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Best Time to Drink Milk: आयुर्वेद में दूध को सिर्फ पोषण नहीं, बल्कि औषधि माना गया है. सही समय और तरीके से पिया जाए तो यह शरीर, मन और आत्मा तीनों को पोषण देता है. रात में हल्का गुनगुना दूध पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है. दूध हड्डियों को मजबूत करने, नींद सुधारने और थकान मिटाने में मदद करता है. लेकिन इसे गलत चीजों के साथ लेना नुकसानदायक हो सकता है. आइए जानते हैं दूध पीने के सही नियम और इसके आयुर्वेदिक फायदे.
भारत में प्राचीन समय से ही दूध को संपूर्ण आहार और अमृत तुल्य माना गया है. सिर्फ पोषण के लिए ही नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली औषधि के रूप में भी इसकी पहचान है. आयुर्वेद के अनुसार दूध सिर्फ पोषण का साधन नहीं, बल्कि औषधि भी है, बशर्ते इसे सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से लिया जाए. दूध का रस मीठा, वीर्य शीतल और विपाक मधुर होता है. गुणों में यह भारी, चिकनाई युक्त और बलवर्धक माना गया है. यह खासकर वात और पित्त दोष को शांत करता है और शरीर, मन और आत्मा तीनों को पोषण देता है.

दूध को कई स्वास्थ्य लाभों का खजाना माना जाता है. यह मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर की संरचना को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके अलावा यह दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करता है, जिससे मानसिक एकाग्रता बेहतर होती है. रात में गुनगुना दूध पीने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे शारीरिक और मानसिक थकान दूर होती है. दूध में मौजूद कैल्शियम और विटामिन-D का संयोजन हड्डियों को मजबूत करने के लिए आवश्यक है. यह रक्त को शुद्ध करके त्वचा पर प्राकृतिक चमक लाता है और मानसिक-शारीरिक थकान में ऊर्जा प्रदान करके स्फूर्ति देता है.

आयुर्वेद के अनुसार दूध पीने का सबसे सही समय रात में माना गया है. दिन के समय दूध भारी हो सकता है, जिससे पाचन पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है. इसलिए रात में सोने से कुछ देर पहले हल्का गुनगुना दूध पीने की सलाह दी जाती है. इससे पाचन तंत्र पर कम जोर पड़ता है और यह शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाता है. सुबह खाली पेट दूध नहीं लेना चाहिए, खासकर अगर आपका पाचन कमजोर हो या आपको कफ की दिक्कत हो. सुबह दूध पीने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है और भारीपन महसूस हो सकता है.

आयुर्वेद में ‘विरुद्ध आहार’ (विपरीत भोजन) की अवधारणा है, जिसमें कुछ खाद्य पदार्थों को एक साथ खाने से बचने की सलाह दी जाती है. दूध के साथ कुछ चीजें मिलाकर पीना हानिकारक हो सकता है. खट्टे फल और साइट्रस जूस यह दूध को फाड़ सकता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. नमक और मांसाहार दूध के साथ नमक या मांसाहार का सेवन पाचन में गड़बड़ी पैदा कर सकता है और त्वचा रोग या एलर्जी जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है. दही या सोडा इन चीजों को दूध के साथ लेने से बचना चाहिए, क्योंकि ये पाचन प्रक्रिया को बाधित करते हैं.

सादा दूध पीना लाभकारी है, लेकिन इसमें कुछ आयुर्वेदिक औषधियां मिलाकर पीने से और अधिक लाभ मिलता है. हल्दी वाला दूध रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है और सूजन को कम करता है. अश्वगंधा दूध बल, वीर्य और सहनशक्ति (Stamina) बढ़ाने में सहायक है. त्रिफला दूध यह आंखों के स्वास्थ्य और त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है. दालचीनी दूध शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. केसर दूध त्वचा पर चमक लाने और प्रजनन शक्ति को बढ़ाने में उपयोगी है. जायफल दूध अनिद्रा की समस्या में सुधार कर अच्छी नींद लाने में मदद करता है.

पाचन को आसान बनाने के लिए हमेशा दूध को उबालकर ही पिएं, ताकि यह पचने में आसान हो जाए और रोगजनक बैक्टीरिया ख़त्म हो जाएं. कब्ज की समस्या होने पर रात में गुनगुने दूध में एक चम्मच देसी घी मिलाकर इसे लेने से लाभ होता है.

भोजन के तुरंत बाद दूध नहीं लेना चाहिए, हमेशा दोनों के बीच कुछ समय का अंतर रखें. डायबिटीज से पीड़ित लोगों को दूध में शहद या मिश्री मिलाने से बचना चाहिए. यदि आपका पाचन कमजोर है, तो दूध में एक चुटकी हल्दी, अदरक या त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली का मिश्रण) मिलाकर लें. यह दूध को पचने में हल्का बनाता है. दूध प्रकृति का एक अनमोल उपहार है, जिसे आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार सही तरीके से अपनाकर आप अपने स्वास्थ्य को एक नई ऊंचाई दे सकते हैं.
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