वह जिम भी जाता था, रेगुलर वॉक भी करता था, स्मोकिंग भी नहीं करता, फिर भी ब्लॉक हो गई आर्टरी, क्यों, कार्डियोलॉजिस्ट से जानें

Why fit People Get Arteries Block : 38 साल का एक युवक एकदम हट्ठा-कट्ठा अचानक छाती पर भारी जकड़ने से परेशान हो गया. ऐसा लग रहा था कि जैसे छाती पर कोई बैठ गया. धीरे-धीरे यह दबाव बढ़ता गया तो उसे चिंता होने लगी. फिर वह डॉक्टर के पास गया. डॉक्टर ने जब एंजियोग्राफी की तो वे भी दंग रह गए. इस युवक के हार्ट को दोनों मुख्य आर्टरीज ब्लॉक हो चुकी थी. एक आर्टरी तो सौ प्रतिशत ब्लॉक हो गई, दूसरी 90 प्रतिशत तक ब्लॉक हो गई. इससे पहले इस व्यक्ति के साथ कभी ऐसा नहीं हुआ था. हैरानी की बात यह है कि यह व्यक्ति फिटनेस फ्रीक है. रोज जिम जाता है और वॉक करता है. साथ ही कोई बुरी आदतें भी नहीं है. आखिर ऐसा क्यों हुआ. क्या इतने फिट व्यक्ति को भी हार्ट से जुड़ी इतनी घातक परेशानी हो सकती है.

तगड़ा फिट होने के कारण कभी टेस्ट नहीं कराया
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रंजन शेट्ठी ने इसी युवक के बारे में लिखा है. उन्होंने बताया है कि वह व्यक्ति एथलीट है, रेगुलर रनिंग करता है और वेट लिफ्टर भी है. लेकिन उनका लेफ्ट एंटेरियर डिसेंडिंग आर्टरी LAD और राइट कोरोनरी आर्टरी RCA बंद हो चुका था. हार्ट फंक्शन के लिए एलएडी का सही होना बहुत जरूरी है क्योंकि इसी से ऑक्सीजेनेटेड ब्लड की सप्लाई होती है और यही 100 फीसदी बंद हो गया. फिर क्या हुआ. डॉ. रंजन शेट्ठी ने बताया कि हमने तुरंत इस ब्लॉक आर्टरी में स्टेंट लगाकर इसे खोल दिया. जब हमने उस युवक से पूछा तो उन्होंने बताया कि कभी किसी डॉक्टर ने उन्हें हार्ट हेल्थ चेकअप के लिए नहीं कहा था. क्योंकि एकदम फिट और स्पोर्टी रहे हैं. उस युवक ने यह भी बताया कि आज तक उसे कभी भी सीने में दर्द या जलन की शिकायतें नहीं हुई थी. न ही कभी सिगरेट पी है. उन्हें डायबिटीज भी नहीं है. बाहर का फूड भी कम ही खाते हैं. व्यक्ति ने टेस्ट के नाम पर सिर्फ एक बार शुगर टेस्ट कराया था जो निगेटिव आया था. फिर क्या इसका कारण रहा कि अचानक उनकी धमनियां ब्लॉक हो गई.

फिर क्यों ब्लॉक हुई धमनियां
डॉ. रंजन शेट्ठी ने बताया कि सब कुछ फिट होने के बाद भी धमनियां ब्लॉक हुई, इसकी मुख्य वजह जेनेटिक हिस्ट्री थी. यानी मरीज के परिवार में पहले से ही हार्ट संबंधी इतिहास की जटिलताएं रही हैं जिसके कारण पीढ़ी दर पीढ़ी यह जीन उनके परिवार में हस्तांतरित होता रहता है. निकट संबंधी का मतलब माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी से है. अगर इन लोगों में कोई जीन खराब होता है और वह हाई कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाला होता है यदि यही जीन इनके बच्चे में जाता है तो समय के साथ यह एक्टिव होकर यह हाई कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देता है जिसके कारण धमनियों में ब्लॉकेज आ जाता है.

कोलेस्ट्रॉल की फैमिली हिस्ट्री का क्या मतलब है
जब परिवारिक फॉल्टी जीन की वजह से किसी में हाई कोलेस्ट्रॉल होता है तो उसे फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया कहा जाता है. यह एक वंशानुगत यानी जेनेटिक बीमारी है. इसमें व्यक्ति का लिवर खून से खराब कोलेस्ट्रॉल LDL को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता. दरअसल, ऐसे लोगों में लिवर में बैड कोलेस्ट्रॉल को साफ करने वाला रिसेप्टर्स नहीं होते. इसलिए जब बैड कोलेस्ट्रॉल लिवर में बनता है तो यह खून में तैरता रहता है और ज्यादा हो जाने पर इसका प्लाक धमनियों की दीवार से चिपक जाता है. फिर यह धीरे-धीरे इतना चिपक जाता है कि आर्टरीज को ब्लॉक करने लगता है और अंततः यह पूरी तरह ब्लॉक होकर हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट का कारण बनता है. जिन लोगों को जेनेटिक बीमारी होती है आमतौर पर बचपन से ही कोलेस्ट्रॉल ज्यादा रहता है. इनके शरीर में बनने वाली प्लाक भी कमजोर और अस्थिर होती है, जो आसानी से फट सकती है. इसी वजह से इन्हें कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है. कई बार हल्की-सी ब्लॉकेज भी प्लाक फटने के बाद अचानक 100 फीसदी ब्लॉकेज में बदल जाती है.

किन लोगों को जेनेटिक रिस्क
अगर परिवार के किसी करीबी सदस्य जैसे माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी या भाई-बहन 55 साल से कम उम्र में हाई कोलेस्ट्रॉल या हार्ट से संबंधित जटिलताएं हैं तो उनके परिवार के सदस्यों में भी इस तरह का रिस्क रहता है. इससे आगे जाकर हार्ट अटैक का खतरा रहता है.

फिर क्या करना चाहिए
डॉ. रंजन शेट्टी ने बताया कि चाहे किसी की फेमिली हिस्ट्री हो या न हो, 20 साल की उम्र के बाद साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराना चाहिए. यह बहुत सस्ता भी है. इसके साथ ही अगर कभी भी छाती में जकड़न होती है, बहुत ज्यादा दबाव रहता है, छाती के पास दर्द रहता है और देर तक रहता है तो इन हालात में तुरंत डॉक्टर से मिलें. थोड़ी मेहनत करने पर हांफ जाना, सांस लेने में दिक्कत होना, सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूलना, कंधे, कमर में दर्द होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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