दुनिया के कई देश इस्लामिक आतंकवाद की पीड़ा झेल रहे हैं. भारत-अमेरिका सहित यूरोप को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ी है. लेकिन, ये इस्लामिक आतंकवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अब अफ्रीकी देश नाइजीरिया के पश्चिमी हिस्से में एक बार फिर आतंकवाद का साया मंडराया है. मंगलवार शाम को क्वारा राज्य के दो दूरस्थ गांवों वोरो और नुकू पर इस्लामिक स्टेट से जुड़े सशस्त्र चरमपंथियों ने हमला कर कम से कम 162 लोगों की हत्या कर दी. यह हाल के महीनों में देश के सबसे खौफनाक हमलों में से एक है.
एक स्थानीय सांसद मोहम्मद ओमार बियो ने बताया कि हमला इस्लामिक स्टेट से संबद्ध ग्रुप ‘लकुरावा’ ने अंजाम दिया. लकुरावा मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में सक्रिय है और इसका मूल पड़ोसी देश नाइजर में बताया जाता है. 2023 के सैन्य तख्तापलट के बाद यह ग्रुप नाइजीरिया की सीमा क्षेत्रों में अधिक सक्रिय हो गया है. हालांकि, अभी तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. हमलावरों ने गांवों में घरों और दुकानों को आग लगा दी, लोगों को इकट्ठा किया, उनके हाथ पीछे बांधे और गोली मार दी.
हर तरफ खून से लथपथ लाशें
स्थानीय टीवी फुटेज में जमीन पर खून से लथपथ लाशें दिखाई दीं, जिनमें से कई के हाथ बंधे हुए थे. क्वारा राज्य के रेड क्रॉस सचिव आयोडेजी इमैनुएल बाबाओमो ने कहा कि प्रभावित इलाका इतना दूरस्थ है कि राहत टीम राज्य की राजधानी से लगभग 8 घंटे की दूरी पर पहुंचने में असमर्थ रही है. उन्होंने मौतों की संख्या 162 बताई, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 170 तक पहुंचने की आशंका जताई गई है क्योंकि अभी भी लाशों की तलाश जारी है.
गवर्नर अब्दुल रहमान अब्दुल रजाक ने हमले को आतंकी सेलों की कायरतापूर्ण प्रतिक्रिया करार दिया, जो राज्य में चल रही सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया. नाइजीरिया लंबे समय से सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है. पूर्वोत्तर में बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रॉविंस (ISWAP) जैसे ग्रुप विद्रोह चला रहे हैं, जबकि उत्तर-पश्चिम और मध्य क्षेत्रों में फिरौती के लिए अपहरण और हमले बढ़ गए हैं.
लकुरावा को इस्लामिक स्टेट साहेल प्रॉविंस (ISSP) का स्थानीय नाम माना जाता है. एक अलग घटना में मंगलवार को ही उत्तर-पश्चिमी कट्सिना राज्य के डोमा गांव में अज्ञात बंदूकधारियों ने कम से कम 13 लोगों को मार डाला. पिछले सप्ताह बोको हराम ने पूर्वोत्तर में एक निर्माण स्थल और सेना बेस पर हमले में 36 लोगों की जान ली थी.
वाशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता जेम्स बार्नेट का मानना है कि क्वारा हमला संभवतः बोको हराम के एक गुट जामा’तु अहलिस सुन्ना लिद्दा’वाती वाल-जिहाद (JAS) द्वारा किया गया हो सकता है, जो क्षेत्र में हाल के नरसंहारों के लिए जिम्मेदार रहा है.
अमेरिका भी नाइजीरिया की सुरक्षा स्थिति पर नजर रखे हुए है. यूएस अफ्रीका कमांड के प्रमुख ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका ने नाइजीरिया में सैन्य अधिकारियों की एक छोटी टीम भेजी है. दिसंबर में अमेरिकी बलों ने IS से जुड़े चरमपंथियों पर हवाई हमले किए थे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया पर ईसाई नागरिकों की सुरक्षा न करने का आरोप लगाते हुए हमले की धमकी भी दी थी.
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