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Aeroponics Potato Farming: आपने कभी सोचा था कि आलू की खेती हवा में होगी. मतलब आलू जड़ में तो उगेंगे पर पौधे की जड़ मिट्टी में नहीं होगी, बल्कि हवा में लटकी रहेगी. ये तकनीक क्रांति लाने वाली है. जानें सब…
Agriculture News: इंदौर और आसपास का क्षेत्र ऊंची किस्म के आलू के उत्पादन के लिए जाना जाता है. लेकिन, इस आलू में बहुत जल्दी कीड़े लग जाते हैं और वायरस का खतरा बना रहता है. इस वजह से पैदावार प्रभावित होती है. किसानों को नुकसान होता है. लेकिन, जल्द ही किसानों को इस समस्या से निजाद मिल सकती है. क्योंकि आलू की एक ऐसी किस्म पर काम किया जा रहा है जो पूर्णतः वायरस से मुक्त होगी और इसमें कोई बीमारी नहीं लगेगी. इंदौर के राजमाता विजया राजे सिंधिया कृषि महाविद्यालय में एरोपोनिक्स लैब तैयार की गई है, जिसके माध्यम से आलू के बीज तैयार किए जाएंगे.
1 आलू से 250 आलू
इस प्रोजेक्ट को देख रही सह डॉ. अंकिता साहू ने बताया कि यहां एयरोपोनिक्स के माध्यम से बिना मिट्टी और पानी के हवा में पौधों को उगाकर आलू के बीज तैयार किए जाएंगे. इस तकनीक की मदद से उत्पादन करने पर एक आलू के एक ट्यूबर से करीब 250 ट्यूबर्स बनाए जा सकते हैं. जिसे बाद में खेत में लगाकर उत्पादन किया जा सकता है. हालांकि, इस तकनीक से आलू का उत्पादन फिलहाल प्रायोगिक स्तर पर ही है.
हवा में लटकी जड़ें
इसमें पौधे एक विशेष चैंबर या कंटेनर में लटके होते हैं. उनकी जड़ें मिट्टी में नहीं होतीं, बल्कि हवा में झूलती रहती हैं. इन जड़ों पर समय-समय पर पोषक तत्वों से भरपूर पानी की बारीक फुहार छोड़ी जाती है. पौधा इस फुहार से अपनी जरूरत का पोषण ले लेता है और उसकी जड़ में छोटे-छोटे आलू बनने लगते हैं.
पैदावार में कई गुना बढ़ोतरी
जहां एक पारंपरिक आलू के पौधे से कुछ ही आलू मिलते हैं, वहीं एरोपोनिक्स तकनीक से एक पौधे से ही करीब 200 से 250 छोटे छोटे ट्यूबर बनाए जा सकते हैं. एरोपोनिक्स का सबसे बड़ा फायदा ये कि इससे वायरस-मुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले आलू के बीज तैयार होते हैं. इसमें पारंपरिक खेती के मुकाबले 90% तक पानी की बचत होती है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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