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Health Tips: चाय भारतीयों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है, लेकिन चाय बनाने का तरीका सेहत पर भारी पड़ सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार उबलती चाय को प्लास्टिक की छन्नी से छानने पर उससे हानिकारक माइक्रोप्लास्टिक और केमिकल निकल सकते हैं. गर्म तापमान में प्लास्टिक पिघलने लगता है, जिससे टॉक्सिक तत्व चाय में मिल जाते हैं. लंबे समय तक इसका सेवन पेट, हार्मोन असंतुलन, लिवर और इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक असर डाल सकता है.
भीलवाड़ा: आज हर किसी व्यक्ति की पहली पसंद एक गर्म चाय का कप हैं टेंशन, परेशानी, स्ट्रेस चाहे कितना भी हो हर चीज का इलाज चाय होती हैं, इसलिए आज कर हर चाय की होटल पर लोग चाय का लुफ्त उठाते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन कई बार यह चाय जानलेवा भी साबित हो सकती हैं. आधुनिक लाइफ में सुविधा के नाम पर लोग ऐसे कई उत्पादों का इस्तेमाल करने लगे हैं. जो धीरे-धीरे सेहत के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं. इन्हीं में से एक है प्लास्टिक की चाय की छन्नी, जिसका उपयोग घरों से लेकर चाय की दुकानों तक खुलेआम किया जा रहा है. जब उबलती चाय या खौलता पानी प्लास्टिक की छन्नी से होकर गुजरता है. तो तेज गर्मी के कारण प्लास्टिक के सूक्ष्म कण और जहरीले रसायन चाय में घुल सकते हैं. आमतौर पर लोग इसे मामूली मानते हैं, लेकिन यही लापरवाही लंबे समय में शरीर को भारी नुकसान पहुंचाती है. रोजाना चाय पीने वाले लोग अनजाने में इन हानिकारक तत्वों को अपने शरीर में प्रवेश करवा रहे हैं, जिससे सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
प्लास्टिक की छन्नी में मौजूद केमिकल्स पाचन तंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं. गर्म तरल पदार्थ के संपर्क में आने पर प्लास्टिक टूटने लगता है और माइक्रो-प्लास्टिक जैसे सूक्ष्म कण निकलते हैं, जो पेट के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं. इससे गैस, अपच, एसिडिटी, पेट दर्द और लीवर संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं. लगातार ऐसे तत्वों का सेवन करने से हार्मोन असंतुलन की स्थिति भी बन सकती है, जिससे थकान, वजन बढ़ना और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है. बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह खतरा और भी गंभीर हो सकता है, क्योंकि उनका शरीर इन रसायनों के प्रति अधिक संवेदनशील होता है.
प्लास्टिक की छन्नी से होने वाला सबसे बड़ा और खतरनाक नुकसान माइक्रोप्लास्टिक का शरीर में जमा होना है. शोध बताते हैं कि माइक्रो-प्लास्टिक शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलता और धीरे-धीरे रक्त प्रवाह में शामिल हो जाता है. यह दिल, किडनी, फेफड़े और यहां तक कि दिमाग तक असर डाल सकता है. माइक्रोप्लास्टिक कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है.
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प्लास्टिक की छन्नी के बजाय सुरक्षित और सेहतमंद विकल्प अपनाकर इस खतरे से आसानी से बचा जा सकता है. स्टेनलेस स्टील की छन्नी सबसे अच्छा विकल्प मानी जाती है, क्योंकि यह गर्मी में किसी भी तरह का रासायनिक तत्व नहीं छोड़ती. इसके अलावा पीतल, तांबा और लोहे से बनी पारंपरिक छन्नियां भी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होती हैं. कई लोग कपड़े से बनी छन्नी या सूती कपड़े का भी इस्तेमाल करते हैं, जो पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित माना जाता है. बाजार में अब फूड-ग्रेड स्टील से बनी आधुनिक छन्नियां भी उपलब्ध हैं, जो लंबे समय तक चलती हैं और स्वाद को भी खराब नहीं करतीं.
अक्सर लोग छोटी-छोटी आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही आदतें आगे चलकर बड़ी बीमारियों का कारण बनती हैं. प्लास्टिक की छन्नी का इस्तेमाल छोड़कर सुरक्षित विकल्प अपनाना न केवल व्यक्तिगत सेहत के लिए जरूरी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अहम कदम है. चाय जैसी साधारण चीज में सावधानी बरतना स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव बन सकता है.