चैत्र मास की पूर्णिमा इस साल गुरुवार, 2 अप्रैल को पड़ रही है और इसी दिन चैत्र मास का समापन भी होगा। इसके अगले दिन यानी शुक्रवार (3 अप्रैल) से वैशाख मास की शुरुआत होगी। इस तिथि पर हनुमान जी का प्रकट उत्सव भी मनाया जाता है। मान्यता है कि त्रेतायुग में चैत्र पूर्णिमा पर भगवान शिव के अंशावतार हनुमान जी माता अंजनी और वानरराज केसरी के यहां प्रकट हुए थे। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, चैत्र पूर्णिमा, हनुमान प्रकट उत्सव और गुरुवार के योग में भगवान विष्णु, श्रीराम, हनुमान जी के साथ गुरु ग्रह की विशेष पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही इस तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ने और सुनने की भी परंपरा है। चैत्र पूर्णिमा के दिन किए गए दान-पुण्य से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय पुण्य का अर्थ है ऐसा पुण्य, जिसका प्रभाव जीवनभर बना रहता है। इसलिए इस दिन जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार धन, अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल का दान करना चाहिए। चैत्र पूर्णिमा पर सूर्य देव की पूजा के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए। सुबह जल्दी उठें, तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए और ऊँ सूर्याय नमः मंत्र का जप करना चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होती है, उन्हें इस दिन तांबे के बर्तन, गुड़ आदि का दान करना चाहिए। ज्योतिष की मान्यता है कि सूर्य पूजा से आत्मविश्वास बढ़ता है। चैत्र पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। केसर मिले दूध से भगवान का अभिषेक करें। तुलसी के साथ मिठाई अर्पित करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भगवान विष्णु के अवतार सत्यनारायण की कथा भी पढ़-सुन सकते हैं। इस दिन पंचदेव की पूजा करने का भी विधान है। पंचदेव में भगवान शिव, गणेश, विष्णु, देवी दुर्गा और सूर्य देव शामिल हैं। इन सभी देवताओं की पूजा करने से जीवन में संतुलन और सफलता मिलती है। अपने इष्ट देव के मंत्रों का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए। जैसे श्री गणेशाय नमः, ऊँ नमः शिवाय, कृं कृष्णाय नमः, सीता-राम, राधा-कृष्ण और ऊँ रामदूताय नमः जैसे मंत्र और नामों का जप कर सकते हैं। पूर्णिमा पर भगवान शिव की भी पूजा कर सकते हैं। शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। पूजा में बिल्व पत्र, धतूरा, पुष्प, चंदन और जनेऊ अर्पित करें। भगवान को मिठाई का भोग लगाएं और दीपक जलाकर आरती करें। घर में विराजित भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, बाल गोपाल का दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिला दूध भरकर अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और फूलों से श्रृंगार करें। माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ अर्पित करें और कृं कृष्णाय नमः मंत्र का जप करें।