स्वाद के साथ सेहत भी! अब विंध्य की आधुनिक ‘भाप विधि’ से बनाएं झटपट आंवले का आचार, बच्चे में करेंगे पसंद

Last Updated:

Amla Pickle Recipe: सतना और विंध्य क्षेत्र में सर्दियों की शुरुआत आंवले के अचार से मानी जाती है. पीढ़ियों से महिलाएं इसे पारंपरिक तरीके से बनाती आई हैं. अब आधुनिक भाप विधि से आंवला जल्दी नरम होकर आसानी से तैयार हो जाता है.

सतना. विंध्य क्षेत्र में सर्दियाँ आते ही ताज़े आंवले के अचार की सुगंध से रसोई महक उठती है. यहाँ ठंड के मौसम में किसी भी घर की थाली पूरी मानी ही नहीं जाती, जब तक उसमें खट्टा-मीठा, मसालेदार आंवले का अचार ना हो. पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही लोकप्रिय है, क्युंकी यहाँ के लोग इस अचार को सर्दियों का न्यूट्रीशन पॉवरहाउस कहते हैं. विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आंवला न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने में भी बेहद असरदार माना जाता है. विंध्य के घरों में ठंड के शुरू होते ही महिलाएं इस खास अचार की तैयारी में जुट जाती हैं.

विंध्य की रसोई में पीढ़ियों की परंपरा अभी भी जीवित
विंध्य क्षेत्र में दादी-नानी के समय से आंवले का अचार बनाना एक घरेलू रिवाज़ रहा है. पहले के दौर में इस अचार को उबालकर लंबे तरीके से तैयार किया जाता था जिसमें पूरा दिन लग जाता था. बड़े बड़े बर्तन, मटकों में रखा मसाला और धूप में रखी बरनियों का वह नज़ारा आज भी कई बुजुर्गों की यादों में ताज़ा है. स्थानीय निवासी उर्मिला मिश्रा लोकल 18 से कहती है कि सर्दियों में आंवले का अचार सिर्फ स्वाद नहीं घर की पहचान है, जब अचार की खुशबू आती है तो लगता है ठंड सच में आ गई. उन्होंने बताया कि पहले अचार बनाना एक त्योहार जैसा महसूस होता था. सब महिलाएँ मिलकर आंवले साफ़ करतीं, उबालतीं और मसाला तैयार करतीं.

आधुनिक तकनीक से बनाई आसान
समय बदला तो अचार बनाने की तकनीक भी बदली. अब विंध्य क्षेत्र में आंवले को उबालने की जगह हल्के तेल में भाप देकर नरम करने का तरीका सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. कड़ाही में सरसों का तेल हल्का गरम कर उसमें आंवले डालकर ढक दिया जाता है, जिससे कुछ ही मिनटों में आंवला नरम हो जाता है और गुठली आसानी से निकल जाती है. इसके बाद राई, सौंफ, हल्दी, लाल मिर्च, नमक, धनिया, करायल, मेथी और हींग का मसाला तैयार किया जाता है जिसमें आंवले के टुकड़ों को हल्के हाथों से मिलाया जाता है. तेज़ गरम करके ठंडा किए गए सरसों के तेल को इसमें डालकर अचार को कांच की बरनी में भरकर 2-3 दिन धूप में रखा जाता है. इस झटपट विधि ने आधुनिक घरों में अचार को फिर से बेहद आसान और नियमित बना दिया है.

डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में रोज़ थोड़ा सा आंवले का अचार खाने से शरीर को ठंड से लड़ने की शक्ति मिलती है. यह पाचन को बेहतर करता है हड्डियों को मजबूत बनाता है और स्किन को स्वाभाविक चमक देता है. यही वजह है कि विंध्य क्षेत्र में यह सिर्फ अचार नहीं, सर्दियों का एक घरेलू औषधि जैसा माना जाता है.

Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two and Half Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has…और पढ़ें

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two and Half Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has… और पढ़ें

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homelifestyle

स्वाद के साथ सेहत भी! विंध्य की आधुनिक ‘भाप विधि’ से बनाएं झटपट आंवले का आचार

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *