दर्द से लेकर सूजन तक में रामबाण, सदियों से चौंकाता रहा है हरसिंगार, जानें इस्तेमाल का तरीका

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Harsingar benefits : आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही पेड़-पौधों की औषधीय शक्ति का पहचान होता आ रहा है. हमारे घर या बगीचे में ही ऐसे पौधे होते हैं, जो गंभीर बीमारियों में भी राहत दे सकते हैं. ऐसा ही एक पौधा है हरसिंगार, जिसे अंग्रेजी में नाइट जैस्मिन के नाम से जाना जाता है. दर्द और सूजन में ये रामबाण है. हरसिंगार के पत्तों में पिरियोड्राइड ग्लाइकोसाइड और अल्कलॉइड्स जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए संजीवनी से कम नहीं.

हरसिंगार यानी पारिजात के छोटे सफेद फूल और बीच में हल्का नारंगी रंग बड़ा मनोहारी, आकर्षक और सुगंधित होता है. यह पेड़ न केवल सुंदरता तक सीमित है, बल्कि इसके पत्ते कई तरह के दर्द और गंभीर बीमारियों में बेहद गुणकारी हैं.

हरसिंगार के पत्ते

आयुर्वेद के मुताबिक, हरसिंगार के पत्तों में पिरियोड्राइड ग्लाइकोसाइड, अल्कलॉइड्स और कई दूसरे तत्व पाए जाते हैं, जो सेहत को कई फायदे देते हैं. ये गुणकारी तत्व नसों की सूजन कम करने, दर्द को नियंत्रित करने और रक्त संचार बेहतर करने में मदद कर सकते हैं.

साइटिका में कारगर

साइटिका एक गंभीर बीमारी है, जिसमें कमर से लेकर पैर की एड़ी तक नसों में तेज और असहनीय दर्द होता है. इस दौरान कई बार चलना-फिरना और खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में हरसिंगार के पत्ते बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं.

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आयुर्वेदाचार्य की सलाह

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, हरसिंगार के ताजे पत्तों को निर्गुंडी के पत्तों के साथ उबालकर तैयार किया गया काढ़ा साइटिका के दर्द में राहत दे सकता है. ये नुस्खा नसों की सूजन कम करने और शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करता है.

काढ़ा बनाने की विधि

सबसे पहले हरसिंगार और निर्गुंडी के 50-50 ताजे पत्ते लें. इन्हें 1 लीटर पानी में तब तक उबालें, जब तक पानी आधा न हो जाए. इसके बाद छानकर इसमें लगभग 1 ग्राम केसर मिलाएं और साफ बोतल में सुरक्षित रख दें.

सेवन करने का तरीका

हरसिंगार से बने इस काढ़े को सुबह और शाम खाली पेट लगभग 50 मिलीलीटर मात्रा में लिया जा सकता है. इसके नियमित सेवन से असहनीय दर्द में भी राहत महसूस हो सकती है. हालांकि, परिणाम व्यक्ति की स्थिति और शरीर पर आधारित होता है.

सावधानी भी जरूरी

ये देसी उपाय पारंपरिक अनुभवों पर आधारित है. साइटिका या किसी भी गंभीर बीमारी में इसका उपयोग करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेना बहुत जरूरी है. ये किन्हीं परिस्थितियों में हानिकारक भी हो सकता है.

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दर्द से लेकर सूजन तक में रामबाण, सदियों से चौंकाता रहा है हरसिंगार

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