गुड़हल में फूल नहीं आ रहे? बनाएं लिक्विड खाद, गुड़हल को बना देगी फूलों की फैक्ट्री!

Hibiscus Fertilizer In Summer: गुड़हल का पौधा लगभग हर घर के गार्डन या बालकनी में देखने को मिल जाता है. इसके बड़े-बड़े रंगीन फूल न सिर्फ घर की खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि पूजा और आयुर्वेदिक उपयोग में भी काम आते हैं, लेकिन कई लोगों की शिकायत रहती है कि उनका गुड़हल पौधा तो हरा-भरा रहता है, पर उसमें फूल बहुत कम आते हैं या बिल्कुल बंद हो जाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण मौसम के हिसाब से सही देखभाल और सही पोषण न मिलना होता है. खासकर गर्मी की शुरुआत गुड़हल के लिए बेहद अहम समय माना जाता है, क्योंकि इसी समय पौधा नई ग्रोथ बनाता है और आने वाले महीनों के फूलों की तैयारी करता है, अगर इस समय पौधे को सही धूप, सही पानी और सही खाद मिल जाए, तो पूरा सीजन यह पौधा फूलों से भर सकता है.

गार्डनिंग एक्सपर्ट भी मानते हैं कि गर्मी शुरू होते ही थोड़ी सी खास देखभाल और घर पर बनी पोषक लिक्विड खाद गुड़हल को तेजी से एक्टिव कर देती है. आइए जानते हैं गर्मी की शुरुआत में गुड़हल को कौन-सी खाद देनी चाहिए और कैसे इसकी देखभाल करें ताकि पौधा फूलों से लद जाए.

गुड़हल को धूप क्यों है सबसे जरूरी
गुड़हल को भरपूर धूप पसंद होती है. इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां रोज कम से कम 7–8 घंटे सीधी धूप आती हो. कई बार लोग इसे छांव या हल्की रोशनी वाली जगह रख देते हैं, जिससे पौधा तो जिंदा रहता है लेकिन फूल बनना बंद हो जाता है. गर्मी की शुरुआत में धूप की मात्रा बढ़ती है, जो गुड़हल के लिए फायदेमंद होती है. धूप मिलने से पौधा ज्यादा ऊर्जा बनाता है और वही ऊर्जा कलियों और फूलों में लगती है. इसलिए इस मौसम में पौधे की लोकेशन बदलकर उसे ज्यादा रोशनी वाली जगह रखना बहुत जरूरी है.

गर्मी शुरू होते ही करें प्रूनिंग और मिट्टी ढीली
अगर सर्दियों के बाद पौधा थोड़ा सूखा या बेजान दिख रहा है, तो हल्की कटाई-छटाई जरूर करें. सूखी, पतली या अंदर की तरफ बढ़ रही टहनियां काट दें. इससे पौधे में नई शाखाएं निकलती हैं और हर नई शाखा पर फूल आने की संभावना बढ़ जाती है. इसके साथ गमले की मिट्टी को ऊपर से हल्का खुरचकर ढीला करें. इसे गुड़ाई कहा जाता है. इससे मिट्टी में हवा पहुंचती है और जड़ों की ग्रोथ तेज होती है. साथ ही गमले में उगे छोटे-छोटे खरपतवार भी निकाल दें, क्योंकि ये पौधे का पोषण खींच लेते हैं.

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पानी देने का सही तरीका
गर्मी आते ही लोग पौधों को बार-बार पानी देने लगते हैं, जो गुड़हल के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसकी जड़ें ज्यादा गीली मिट्टी में जल्दी सड़ती हैं.पानी देने का सबसे सही नियम है -जब गमले की ऊपर की 1 से 1.5 इंच मिट्टी सूखी दिखे, तभी पानी डालें. मिट्टी हल्की नम रहे, लेकिन उसमें पानी जमा न रहे. सुबह या शाम के समय पानी देना बेहतर रहता है. दोपहर की तेज गर्मी में पानी देने से जड़ों को झटका लग सकता है.

कीड़ों से बचाव जरूरी
गर्मी में गुड़हल पर सफेद रूई जैसे कीड़े (मिलीबग) या छोटे काले कीड़े लगना आम बात है. ये पत्तियों और कलियों का रस चूस लेते हैं, जिससे फूल गिर जाते हैं या बनते ही नहीं. इससे बचने के लिए 1 लीटर पानी में लगभग 8 ml नीम ऑयल मिलाकर स्प्रे करें. हर 8–10 दिन में पौधे की पत्तियों, टहनियों और कलियों पर छिड़काव करें. स्प्रे का प्रेशर थोड़ा तेज रखें ताकि कीड़े हट जाएं. यह तरीका सुरक्षित और असरदार है.

गर्मी की शुरुआत में सबसे असरदार लिक्विड खाद
गुड़हल को फूलों से भरने के लिए सरसों खली की लिक्विड खाद बेहद असरदार मानी जाती है. इसे बनाना भी आसान है.
बनाने का तरीका:
-1 लीटर पानी लें
-उसमें 100 ग्राम सरसों खली मिलाएं
-ढक्कन लगाकर 4–5 दिन छांव में रखें
-बीच-बीच में एक बार हिलाएं

5 दिन बाद यह घोल गाढ़ा और पोषक बन जाता है. अब इसे सीधे पौधे में नहीं डालना चाहिए. पहले 1 कप घोल को 1 लीटर पानी में मिलाकर पतला करें.

खाद को और ताकतवर कैसे बनाएं
अगर इस लिक्विड खाद में 1 चम्मच इस्तेमाल की हुई चायपत्ती और 1 चम्मच सूखे केले के छिलके का पाउडर मिला दिया जाए, तो यह और ज्यादा पोषक बन जाती है. चायपत्ती मिट्टी को हल्का एसिडिक बनाती है, जो गुड़हल को पसंद है. वहीं केले के छिलके में पोटाश होता है, जो फूल बनने में मदद करता है.

इस्तेमाल का तरीका
हर 12–15 दिन में लगभग 150–200 ml पतली खाद गमले की मिट्टी में डालें. ध्यान रखें कि मिट्टी पहले से हल्की नम हो. सूखी मिट्टी में खाद न डालें.

अतिरिक्त देखभाल जो फूल बढ़ाती है
महीने में एक बार गमले की ऊपर की मिट्टी बदलें या नई मिट्टी मिलाएं. बहुत छोटा गमला हो तो बड़ा गमला करें. सूखे फूल और बीज बनती कलियां हटाते रहें. पत्तियों पर धूल जमा हो तो पानी से साफ करें. ये छोटे-छोटे काम पौधे को एक्टिव रखते हैं और लगातार फूल आते रहते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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