हनुमान जी का होता है सोने का श्रृंगार, पांडवकालीन इतिहास; इंदौर के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर

Last Updated:

Hanuman Temples In Indore: इंदौर में कई प्रसिद्ध हनुमान मंदिर मौजूद हैं, जिनका हनुमान जयंती पर अलग ही रंग देखने को मिलता है और यहां पर भक्तों की खूब भीड़ उमड़ती है. हनुमान जयंती पर भगवान का श्रंगार भी अनोखे तरीके से होता है. एक मंदिर का इतिहास तो पांडवकालीन है, जहां भक्त दर्शन के लिए आते हैं.

हनुमान जयंती आते ही पूरा इंदौर जय श्री राम के नारों से गूंज उठता है. शहर में कई प्राचीनतम मंदिर हैं, जहां यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है जबकि कई मान्यताएं भी हनुमान जयंती से जुड़ी हुई हैं. कहीं भगवान का अलग स्वरूप देखने को मिलता है, तो कहीं विशेष लेजर शो होता है, तो कहीं 24 घंटे का रामायण पाठ, सुंदर भजन संध्या से लेकर भंडारे तक इंदौर अलग ही रंग में रंगा दिखाई देता है. जानते इंदौर के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों के बारे में जहां हनुमान जयंती पर भक्तों का तांता लगा रहता है.

अगर आप हनुमान जी का अत्यंत सौम्य और मनमोहन रूप देखना चाहते हैं तो राजवाड़ा के पास मौजूद वीर अलीजा हनुमान मंदिर जरूर जाना चाहिए, यहां भगवान का अद्भुत श्रंगार होता है. यह मंदिर होलकर काल से भी पुराना बताया जाता है. यहां की सबसे अनोखी बात यह है कि भगवान को रोजाना आधा किलो भांग का भोग लगाया जाता है. साथ ही, यहां चोला चढ़ाने के लिए भक्तों को कई सालों तक इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि इसकी बुकिंग दशकों तक एडवांस में रहती है. हनुमान जयंती पर यहां भगवान का ‘स्वर्ण श्रृंगार’ किया जाता है. पूरे राजवाड़ा क्षेत्र में प्रभात फेरी निकाली जाती है. मंदिर की सजावट में राजसी ठाठ-बाट दिखता है और छप्पन भोग का प्रसाद लगाया जाता है.

इंदौर के गुमास्ता नगर में मौजूद लगभग 135 साल पुराना रणजीत हनुमान मंदिर शहर की आस्था का केंद्र है. यहां रामनवमी से हनुमान जयंती तक अनवरत रामायण का पाठ होता है. यहां हनुमान जी के हाथ में गदा नहीं, बल्कि ढाल और तलवार है और उनके पैरों में अहिरावण दबा हुआ है. मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से व्यक्ति अपने जीवन के हर रण यानी संघर्ष में जीत हासिल करता है. हनुमान जयंती के दिन यहां लाखों की भीड़ उमड़ती है. उत्सव की शुरुआत सुबह ब्रह्म मुहूर्त में अभिषेक और विशेष चोला चढ़ाने से होती है. मंदिर को हजारों किलो फूलों और आकर्षक लाइटों से सजाया जाता है. यहां का ‘रक्षा सूत्र’ भक्त बहुत संभाल कर रखते हैं. इस दिन यहां विशाल भंडारा और भजन संध्या का आयोजन भी होता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

इंदौर की सांवेर तहसील में स्थित दुनिया में इकलौता ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी प्रतिमा उल्टी अवस्था में है. ‌यानी यहां भगवान का सिर पाताल की तरफ और पर आसमान की तरफ है. हनुमान जयंती पर यहां तीन दिनों का विशेष उत्सव होता है. दूर-दूर से लोग यहां ‘उल्टे हनुमान’ के दर्शन करने आते हैं ताकि उनके जीवन की उल्टी परिस्थितियां सीधी हो सकें. इस स्थान को रामायण कालीन माना जाता है. मान्यता है कि जब अहिरावण भगवान राम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया था, तब हनुमान जी इसी स्थान से पाताल लोक में प्रविष्ट हुए थे. पाताल जाते समय उनका मुख नीचे की ओर था, इसीलिए यहां उनकी उल्टी प्रतिमा की पूजा होती है.

प्राचीन काल से पितरों की शांति और साधना के लिए माने जाने वाले पर्वत पित्र पर्वत पर स्थित पित्रेश्वर हनुमान मंदिर ऐसा मंदिर है, जहां हनुमान जी बैठी अवस्था में है और ध्यान लगाए हुए हैं. यहां अष्टधातु से बनी विश्व की सबसे ऊंची बैठी हनुमान प्रतिमा है, जिसका वजन 108 टन है. हनुमान जयंती पर अद्भुत लेजर शो होता है, जिसमें हनुमान जी के सीने पर रामायण के प्रसंग और हनुमान चालीसा उकेरी जाती है. जयंती के दिन यहां विशेष महाआरती होती है और पूरे पर्वत को दीपों से जगमगाया जाता है. यहां की ज्योत विशेष रूप से अयोध्या से लाई गई है. पित्रेश्वर मंदिर इंदौर एयरपोर्ट के काफी नजदीक है.

इंदौर से कुछ दूरी पर गंधवानी में बलवारी बाबा की चमत्कारिक मूर्ति मौजूद है. यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हनुमान जी की 12 फीट ऊंची और 5 फीट चौड़ी विशाल पाषाण प्रतिमा बिना किसी कृत्रिम सहारे के, पूरी तरह सीधी खड़ी है. यह प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है. मूर्ति के समक्ष खड़े होने पर अद्भुत शांति का अनुभव होता है. इस स्थान को पांडवकालीन माना जाता है. मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने यहां समय बिताया था. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि उनके पूर्वज 1100 ईस्वी के आसपास से यहां सेवा कर रहे हैं, जिससे इसकी प्राचीनता का अंदाजा लगाया जा सकता है. यहां हनुमान जी का स्वरूप त्रिकाल दर्शन देता है. सुबह प्रतिमा बाल स्वरूप, दोपहर में युवा और शाम को वृद्ध स्वरूप में नजर आती है. मूर्ति के बाएं पैर के नीचे अहिरावण की आराध्य देवी दबी हुई हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. हनुमान जयंती पर यहां विशेष भंडारा होता है जहां दूर दूर से लोग भगवान के दर्शन करने आते हैं. ‌

इंदौर के सराफा और राजबाड़ा के करीब सुभाष चौक पर स्थित रामभक्त हनुमान मंदिर में हनुमान जी अपने आराध्य प्रभु श्री राम की भक्ति में लीन मुद्रा में नजर आते हैं, इसीलिए इसे रामभक्त हनुमान मंदिर कहा जाता है. यहां भगवान की मूर्ति को देख ऐसा लगता है कि ये तुरंत ही बोल उठेगी यह सबसे जीवंत मूर्तियों में से एक है‌ यह मंदिर लगभग 100 साल से भी ज्यादा पुराना है. होलकर रियासत के समय से ही इस क्षेत्र का बड़ा महत्व रहा है. इंदौर के पुराने बाजारों के बीच स्थित होने के कारण, यहां के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों की इस मंदिर पर अटूट श्रद्धा है. माना जाता है कि यहां दर्शन करने से व्यापार में उन्नति होती है और मानसिक शांति मिलती है.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *