शाजापुर कलेक्टर के आदेश पर हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। 25 मार्च को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जयकुमार पिल्लई ने कलेक्टर ऋजु बाफना के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा कि शाजापुर कलेक्टर को नियमों की जानकारी नहीं है। वे बिना सोचे-समझे आदेश पारित कर देती हैं। यह कुछ ही दिनों में कलेक्टर को हाईकोर्ट से मिली तीसरी फटकार है। यह मामला कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी जयंत बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि रोकने से जुड़ा है। शाजापुर कलेक्टर ने वाहन स्टैंड ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। एफआईआर दर्ज होने के बाद ठेकेदार ने कर्मचारी जयंत बघेरवाल पर आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए। दो दिन में दो आदेश इन आरोपों के आधार पर, कलेक्टर ने बिना किसी जांच के 27 फरवरी और 28 फरवरी 2025 को दो आदेश जारी किए। पहले आदेश में बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि रोकने का निर्देश दिया गया, जबकि दूसरे आदेश में उन्हें एसडीएम कार्यालय गुलाना अटैच कर दिया गया। वेतन वृद्धि रोकने के आदेश के खिलाफ बघेरवाल ने पहले कमिश्नर उज्जैन के समक्ष अपील की, जिन्होंने कलेक्टर के आदेश को यथावत रखा। इसके बाद बघेरवाल ने हाईकोर्ट का रुख किया। इंदौर हाईकोर्ट ने 25 मार्च को इस आदेश पर स्थगन (स्टे) जारी कर दिया। हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश हाईकोर्ट ने शाजापुर कलेक्टर को 15 दिन के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस हलफनामे में कलेक्टर को स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने किन नियमों के तहत बिना जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए। स्थगन आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट लिखा है कि कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है और बिना किसी विभागीय जांच के वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी कर दिए। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को फटकार लगाते हुए कहा कि शाजापुर कलेक्टर कुछ भी आदेश पारित कर देती हैं, जैसा कि आबकारी अधिकारी के मामले में भी किया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि कलेक्टर को कानून की जानकारी नहीं है। याचिकाकर्ता को मिला स्टे इस मामले में हाईकोर्ट एडवोकेट यश नागर ने बताया याचिका कर्ता जयंत बघेरवाल की दो वेतन वृद्धि और गुलाना अटैच किए जाने के मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए स्टे आदेश जारी किया है और 15 दिवस में कलेक्टर को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा गया जिसमें स्पष्ट करना है किन नियमों के तहत बिना जांच के दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए। दो मामलों में लग चुकी है फटकार .