क्या आपने साइलेंट हार्ट अटैक के बारे में सुना है? जिसे आप हार्ट बर्न समझते हैं वह हो सकता है दिल की बीमारी, तुरंत हो जाएं अलर्ट

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Silent Heart Attack: हार्ट अटैक तो सब जानते हैं लेकिन क्या आप साइलेंट हार्ट अटैक के बारे में जानते हैं. साइलेंट हार्ट अटैक में कुछ भी पता नहीं चलेगा लेकिन यह अपना खेल कर देगा. इसलिए इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

क्या आपने साइलेंट हार्ट अटैक के बारे में सुना है? हार्ट बर्न हो सकता हार्ट अटैसाइलेंट हार्ट अटैक.

Silent Heart Attack: हार्ट अटैक तो आप जानते ही होंगे. हार्ट अटैक में खून हार्ट तक नहीं कम पहुंचता है या नहीं पहुंचता है जिसके कारण अचानक हार्ट काम करना बंद कर देता है और मरीज दर्द से परेशान हो जाता है या बेहोश हो जाता लेकिन क्या आपने साइलेंट हार्ट अटैक के बारे में सुना है. साइलेंट हार्ट अटैक में आपको कुछ फील नहीं होगा लेकिन हार्ट अटैक अंदर में आ गया होगा. इसका तत्काल प्रभाव नहीं होगा लेकिन एक बार साइलेंट हार्ट अटैक आ जाने के बाद आपका हार्ट कमजोर हो जाता है और आगे किसी बड़ी अनहोनी का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए साइलेंट हार्ट अटैक के बारे में आपको जानना चाहिए.

क्या होता है साइलेंट हार्ट अटैक

साइलेंट हार्ट अटैक ऐसा हार्ट अटैक होता है जिसमें बहुत कम या बिल्कुल भी लक्षण नहीं पता चलता, या फिर ऐसे लक्षण होते हैं जिन्हें हार्ट अटैक के रूप में पहचानने में लोग गलती कर देते हैं. उन्हें लगता है कि यह अपच, गैस या हार्ट बर्न जैसे मामूली लक्षण है. साइलेंट हार्ट अटैक में आमतौर पर छाती में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण नहीं होते, जो सामान्यत: हार्ट अटैक से जुड़े होते हैं. जिन लोगों को साइलेंट हार्ट अटैक होता है, उन्हें अक्सर इसका पता भी नहीं चलता. वे इसे सीने में जलन (हार्टबर्न), फ्लू या छाती की मांसपेशी में खिंचाव समझ लेते हैं लेकिन साइलेंट हार्ट अटैक भी किसी अन्य हार्ट अटैक की तरह ही हार्ट तक रक्त प्रवाह में रुकावट और हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाता है.

क्यों होता है साइलेंट हार्ट अटैक

बेटर इंडिया के मुताबिक मुंबई में कार्डिएक हार्ट सर्जन डॉ. रामाकांत पांडा कहते हैं कि यह एक अदृश्य खलनायक है. साइलेंट हार्ट अटैक में बहुत कम या बिल्कुल भी लक्षण दिखते हैं. इन लक्षणों आसानी से अपच, तनाव या थकान समझ लिया जाता है, लेकिन यह धमनियों या हार्ट को गंभीर नुकसान पहुंचा देता है. डायबिटीज के मरीजों में ऐसा होने का खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि डायबिटीज में नसों के सिरों को प्रभावित करता है, इसी वजह से डायबिटीज रोगियों को साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण महसूस नहीं होते. वहीं जिन व्यक्तियों को पहले से हार्ट से संबंधित कोरोनरी आर्टरी डिजीज का जोखिम होता है, उनमें डायबिटीज रोगियों से दो से चार गुना अधिक खतरा रहता है. भारत में ऐसे लोगों की संख्या काफी है. इनमें से अधिकांश लोगों को पता भी नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी है. एक अध्ययन में बताया गया कि हाइपरग्लाइसीमिया यानी ज्यादा ब्लड शुगर, पेट के आसपास मोटापा, डिस्लिपिडेमिया और हाइपरटेंशन और इन जोखिम कारकों का आपसी संबंध भारतीयों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज के बढ़े हुए खतरे की वजह हो सकता है.

साइलेंट हार्ट अटैक को होने से कैसे रोके

डॉ. रामाकांत पांडा बताते हैं कि साइलेंट हार्ट अटैक से बचने के लिए रोज एक्सरसाइज करना चाहिए, कुदरती भोजन करना चाहिए, बाहर की चीजों से परहेज करना चाहिए, अच्छी आदतें डालनी चाहिए. पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और तनाव रहित जीवन जीना चाहिए. तनाव घटाने के लिए योग और ध्यान का सहारा लेना चाहिए. अगर डायबिटीज है तो उसे मैनेज करना चाहिए. डॉ. रामाकांत बताते हैं कि तनाव को हफ़्ते में 5 से 6 दिन एक्सरसाइज करना, दफ़्तर में ट्रेडमिल पर चलना, रोज़ 30 मिनट योग करना, शाकाहारी आहार जिसमें ब्राउन राइस, सलाद, फल और सब्ज़ियां शामिल हैं, वेस्टर्न क्लासिकल म्यूज़िक और पुराने हिंदी गाने सुनना, ये आदतें आपको तनाव से दूर रखेंगा.

Lakshmi Narayan

Excelled with colors in media industry, enriched more than 19 years of professional experience. Lakshmi Narayan is currently leading the Lifestyle, Health, and Religion section at News18. His role blends in-dep…और पढ़ें

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