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Health Tips: कनकौआ, जिसे लोग बस की गांठ वाली जड़ी बूटी भी कहते हैं, दर्द और सूजन में तुरंत राहत देने वाला देसी नुस्खा है. इसे धोकर प्याज के साथ पीसकर प्रभावित हिस्से पर लगाने से एक घंटे में असर दिखने लगता है. यह पूरी तरह से रसायन मुक्त, सुरक्षित और खर्च रहित उपाय है, जो पीढ़ियों से घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा में इस्तेमाल होता आ रहा है.
प्रकृति में ऐसे अनेकों पेड़ पौधे पाए जाते हैं जो मानव शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. ऐसा हो एक पौधा है, कनकौआ, जिसे लोग बस की गांठ वाली जड़ी बूटी भी कहते हैं. यह पौधा दिखने में साधारण सा होता है, लेकिन इसके आयुर्वेदिक फायदे अनगिनत हैं. यह देसी नुस्खा पीढ़ियों से घरेलू और पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होता आया है. चोट और सूजन में यह सबसे अधिक फायदेमंद है.

हेल्थ एक्सपर्ट डॉ अंजू चौधरी ने बताया कि पुराने समय में जब आधुनिक दवाइयां उपलब्ध नहीं थीं, तो अचानक चोट लगने, पैर मुड़ने या गंभीर दर्द की स्थिति में कनकौआ का ही सहारा लिया जाता था. यह नुस्खा राहत देता था.

इस पौधे का उपयोग आसान है, पहले इसे धोकर छोटे टुकड़े कर लें. फिर देसी प्याज के साथ ओखली में डालकर पीसें. जब तक मिश्रण पेस्ट न बन जाए, तब तक कूटते रहें. यह पेस्ट सीधा उस हिस्से पर लगाया जाता है जहा दर्द या सूजन होती है.
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कनकौआ के पेस्ट से असर तुरंत दिखने लगता है. एक घंटे में ही दर्द कम होने लगता है और सूजन धीरे-धीरे गायब हो जाती है. यह जड़ी बूटी पूरी तरह से रसायन मुक्त है और इसके किसी तरह के साइड इफेक्ट नहीं माने जाते.

कनकौआ पौधा केवल औषधि नहीं, बल्कि परंपराओं का प्रतीक भी है, क्योंकि इसका उपयोग प्राचीन समय से होता आ रहा है. आधुनिक दवाइयों जितनी या कई बार उससे भी अधिक शक्ति होती है, जो स्वास्थ्य लाभ देने में कारगर साबित होती है. इससे वर्तमान में भी कई शक्तिवर्धक आयुर्वेदिक दवा बनती है.

हेल्थ एक्सपर्ट डॉ अंजू चौधरी ने बताया कि हल्की चोट, मोच या पैर में दर्द होने पर यह पेस्ट बेहद असरदार है. गांवों में आज भी लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में इस्तेमाल करते हैं. यह नुस्खा खर्च रहित, सुरक्षित और तुरंत असर करने वाला माना जाता है, जिसे हर कोई आसानी से बना सकता है.