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Health Tips:आयुर्वेद में रत्न पुरुष (रत्नपुष्पी) को पुरुषों की सेहत का एक अनमोल खजाना माना गया है. यह दुर्लभ जड़ी-बूटी ऊर्जा, ताकत और यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक बताई जाती है. ग्रामीण वैद्यों से लेकर आयुर्वेदाचार्यों तक, इसे शारीरिक कमजोरी, मूत्र संबंधी समस्याओं और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता रहा है. इसके औषधीय गुण शरीर को अंदर से मजबूत बनाने और संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार रत्न पुरुष एक वाजीकरण जड़ी-बूटी है, यानी यह यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसका उपयोग कामेच्छा की कमी, शारीरिक कमजोरी और शीघ्रपतन जैसी समस्याओं में किया जाता है. लोग मानते हैं कि इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर में अंदरूनी ताकत बढ़ती है.

मूत्र से जुड़ी समस्याओं में भी इस जड़ी-बूटी का उपयोग बताया गया है. पेशाब में जलन, बार-बार मूत्र आने या रुक-रुक कर पेशाब होने जैसी परेशानियों में रत्न पुरुष को उपयोगी माना जाता है.इसके मूत्रवर्धक गुण मूत्र मार्ग को साफ रखने में सहयोग कर सकते हैं.

आयुर्वेद के अनुसार रत्न पुरुष शुक्राणुओं की गुणवत्ता और संख्या को भी सपोर्ट कर सकता है. यही कारण है कि इसे प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में भी उपयोग किया जाता रहा है. कई वैद्य मानते हैं कि इसके सेवन से पुरुषों में आत्मविश्वास और शारीरिक संतुलन बेहतर होता है.
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औषधीय गुणों की बात करें तो इस पौधे में फ्लेवोनोइड्स और अल्कलॉइड्स जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुणों के लिए जाने जाते हैं. ये तत्व शरीर को अंदरूनी सूजन से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं.

पुरुष प्राकृतिक जड़ी-बूटी है, लेकिन इसका उपयोग सावधानी से करने की सलाह दी जाती है.इसकी तासीर गर्म बताई जाती है, इसलिए अधिक मात्रा नुकसानदेह हो सकती है. आयुर्वेदिक जानकारों का कहना है कि इसका सेवन शुरू करने से पहले योग्य वैद्य से सलाह जरूर लेनी चाहिए, खासकर यदि व्यक्ति किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हो.