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दिल्ली में प्रदूषण से एम्स के डॉ. अनंत मोहन ने मेडिकल इमरजेंसी बताई, मरीजों की संख्या 30 फीसदी बढ़ी, बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है.दिल्ली में प्रदूषण की वजह से हेल्थ इमरजेंसी के हालात पैदा हो गए हैं. एम्स नई दिल्ली के डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे में न सिर्फ न सिर्फ इस जहरीली हवा में लोगों का दम घुट रहा है, बल्कि रेस्पिरेटरी के अलावा अन्य बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं. अस्पतालों में मरीजों की संख्या पिछले दो हफ्तों में बढ़ गई है. बीमारी के ये कॉम्बो सबसे खतरनाक बन गए हैं, कुछ लोगों को तो वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ रही है. प्रदूषण और बीमारियों की वजह से अस्पताल पहुंच रहे लोगों को सही होने में भी ज्यादा समय लग रहा है.
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एम्स के डॉक्टरों ने चिंता जताई है. एम्स के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर स्लिप मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनंत मोहन ने इस समय को मेडिकल इमरजेंसी बताया. उन्होंने कहा कि प्रदूषण के साथ मिलकर मौसमी फ्लू, प्रदूषण और कॉमर्बिडिटीज जैसे हार्ट या लंग डिजीज मिलकर लोगों को आईसीयू और वेंटिलेटर पर पहुंचा रहे हैं.

उन्होंने कहा प्रदूषण का जो प्रभाव देखा जा रहा है, उससे इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं. यह सिर्फ नवंबर से फरवरी की परेशानी नहीं है, बल्कि यह पूरे साल का मामला है, लेकिन नवंबर से फरवरी में ज्यादा दिखाई देने लगता है. पिछले 10 सालों से यही चल रहा है.

प्रदूषण का स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. प्रदूषण शरीर के हर अंग पर असर डाल रहा है, साथ ही हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है.यह बच्चे को जन्म से पहले ही प्रभावित कर रहा है.रेस्पिरेटरी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं.
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डॉ. मोहन ने कहा कि एम्स अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है.जो लोग पहले से स्वस्थ हैं, वे भी बीमार हो रहे हैं, जबकि जिन लोगों को पहले से बीमारियां हैं उनमें बीमारियां और मृत्यु दर दोनों बढ़ रही हैं. एम्स में ही करीब 30 फीसदी मरीज ज्यादा बढ़ गए हैं.

खराब एयर क्वालिटी की प्रदूषण की वजह से कार्डियोलॉजी, न्यूरो, मेंटल हेल्थ इश्यूज, प्रेग्नेंसी में दिक्कतें, बच्चों के जन्म में परेशानी, फेफड़ों के विकास में रुकावट आ रही है. बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है.

प्रदूषण से निपटने के लिए शॉर्ट टर्म और लांग टर्म दोनों में ही समाधान किए जाने की जरूरत है क्योंकि इसका शरीर पर प्रभाव भी थोड़े समय के लिए नहीं है, बल्कि प्रदूषण शरीर को लंबे समय के लिए प्रभावित कर रहा है.

मास्क पहनकर, बाहर जाने से रुककर हम थोड़ी देर के लिए खुद को स्वस्थ रख सकते हैं, लेकिन यह लंबे समय के लिए नहीं है. इसे आपदा से निपटने के लिए सरकारों की तरफ से होने चाहिए. लोगों को बचाव के लिए यह करना है कि सुबह शाम वॉक के लिए न जाएं, धूप निकलने के बाद जाएं.

एयर प्यूरिफायर को लेकर डॉ. मोहन ने कहा कि घर के एक कमरे में एयर प्यूरिफायर लगाना उन लोगों के लिए फायदेमंद है जैसे कोई बीमार व्यक्ति है और वह दिन रात उसी कमरे में आराम कर रहा है, तो उसके लिए यह फायदा दे सकते हैं, लेकिन जिन लोगों को बाहर निकलना है, वे कुछ घंटे इसमें रहकर कितना फायदा ले सकते हैं? पानी का छिड़काव भी कुछ देर के लिए ठीक है लेकिन यह स्थाई समाधान नहीं है.