों के बढ़ने के पीछे कई कारण है. सबसे बड़ा कारण डायबिटीज (मधुमेह) और हाई ब्लड प्रेशर है. अनियंत्रित शुगर और रक्तचाप धीरे-धीरे किडनी की रक्त नलिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं. भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर किडनी स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. दूसरा बड़ा कारण गलत जीवन शैली है. जंक फूड, अत्यधिक नमक, शक्कर और प्रोस्टेट खाद्य पदार्थों का सेवन किडनी पर दबाव डालता है. शारीरिक गतिविधि की कमी और मोटापा भी किडनी रोग के जोखिम को बढ़ाते हैं.
बाद में कितना खतरनाक
डॉ. अर्पित बताते हैं कि शुगर के बढ़ते मरीजों के वजह से किडनी के मरीज बढ़ते जा रहे हैं क्योंकि शुगर हाई लेवल होना किडनी खराब होने का कारण बन रहा है. अक्सर देखा जा रहा है शुगर के मरीज या तो दवाइयां नहीं खाना चाह रहे हैं या नियमित रूप से नहीं खा रहे हैं. इसकी वजह से किडनी पर असर पड़ रहा है और वह किडनी के मरीज हो रहे हैं. कई हेवी दवाइयों का प्रयोग करना भी किडनी पर असर डाल रहा है. यदि इस बीमारी से बचना चाहते हैं तो समय-समय पर 30 से 40 वर्ष की आयु के बाद अपनी किडनी की जांच करते रहें. किडनी खराब होने का शुरुआती लक्षण पता नहीं चलता है और आगे जाकर बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. शुरुआती लक्षण के बाद किडनी के पेशेंट की बीमारी जब आगे बढ़ जाती है तो उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.
मरीज क्या करें
शुरुआती लक्षण के बाद पता नहीं चलता है तो आगे चलकर मरीजों को डायलिसिस करना पड़ता है जिससे काफी समस्याएं होती है. यदि डायलिसिस की शुरुआत हो गई तो मरीज को प्रत्येक हफ्ते में 1 से 2 बार डायलिसिस करना पड़ता है. यदि किडनी के मरीज हो गए हैं तो संतुलित आहार किडनी को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में संतुलित आहार का सेवन करें. नमक और शक्कर का सेवन कम से कम करें और ताजे फल सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन लें.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें