5 घंटे पहले
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आज (24 फरवरी) से होलाष्टक शुरू हो रहा है। होली से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। इन दिनों में विवाह, जनेऊ, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कामों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। होलिका दहन के बाद होलाष्टक खत्म होता है। इस साल होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण होगा। तिथियों की घट-बढ़ और चंद्र ग्रहण की वजह से होली मनाने की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं, कुछ पंचांग 3 मार्च और कुछ पंचांग 4 मार्च को होली मनाने की सलाह दे रहे हैं।
3 मार्च को सुबह 6.21 बजे से शुरू होगा सूतक
3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर करीब 3.21 बजे से शुरू होगा और शाम 6.47 बजे तक रहेगा। यह भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, इसलिए इस ग्रहण का सूतक भी रहेगा। चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। 3 मार्च को सुबह 6.21 बजे सूतक शुरू होगा और शाम को 6.47 बजे ग्रहण के साथ खत्म होगा।
ग्रहण और सूतक के समय में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, इसलिए कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि 3 मार्च को रंग-गुलाल नहीं खेलना चाहिए। सूतक के समय में मानसिक रूप से मंत्र जप, दान-पुण्य करना चाहिए। ग्रहण और सूतक की वजह से 4 मार्च को रंगों की होली (धुलंडी) मनाई जाने की सलाह दी जा रही है, हालांकि कुछ पंचांग में 3 मार्च को होली खेलने की सलाह दी गई है।
होलाष्टक से जुड़ी मान्यताएं
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हो जाता है। होलाष्टक का अर्थ है- होली से पहले के आठ दिन। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इन आठ दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं, क्योंकि इस दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र हो जाती है। ग्रहों की उग्रता के कारण मांगलिक कार्यों के लिए शुभ योग नहीं बनते हैं।
भक्त प्रह्लाद से जुड़ी है होलाष्टक की कथा
कथा के मुताबिक, असुरराज हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को फाल्गुन कृष्ण अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक अनेक यातनाएं दी थीं, क्योंकि वह भगवान विष्णु की भक्ति करता था।
इतनी यातनाओं के बाद भी प्रह्लाद की भक्ति अटूट रही। अंत में हिरण्यकश्यपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गया और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
होलाष्टक में करें ये शुभ काम
होलाष्टक के दिनों में ध्यान, जप और पूजा करनी चाहिए।
शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएं, बिल्वपत्र अर्पित करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
दान-पुण्य, हवन, अभिषेक, ध्यान और तीर्थ यात्रा करना शुभ फलदायी माना गया है।
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