जिस साउथ कोरियन फिल्मों और K Pop के दीवाने हैं आप, वहां भारतीयों के साथ होता है कैसा बर्ताव?

सियोल: दक्षिण कोरिया के जिस ग्लैमर और चकाचौंध को भारतीय के-ड्रामा और के-पॉप के जरिए देखते हैं, उसकी एक दूसरी और कड़वी हकीकत भी है. आज भारत का हर दूसरा युवा सियोल घूमने के सपने देखता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस देश की संस्कृति को हम इतना प्यार दे रहे हैं, वहां भारतीयों के लिए क्या मानसिकता है. दक्षिण कोरिया के कई हिस्सों में भारतीयों का स्वागत फूलों से नहीं, बल्कि ‘नो-एंट्री’ के बोर्ड और तिरस्कार भरी नजरों से किया जाता है. सियोल की चमचमाती सड़कों पर कई ऐसे क्लब और रेस्टोरेंट्स हैं जहां भारतीयों के घुसने पर पाबंदी है और वहां बकायदा चेतावनी लिखी होती है.

सचिन अवस्थी वाले केस के बाद वायरल हुए पुराने किस्से

हाल ही में एक भारतीय ट्रैवल व्लॉगर सचिन अवस्थी को साउथ कोरिया में डिटेंशन सेंटर में रखा गया और डिपोर्ट किया गया तो इस देश में भारतीयों के साथ हुई पुरानी घटनाएं वायरल होने लगीं. सचिन अवस्थी से पहले एक कोरिया बेस्ड भारतीय यूट्यूबर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जिसके बारे में उन्होंने 3-4 साल पहले एक व्लॉग बनाया था और इसमें दक्षिण कोरिया के क्लबों के बाहर लगे नो ‘इंडियन्स अलाउड के बैनर’ भी दिखाए थे.

एक और यूट्यूबर ने लगाए थे आरोप

साउथ कोरिया के मशहूर जिले ‘इतावन’ और ‘गंगनम’ अपनी नाइटलाइफ़ के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यहीं से सबसे ज्यादा भेदभाव की खबरें आती हैं. इन्हीं जगहों पर यूट्यूबर राज ने अपने साथ हुई घटनाएं रिकॉर्ड की थीं. कई क्लबों में गार्ड्स ने मौखिक तौर पर उन्हें एंट्री देने से मना कर दिया लेकिन कुछ क्लब के बाहर तो सीधा ‘इंडियन्स एंड पाकिस्तानीज आर नॉट अलाउड’ के बोर्ड लगे दिखाई दिए. इसी यूट्यूबर ने कई ऐसे वीडियोज में भारतीयों के प्रति होने वाले खराब बर्ताव के कई वीडियोज सबूत के साथ शेयर किए थे.

भारत में भी कोरियन कंपनी वाला बवाल

हद तो तब हो जाती है जब खुद भारत के अंदर मौजूद कुछ कोरियन कंपनियां अपने रेस्टोरेंट्स में भारतीयों की एंट्री बैन कर देती हैं, जैसा कि आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में देखा गया है. यहां एक कार कंपनी के प्लांट पर 5-7 रेस्टोरेंट बनाए गए थे लेकिन यहां पर ना तो भारतीयों को नौकरी दी गई थी और ना ही यहां उन्हें घुसने की इजाजत थी.’लुकिज्म’ का खतरनाक क्रेज

खूबसूरती को लेकर छोटी सोच

दक्षिण कोरिया दुनिया की सबसे साक्षर कंट्री में से एक है, लेकिन वहां की सोच ‘खूबसूरती’ को लेकर बेहद छोटी है. इसे वहां ‘ओमो ज सांग जुही’ यानी Lookism कहा जाता है, जिसका मतलब है कि लुक्स ही सब कुछ हैं. यहां पर नौकरियों तक के लिए आपके टैलेंट से ज्यादा आपका चेहरा देखा जाता है.

कंपनियां रिज्यूमे के साथ फोटो मांगती हैं और 60% से ज्यादा बिजनेस सिर्फ खूबसूरती के आधार पर कैंडिडेट चुनते हैं. वहां की सरकार और समाज प्लास्टिक सर्जरी को इस कदर बढ़ावा देते हैं कि बच्चों को ग्रेजुएशन गिफ्ट के तौर पर सर्जरी दी जाती है. ऐसे में जो भारतीय उनके ‘ब्यूटी स्टैंडर्ड’ में फिट नहीं बैठते, उन्हें कमतर समझा जाता है.

भारतीयों के प्रति मानसिकता

साउथ कोरिया में भारतीयों को लेकर एक और गलत धारणा यह है कि वहां रहने वाले सभी भारतीय सिर्फ ‘ब्लू कॉलर’ यानी मजदूर वर्ग के हैं. चूंकि वहां लेबर की कमी है और बहुत से भारतीय वहां खेती या फैक्ट्रियों में काम करने जाते हैं, इसलिए वहां के औसत नागरिक की मानसिकता बन गई है कि भारतीय एक पिछड़े और गरीब देश से आए हैं. यह ‘इनफॉर्मेशन गैप’ इतना बड़ा है कि वे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और डॉक्टर्स को भी उसी नजर से देखते हैं.

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