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Kasamard Plant Benefits for Cough & Asthma: कासमर्द एक सामान्य पौधे की तरह दिखने के बावजूद श्वसन रोगों, विशेष रूप से खांसी और दमा में बेहद प्रभावी है. यह सिद्ध करता है कि हमारे आसपास की प्रकृति में कितने अद्भुत उपचार छिपे हुए हैं, जिन्हें केवल पहचानने और सही उपयोग करने की आवश्यकता है.
प्रकृति ने हमें कई मूल्यवान औषधीय पौधे दिए हैं. काश मर्दा, जिसे कसौंदी भी कहते हैं, उन्हीं में से एक है. यह अक्सर सड़क के किनारे उगता है. यह साधारण दिखने वाला पौधा वास्तव में खाँसी, दमा और अन्य श्वास संबंधी रोगों के लिए एक वरदान है. इसकी महत्ता प्राचीन काल से स्थापित है. आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ चरक संहिता में भी इसका उल्लेख ‘कासमर्द’ नाम से मिलता है. यह इसकी प्राचीन औषधीय महत्ता को सिद्ध करता है. यानी, इस पौधे का उपयोग हजारों वर्षों से आयुर्वेद में औषधि के रूप में किया जा रहा है.

काश मर्दा (कासमर्द) अक्सर सड़क के किनारे या खाली पड़ी जमीनों पर उग जाता है, जिसके कारण लोग इसे साधारण झाड़ी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन आयुर्वेद में इसकी औषधीय क्षमता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है. यह पौधा अपने एंटी-एलर्जिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है. इसके औषधीय उपयोग के लिए इसकी पत्तियाँ, बीज और जड़ तीनों का इस्तेमाल किया जाता है.

कासमर्द के बीज खाँसी के रोगी के लिए तुरंत राहत देने वाली औषधि की तरह कार्य करते हैं. लोक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान के अनुसार, यदि इन बीजों को पीसकर पाउडर बना लिया जाए और रात को सोने से पहले रोगी को चुटकी भर दिया जाए, तो खाँसी में तत्काल आराम मिलता है. इसका मुख्य प्रभाव यह है कि यह गले में जमा कफ को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे रोगी को रात भर खाँसी नहीं चलती. इसका गर्म और एंटी-एलर्जिक प्रभाव गले की सूजन, जलन और विशेष रूप से रुक-रुककर आने वाली सूखी खाँसी को तुरंत शांत कर देता है, जिससे रात में आराम की नींद सुनिश्चित होती है.
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हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर अंजु चौधरी ने बताया कि कासमर्द का उपयोग करने से दमा और पुरानी खांसी जड़ से खत्म हो जाती है. इसके बीज और पत्तियों में मौजूद तत्व दमा के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं. सांस लेने में तकलीफ, सीने में भारीपन और खांसी में राहत मिलती है. इसके अलावा यह पौधा त्वचा रोगों में भी उपयोगी है. इसके पत्तों में मौजूद रोगाणुरोधी गुण फोड़े-फुंसियों, खुजली और त्वचा के बैक्टीरियल संक्रमण में लाभ देते हैं.

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार यह मधुमेह में सहायक होता है. इसके एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसी के साथ घाव भरने में मददगार होता है. इसके पत्तों या बीजों का लेप घाव को जल्दी भरने में सहायक होता है क्योंकि यह संक्रमण को रोकता है. यह पेट के रोगों में लाभकारी होता है. इसका रस पेट के विकारों, जैसे अपच और गैस में भी उपयोगी माना गया है.

कासमर्द का उपयोग इसके बीज, पत्तियों और जड़ों से किया जाता है. खांसी के लिए इसके बीज सबसे प्रभावी माने जाते हैं. बीजों को साफ करके हल्का सुखा लें और फिर पीसकर महीन पाउडर बना लें. रात को सोने से पहले चुटकी भर यह पाउडर गुनगुने पानी के साथ ले लेने से सूखी या तीव्र खांसी तुरंत शांत हो जाती है और गले में राहत मिलती है. इसके अलावा, त्वचा रोगों में इसकी पत्तियों का पेस्ट बनाकर प्रभावित स्थान पर लगाया जाता है, जिससे फोड़े-फुंसियों और खुजली में आराम मिलता है. पेट के रोगों के लिए इसकी पत्तियों या जड़ का काढ़ा बनाकर थोड़ी मात्रा में दिया जाता है.

कासमर्द एक ऐसा पौधा है जिसे प्रकृति ने हमें बिना मेहनत के, बिल्कुल आसानी से उपलब्ध करा रखा है.इसके बीज खांसी के मरीज के लिए तुरंत राहत देने वाली प्राकृतिक दवा की तरह हैं.आज जब लोग महंगी दवाओं की तलाश में रहते हैं, वहीं यह साधारण-सा पौधा खांसी और श्वास रोगों के उपचार में चमत्कारी लाभ देता है.क्योंकि यह वास्तव में स्वास्थ्य का छिपा हुआ खजाना है.