Household Items To Replace: हम रोज घर की कई चीजें बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करते रहते हैं. मोबाइल का कवर गंदा लगे तो बदल देते हैं, लेकिन वही तौलिया, वही बोतल, वही बेडशीट सालों चलती रहती है. बाहर से सब ठीक दिखता है, पर असली गंदगी आंखों से नजर नहीं आती. नमी, पसीना, धूल और खाने-पीने के कण मिलकर इन चीजों को कीटाणुओं का अड्डा बना देते हैं. धीरे-धीरे यही चीजें स्किन प्रॉब्लम, पेट खराब, एलर्जी या बदबू जैसी परेशानियां बढ़ा सकती हैं. कई लोग सोचते हैं कि धोते तो हैं, फिर क्या दिक्कत? लेकिन सिर्फ धोना काफी नहीं होता, क्योंकि समय के साथ सामान घिस जाता है, उसमें छोटे दरार बन जाते हैं, जहां गंदगी जमती रहती है.
साफ दिखने वाली चीज भी अंदर से खराब हो सकती है. अगर आप भी चीजों को “अभी तो चल रही है” सोचकर सालों यूज करते हैं, तो अब थोड़ा अलर्ट होने का वक्त है. यहां जानिए 6 ऐसी घरेलू चीजें जिन्हें तय समय में बदलना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद है.
1. पानी की प्लास्टिक बोतल (हर 6 महीने में बदलें)
रोज साथ रहने वाली पानी की बोतल सबसे ज्यादा नजरअंदाज होती है. बार-बार धोने के बाद भी ढक्कन, स्ट्रॉ और किनारों में नमी फंसी रह सकती है. यही जगह कीटाणु बढ़ने के लिए बढ़िया माहौल देती है. कई बार हल्की बदबू या स्वाद बदलना इसी का संकेत होता है. ज्यादा समय तक प्लास्टिक बोतल यूज करने से उसकी अंदर की सतह भी घिसने लगती है. बेहतर है कि 6 महीने में बोतल बदलें या स्टील की बोतल अपना लें.
2. नहाने का तौलिया (हर 2 साल में बदलें)
तौलिया हमेशा गीला रहता है, खासकर अगर बाथरूम में ही टंगा रहता हो. गीलापन कीटाणुओं को तेजी से बढ़ाता है. चाहे आप हफ्ते में दो बार धो लें, फिर भी कपड़ा धीरे-धीरे सख्त और बदबूदार हो सकता है, अगर तौलिया रगड़ने पर खुरदुरा लगे या उसमें से अजीब गंध आए, तो समझिए नया लेने का समय है. कोशिश करें कि हर सदस्य का अलग तौलिया हो.
3. बेडशीट (हर 2–3 साल में बदलें)
बिस्तर पर हम रोज कई घंटे बिताते हैं. पसीना, त्वचा के बारीक कण और बॉडी ऑयल कपड़े में जमा होते रहते हैं. धुलाई के बाद भी सब कुछ पूरी तरह नहीं निकलता. समय के साथ कपड़ा पतला और कमजोर हो जाता है. इससे एलर्जी या स्किन इरिटेशन की दिक्कत बढ़ सकती है. 2–3 साल बाद बेडशीट बदलना अच्छा रहता है, भले ही वह ऊपर से ठीक दिखे.
4. घर में पहनने वाली चप्पल (8–12 महीने में बदलें)
घर की चप्पलें बाथरूम, किचन और फर्श की गंदगी से रोज रूबरू होती हैं. इनमें पसीना भी जमा होता है. इससे फंगस और बदबू का खतरा रहता है. पुरानी चप्पल की गद्दी दब जाती है, जिससे पैरों में दर्द भी हो सकता है. हर 8 से 12 महीने में नई चप्पल लेना पैरों की सेहत के लिए अच्छा है.
5. कपड़े का किराना बैग (हर 2 साल में बदलें)
कपड़े के बैग पर्यावरण के लिए अच्छे हैं, लेकिन इन्हें लोग धोना भूल जाते हैं. सब्जी, फल, कभी-कभी कच्चा खाना रखने से बैग में कीटाणु चिपक सकते हैं. नमी या दाग लगे बैग जल्दी खराब होते हैं. अगर बैग में बदबू, दाग या कपड़ा ढीला लगने लगे, तो नया ले लें. बीच-बीच में धोना भी जरूरी है.
6. प्लास्टिक आइस क्यूब ट्रे (हर 2 साल में बदलें)
फ्रीजर में रखी चीजें साफ लगती हैं, पर प्लास्टिक ट्रे में छोटे कट या दरार बन जाते हैं. इनमें गंदगी और फंगस छिप सकती है. अगर बर्फ का स्वाद अजीब लगे या ट्रे पर धब्बे दिखें, तो तुरंत बदलें. ठंडी जगह होने से सफाई की जरूरत खत्म नहीं होती.
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