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Health Tips: सर्दी-खांसी के मौसम में बच्चों के लिए दादी-नानी का जायफल नुस्खा फिर चर्चा में है. लोग मानते हैं कि जायफल का लेप गले और छाती की जकड़न में राहत देता है. पर क्या यह सच में असरदार है या सिर्फ परंपरा का हिस्सा? जानिए इसकी असली सच्चाई और फायदों के पीछे का विज्ञान.
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही बच्चों में सर्दी, खांसी और जुकाम की शिकायतें बढ़ जाती हैं. माता-पिता जहां दवाओं का सहारा लेते हैं, वहीं घर के बुजुर्ग अक्सर पुराने और आजमाए हुए नुस्खों की ओर लौटते हैं. उन्हीं में से एक है. जायफल का घरेलू उपयोग, जिसे दादी-नानी “सर्दी भगाने का रामबाण उपाय” बताती हैं. यह उपाय न सिर्फ खांसी और जुकाम में राहत देता है, बल्कि बच्चों के गले को भी गर्माहट प्रदान करता है. घर में आसानी से उपलब्ध जायफल को उपयोग में लाकर माता-पिता, दादी-नानी बच्चों की देखभाल में सहयोग कर सकते हैं.

जायफल एक सुगंधित मसाला है जो न सिर्फ खाने में स्वाद बढ़ाता है, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधि के रूप में भी जाना जाता है. इसकी तासीर गर्म होती है, जिससे यह शरीर में ठंडक से उत्पन्न कफ और जुकाम को कम करने में मदद करता है. यही वजह है कि बच्चे के गले में खराश या खांसी शुरू होते ही घरों में जायफल घिसने की तैयारी हो जाती है. जायफल में मौजूद प्राकृतिक गुण बच्चों के श्वसन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और बलगम को ढीला करने में मदद करते हैं. सर्दियों में इसका इस्तेमाल बच्चों को ठंड से बचाने और आरामदायक नींद सुनिश्चित करने के लिए भी किया जाता है.

दादी-नानी का तरीका बड़ा सीधा है. जायफल को हल्के गुनगुने दूध में घिसकर सिर्फ एक चुटकी मात्रा में बच्चों को देना. इससे शरीर को अंदर से गर्मी मिलती है और श्वसन तंत्र खुलता है. कुछ घरों में इसे दूध में उबालकर थोड़ी मात्रा में दिन में एक बार दिया जाता है, ताकि ठंड से बचाव भी हो और आराम भी मिले. इससे बच्चों की खांसी और गले की खराश धीरे-धीरे कम होती है और सांस लेना आसान हो जाता है. दादी- नानी इसे सोने से पहले देने की सलाह देते हैं ताकि पूरी रात आराम और गर्माहट बनी रहे.

सिर्फ पीने के लिए ही नहीं, जायफल का पेस्ट बनाकर बच्चों के सीने, पीठ और तलवों पर हल्के हाथों से लगाया भी जाता है. यह घरेलू उपाय बलगम को ढीला करता है और खांसी को नियंत्रित करता है. छोटे बच्चों के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें कोई रासायनिक तत्व नहीं होता. इसे सोने से पहले लगाने से पूरी रात बच्चों को आराम मिले और सांस लेने में दिक्कत नही होती, सुबह तक शरीर में हल्की गर्माहट बनी रहती है, जिससे सर्दी-जुकाम जल्दी उतर जाता.

आयुर्वेद एक्सपर्ट डाॅ श्रीराम वैद्य के अनुसार, जायफल में मौजूद ऐंटी-बैक्टीरियल, ऐंटी-इंफ्लेमेटरी और ऐंटीऑक्सीडेंट गुण गले और नाक की सूजन कम करते हैं. यह सर्दी-जुकाम के साथ आने वाले सिरदर्द, नाक बंद और छींक जैसी समस्याओं को भी कम करता है. यही वजह है कि आज भी कई लोग आधुनिक दवाओं के साथ-साथ इन पारंपरिक तरीकों को अपनाते हैं. जायफल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है, जिससे बार-बार होने वाली सर्दी-खांसी से बचाव होता है.

जायफल का इस्तेमाल करते समय सावधानी ज़रूरी है. इसे हमेशा कम मात्रा में ही देना चाहिए, क्योंकि ज्यादा सेवन से बच्चों को नींद, कमजोरी या पेट की परेशानी हो सकती है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जायफल का प्रयोग तभी लाभदायक है जब सही मात्रा में किया जाए. बच्चों को जायफल हमेशा गुनगुने दूध या पानी में घिसकर बहुत ही थोड़ी मात्रा में देना चाहिए. इसे दिन में एक बार से अधिक न दें, ताकि इसका प्रभाव संतुलित रहे और किसी प्रकार की एलर्जी या दुष्प्रभाव न हो.

आज के दौर में भी दादी-नानी के ये पुराने नुस्खे अपनी जगह बनाए हुए हैं. चाहे डॉक्टर की दवा हो या आधुनिक सीरप, लेकिन ठंड लगते ही घरों में जायफल घिसने की खुशबू आज भी बचपन की यादें ताज़ा कर देती है. घर की रसोई में मौजूद यह छोटा सा मसाला बच्चों की सर्दी-खांसी में राहत देने का पारंपरिक लेकिन असरदार उपाय बना हुआ है. यह नुस्खा सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार में सर्दियों की शुरुआत में राहत और गर्माहट लाने का काम करता है.