अरे कुछ नहीं, सब ठीक है! 90% महिलाओं की ये आदत कैसे बन रही मुसीबत? पैदा हो जाता है जान का

Women Health: आपने अपनी मां, दादी या चाची को अक्सर दर्द से कराहते या थकान में डूबे देखा होगा लेकिन शायद ही आपने कभी उन्हें डॉक्टर के पास दौड़ते, आराम करते या अपनी परेशानी बताते सुना हो क्योंकि जब भी वे परेशान होती हैं तो एक ही वाक्य उनके मुंह से निकलता है, अरे कुछ नहीं, सब ठीक है… हालांकि महिलाओं की ये आदतें भले ही लोगों को सामान्य लगें लेकिन कुछ समय बाद ये नासूर बन जाती हैं. उनका अपने ही शरीर के संकेतों को इग्नोर करना उनके लिए मुसीबत बनता जा रहा है.

रोजवॉक बाय रेनबो अस्पताल में ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. पायल चौधरी बताती हैं कि अक्सर उनके पास आने वाले केसेज में देखा गया है कि कई महिलाएं अपने परिवार और काम की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हुए अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं. शरीर द्वारा दिए जाने वाले शुरुआती चेतावनी संकेतों को भी वे गंभीरता से नहीं लेतीं. जिसकी वजह से आने वाले समय में कई गंभीर बीमारियों की शिकार बन जाती हैं.

कौन-कौन से संकेत देता है शरीर

  1. . लगातार थकान
  2. . बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन में बदलाव होना
  3. . मासिक धर्म का अनियमित होना
  4. . पीरियड क्रैंप्स या मासिक धर्म में ज्यादा दर्द
  5. . असामान्य योनि स्त्राव
  6. . लंबे समय तक रहने वाला पेल्विक दर्द
  7. . अक्सर तनाव होना

डॉ. कहती हैं कि ये वैसे तो बेहद कॉमन लक्षण हैं लेकिन ये लक्षण कई बार गंभीर बीमारियों का साइन भी होते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है. ये अक्सर सामान्य हार्मोनल बदलाव समझकर टाल दिए जाते हैं लेकिन कई बार ये संकेत लाइफलॉन्ग हार्मोनल असंतुलन, थायरॉयड की समस्या, एनीमिया, फाइब्रॉइड्स, एंडोमेट्रियोसिस, संक्रमण या हार्मोनल असंतुलन या प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं.

ये हैं गंभीर लक्षण

  1. . स्तन के ऊतकों में बदलाव
  2. . असामान्य डिस्चार्ज या लगातार पेट फूलना
  3. . बार-बार सिरदर्द होना
  4. . मूड स्विंग्स
  5. . बार-बार सर्दी जुकाम होना
  6. . भूख कम लगना
  7. . नींद न आना या नींद से जुड़ी समस्याएं होना

डॉ. पायल कहती हैं कि ऐसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये कभी-कभी ऐसी स्थितियों का संकेत हो सकते हैं जिनके लिए डॉक्टर की जांच जरूरी होती है. ये कई गंभीर बीमारियों, शरीर में पोषण की भारी कमी, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों या जीवनशैली से जुड़े कारणों की ओर इशारा कर सकती हैं.

पेशाब में इन्फेक्शन छोटी नहीं बड़ी बात है
महिलाओं में एक और आम लेकिन अक्सर अनदेखा किया जाने वाला लक्षण है पेशाब के दौरान लगातार असहजता, जलन या बार-बार होने वाला संक्रमण. कई महिलाएं मान लेती हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन अगर मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) का समय पर इलाज न किया जाए तो यह आगे चलकर किडनी और अन्य जरूरी ऑर्गन को भी नुकसान हो सकता है.

दर्द झेलने की आदत बहुत खराब
जिंदल फाउंडेशन, हॉस्पिटल ऑन व्हील्स प्रोजेक्ट में शामिल गायनेकोलॉजिस्ट डॉ मंजू मिश्रा कहती हैं कि कई महिलाएं असहजता को सहने की आदत डाल लेती हैं जो सबसे खराब है. ये कई बार लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं लेकिन हमारा शरीर बहुत समझदार होता है और जब कुछ ठीक नहीं होता, तो वह लगातार संकेत देता है. इन संकेतों को पहचानना जरूरी है.

ये लक्षण न बन जाएं आफत, इसलिए क्या करें
डॉ. मंजू कहती हैं कि महिलाओं के लिए अपने समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. नियमित स्वास्थ्य जांच, स्तन और सर्वाइकल स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना और डॉक्टर से खुलकर बातचीत करना, इन सभी से बीमारियों का समय रहते पता लगाने और उन्हें रोकने में मदद मिलती है. महिलाओं को अपने शरीर की बात सुनने और अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने में कभी अपराधबोध महसूस नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई बीमारियों का प्रभावी ढंग से इलाज तब संभव होता है जब उन्हें शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाए.

अपने शरीर की सुनें
डॉ. पायल कहती हैं कि अपने शरीर की सुनने का मतलब है ऐसे लक्षणों पर ध्यान देना जो लंबे समय तक बने रहें, समय के साथ बढ़ जाएं या आपकी सामान्य स्वास्थ्य स्थिति से अलग महसूस हों. समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरी जांच करवाना कई परेशानियों को रोकने में मदद कर सकता है और लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करता है. नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, तनाव का सही प्रबंधन और नियमित शारीरिक गतिविधि ऐसे महत्वपूर्ण कदम हैं जो महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग और सक्रिय बनाए रखते हैं.

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