नई दिल्ली. कहते हैं किस्मत उसी का साथ देती है जो खुद पर भरोसा करता है, चुनौतियों से लड़ता है और अपने सपने को पूरा करने के सब कुछ झोंक देता है. इसी बात को साबित किया है अहमदाबाद की तंग गलियों से निकलकर ब्लॉकचेन इंडस्ट्री की दुनिया में बड़ा नाम बनाने वाले जयंती कनानी ने. बेहद गरीब परिवार में जन्मे, जिंदगी की हर मुश्किल से जूझते हुए, कम पैसों में घर चलाते हुए और कर्ज़ में डूबे होने के बावजूद कनानी ने सफल होने की अपनी जिद कभी नहीं छोड़ी. उसी का नतीजा है कि वे आज दुनिया की जानी-मानी ब्लॉकचेन कंपनी पॉलीगॉन (Polygon) के सह-संस्थापक हैं, जिसकी वैल्यू आज 8,300 करोड़ रुपये है.
इस सफलता के पीछे एक लंबी जद्दोजहद छुपी है. एक ऐसी कहानी, जो बताती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो हालात कभी आड़े नहीं आते. जयंती कनानी का जन्म अहमदाबाद के बाहरी इलाके में एक बेहद सामान्य परिवार में हुआ. उनका परिवार एक छोटे से फ्लैट में रहता था. पिता एक डायमंड फैक्ट्री में मामूली वर्कर थे. उनकी कमाई से मुश्किल से ही घर चल पाता था. बचपन से ही जयंती ने गरीबी को करीब से देखा और सिर्फ एक ही सपना देखा, अपने परिवार को इस जिंदगी से बाहर निकालना.
बड़ी मुश्किल से की पढाई
जयंती कनानी के घर के आर्थिक हालत ठीक नहीं थे. फिर भी उनके पिता ने उन्हें जैसे-तैसे कर कंप्यूटर साइंस में B.Tech कराया. क्योंकि घर की हालत खराब थी, इसलिए पढ़ाई के तुरंत बाद उन्हें नौकरी करनी पड़ी. पहली नौकरी में उन्हें सिर्फ 6,000 रुपये मिलते थे. इसी बीच उनके पिता की आंखों की रोशनी कमजोर होने लगी. डॉक्टरों ने काम बंद करने की सलाह दी. अब पूरे घर की जिम्मेदारी 6,000 कमाने वाले जयंती के कंधों पर आ गई. उन्होंने नौकरी बदलकर थोड़ी बेहतर तनख्वाह वाली जगह ली और रात में घर पर छोटे प्रोजेक्ट करके अतिरिक्त कमाई भी शुरू की. लेकिन थकान, जिम्मेदारियां और आर्थिक बोझ बढ़ते गए.
कर्ज लेकर की शादी
कनानी आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे थे. इसी बीच उन्होंने शादी भी कर ली. शादी के लिए उनके पास पैसा नहीं था. उन्हें कर्ज लेना पड़ा. घर के खर्च, पिता की बीमारी और कर्ज, इन सबने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी. एक नौकरी से दूसरी नौकरी तक सफर चलता रहा. दिल में उद्यमी बनने का सपना तो था, लेकिन हिम्मत नहीं थी और हालात भी साथ नहीं दे रहे थे.
संदीप और अनुराग से हुई मुलाकात तो बदली जिंदगी
कनानी का जीवन तब बदला जब एक कंपनी में डेटा एनालिस्ट की नौकरी करते हुए उनकी मुलाकात संदीप नेलवाल और अनुराग अर्जुन से हुई. जयंती कनानी जब एक कंपनी में डेटा एनालिस्ट के तौर पर काम कर रहे थे, तभी उनकी मुलाकात संदीप नेलवाल और अनुराग अर्जुन से हुई. तीनों ही पैसा कमाने के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे. संदीप सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. उन्होंने Deloitte और Wellspun जैसी कंपनियों में काम किया है. इसी तरह तीसरे को-फाउंडर अर्जुन ने पहले जीएसटी से जुड़ा स्टार्टअप शुरू किया था. तीनों ने मिलकर 2017 में पॉलीगोन की शुरुआत कर दी. शुरुआत में इसका नाम मैटिक नेटवर्क रखा गया.
अब 8300 करोड़ वैल्यू वाली कंपनी है पॉलीगोन
साल 2021 में जयंती और उनके साथियों ने अपनी कंपनी का नाम बदलकर पॉलीगोन कर दिया. 8 वर्षों में ही पॉलीगोन ने खूब तरक्की की है. कंपनी की मौजूदा वैल्यू 8300 करोड़ रुपये आंकी गई है. पॉलीगोन को अमेरिका के मशहूर इनवेस्टर और शार्क टैंक जज मार्क क्यूबन (Mark Cuban) से भी फंडिंग मिली है. इसके अलावा कंपनी में सॉफ्टबैंक, टाइगर ग्लोबल और सिकोइया कैपिटल इंडिया ने भी पैसा लगाया है.
क्या करती है पॉलीगोन?
पॉलीगॉन एक ऐसा ब्लॉकचेन प्लेटफ़ॉर्म है, जो Ethereum को तेज, बेहतर और सस्ता बनाता है. इसकी मदद से डेवलपर्स अपने ब्लॉकचेन ऐप बना सकते हैं, NFTs, Web3 प्रोजेक्ट और गेमिंग प्लेटफॉर्म तैयार कर सकते हैं और DeFi प्रोजेक्ट आसानी से स्केल कर सकते हैं. आज Polygon पर 7,000+ dApps चल रहे हैं और यह Web3 दुनिया का सबसे भरोसेमंद नाम बन चुका है. पॉलीगेन के ब्लॉकचेन का गेमिंग प्लेयर्स, नॉन फंजिबल टोकंस और डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस में प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है. मार्च 2021 में नैस्डेक (Nasdac) में लिस्टेड कॉइनबेस ने अपने यूजर को पॉलीगॉन कॉइन में ट्रेड करने की इजाजत दे दी थी.
यह एक लेयर-2 (Layer-2) सॉल्यूशन प्रदान करता है, जो ब्लॉकचेन ट्रांजेक्शन्स को तेज, सस्ता और अधिक कुशल बनाता है. कंपनी की शुरुआत 2017 में हुई थी, जब इसे Matic Network के नाम से लॉन्च किया गया था. 2021 में इसका नाम बदलकर Polygon कर दिया गया. यह Web3 इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां डेवलपर्स आसानी से Ethereum-कम्पेटिबल ब्लॉकचेन नेटवर्क बना सकते हैं.
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