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Diriya ka ilaj : इस बीमारी में शरीर से अत्यधिक मात्रा में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं. समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो लेने के देने पड़ सकते हैं. जान तक जा सकती है.
चंदौली. डायरिया एक आम, लेकिन गंभीर पाचन संबंधी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार दस्त की समस्या होती है और मल पानी जैसा पतला हो जाता है. यह समस्या बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी अपने चपेट में ले सकती है. डायरिया के कारण शरीर से अत्यधिक मात्रा में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो जाती है. यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है. आमतौर पर डायरिया दूषित पानी, खराब खानपान, गंदगी और संक्रमण के कारण होता है. मानसून या बाढ़ जैसे हालातों में यह बीमारी और तेजी से फैलती है.
सबसे प्रभावी घरेलू उपचार
चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र से होकर गुजरने वाले डैम से पानी छोड़े जाने के कारण बबुरी क्षेत्र में बाढ़ के हालात बन गए हैं. ऐसे में लोगों को तरह-तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें डायरिया प्रमुख है. गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से तराई क्षेत्रों में रहने वाले लोग डरे हुए हैं और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं. चंदौली राजकीय महिला चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. एसके चतुर्वेदी लोकल 18 से बताते हैं कि डायरिया का सबसे सरल और प्रभावी घरेलू उपचार है शरीर में पानी और नमक की कमी को पूरा करना. इसके लिए ORS का सेवन बहुत जरूरी है. ORS घोल शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है. नींबू, नमक और चीनी मिलाकर बनाया गया नीमकोल भी पिया जा सकता है. यदि मरीज की हालत में सुधार नहीं होता डॉक्टर की सलाह पर ड्रिप देने की आवश्यकता भी पड़ सकती है.
इन जरूरी सावधानियों का करें पालन
डॉ. एसके चतुर्वेदी के अनुसार, डायरिया से बचाव के लिए कुछ जरूरी सावधानियों का पालन करना चाहिए. सबसे पहले, भोजन से पहले और शौच के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए. पीने के लिए केवल उबला हुआ या क्लोरीनयुक्त पानी ही इस्तेमाल करें. खुले और गंदे स्रोतों से पानी पीने से बचें. घर और उसके आसपास की सफाई का विशेष ध्यान रखें, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके. डायरिया एक ऐसी बीमारी है, जो सावधानी और जागरूकता से रोकी जा सकती है. स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और समय पर इलाज से इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है. बाढ़ जैसे हालातों में लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि इस बीमारी से बचा जा सके.
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