Health Tips: अगर ब्रेनस्ट्रोक हो तो याद रखिए फॉर्मूला ‘BE FAST’, बच जाएगी अपने किसी खास की जान

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Brain Stroke Care Tips: लाइफ स्टाइल और जंक फूड ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन रहे हैं. कोविड के बाद भी ब्रेन स्ट्रोक के केस बढ़े हैं. बड़ी संख्या में लोग सिरदर्द, माइग्रेन, अचानक चक्कर आना या बेहोशी, चलने में परेशानी, संतुलन या कोऑर्डिनेशन की कमी, देखने में दिक्कत, बोलने में समस्या या निगलने में कठिनाई जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के साथ डॉक्टर के पास पहुंचते हैं. ऐसे में अगर किसी को ब्रेन स्ट्रोक अचानक आ जाए तो क्या करना चाहिए आइए जानते हैं.

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मेरठ: ब्रेन स्ट्रोक या पैरेलिसिस की शिकायत अगर किसी को हो जाए और अगर मरीज या उनके परिजन BE FAST फॉर्मूला को याद रखें तो उनकी जान बच सकती है. यहां तक कि आजीवन दिव्यांगता भी नहीं होगी. मेरठ पहुंचे सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर विवेक कुमार ने न्यूज 18 से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि अगर किसी को ब्रेन स्ट्रोक किन्हीं कारणों से आया है और वो अगर BE FAST यानि बी यानि बैलेंस, ई यानि आई, एफ यानि फेस डिविजन, ए यानि आर्म, एस यानि स्पीच और टी यानि टाइम… फॉर्मूला याद रख ले तो सही हो सकता है.

ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण ये हैं…

  1. अगर किसी व्यक्ति का बैलेंस गड़बड़ाने लगे
  2. आंखों में रोशनी एकाएक कम हो जाए या दिखना बंद हो जाए
  3. फेस में कुछ परिवर्तन नजर आए
  4. अचानक हाथ नहीं उठ रहा
  5. कोई बोल नहीं पा रहा

इन लक्षणों के दिखते ही अगर व्यक्ति वक्त रहते अस्पताल पहुंच जाए तो उसे आजीवन दिव्यांगता से मुक्ति मिल सकती है. डॉक्टर विवेक कुमार का कहना है कि ऐसे लक्षण होने पर अगर व्यक्ति साढ़े चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंच जाता है और उसे उचित इंजेक्शन मिल जाए तो वो सामान्य हो जाएगा. उन्होंने बताया कि स्ट्रोक में नस ब्लॉक हो जाती है. मैकेनिकल विधि से भी मरीज को ठीक किया जा सकता है. अगर कोई साढ़े 4 घंटे के बाद पहुंचता है तो फिर थेरेपी के जरिए उसका इलाज होता है. इलाज थोड़ा लंबा हो जाताा है.

डॉक्टर विवेक कुमार का कहना है कि लाइफ स्टाइल जंक फूड भी ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन रहे हैं. कोविड के बाद भी ब्रेन स्ट्रोक के केस बढ़े हैं. बड़ी संख्या में लोग सिरदर्द, माइग्रेन, अचानक चक्कर आना या बेहोशी, चलने में परेशानी, संतुलन या कोऑर्डिनेशन की कमी, देखने में दिक्कत, बोलने में समस्या या निगलने में कठिनाई जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के साथ डॉक्टर के पास पहुंचते हैं. उन्होंने आगे कहा कि स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें गोल्डन आवर बेहद अहम होता है, खासकर इस्कीमिक स्ट्रोक के मामलों में. समय पर इलाज, जैसे क्लॉट को घोलने वाली दवाएं या क्लॉट रिमूवल प्रोसीजर, ब्रेन डैमेज को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के मेडिकल मैनेजमेंट में थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी, एंटीकोएगुलेंट्स, एंटीप्लेटलेट मेडिकेशन और ब्लड प्रेशर कंट्रोल शामिल है. इसी तरह मिर्गी जैसी सामान्य न्यूरोलॉजिकल बीमारी में भी अर्ली डायग्नोसिस और लगातार इलाज बेहद जरूरी है. इससे सीजर्स को कंट्रोल कर मरीज की क्वालिटी ऑफ लाइफ को बेहतर बनाया जा सकता है. आधुनिक दवाओं और सर्जिकल इंटरवेंशन की मदद से अन्य मूवमेंट डिसऑर्डर्स का भी प्रभावी इलाज संभव है.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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