Khandwa News: दिसंबर की हल्की धूप और खेतों में चल रही रबी सीजन की तैयारियों के बीच खंडवा जिले के किसान इन दिनों सबसे ज्यादा परेशान हैं. वजह साफ है, लगातार एक महीने से डीएपी खाद का कोई भी स्टॉक जिले में नहीं आया. खेत तैयार हैं, बीज भी रखे हैं, लेकिन खाद के बिना बोवनी अधूरी है. यही कारण है कि जिले के अधिकतर वितरण केंद्रों, डबल लॉक स्टोर और मार्केटिंग सोसायटी के बाहर दिनभर किसानों की भीड़ लगी रहती है. हर किसी के चेहरे पर एक ही सवाल, कब मिलेगा DAP?
केंद्रों पर किसानों की भीड़, लेकिन हाथ खाली
विपणन केंद्रों पर सुबह से ही किसान ट्रैक्टर-ट्रोलियों और मोटरसाइकिलों पर खाद लेने पहुंच जाते हैं. उम्मीद होती है कि शायद आज कुछ स्टॉक आए और उन्हें उनका हक मिल जाए. लेकिन, हकीकत बिल्कुल उलट है. यहां तो यूरिया भी पूरी मात्रा में नहीं मिल रही. जहां उपलब्ध है, वहां किसान जरूरत से कम खाद लेकर ही लौट रहे हैं. Local 18 की टीम ने जब मूंदी–खेगांव के किसान करण सिंह से बात की, तो हर किसी की परेशानी एक जैसी थी. किसान करण पटेल ने बताया, वह दो से तीन घंटे से लाइन में लगे थे, लेकिन नंबर अब तक नहीं आया. बताया, “खाद ही नहीं मिल रही, ऊपर से जितना चाहिए उतना देते भी नहीं. फसल में क्या डालें? उत्पादन कम होगा तो घाटा हमें ही झेलना पड़ेगा.”
ब्लैक में खरीदने को मजबूर
खाद की कमी ने किसानों को बाजार के भरोसे छोड़ दिया है. जहां से मिल जाए, वहीं खरीदना पड़ रहा है. चाहे महंगा हो या फिर गुणवत्ता संदिग्ध हो. किसान शुभम सिंह मौर्य ने बताया, “केंद्रों पर मिलता ही नहीं, तो मजबूरी में ब्लैक में लेना पड़ रहा है. बोवनी का समय निकल रहा है, ऐसे में खाली हाथ घर कैसे जाएं?” उनका कहना है कि बाहर से मिलने वाली खाद में मिलावट का खतरा बढ़ जाता है. कई बार किसान नकली खाद खरीद लेते हैं, फिर फसल खराब होती है और उन्हें दोगुना नुकसान झेलना पड़ता है.
DAP की रैक न आने से बढ़ी किल्लत
खंडवा में एक महीने से DAP की एक भी रैक नहीं पहुंची. यही वजह है कि सहकारी समितियां, विपणन संघ और निजी केंद्र सब हाथ खड़े कर चुके हैं. किसान नाराज हैं, क्योंकि यह समय गेहूं की बोवनी का चरम है. यदि इसी दौरान खाद न मिले, तो पूरे सीजन की मेहनत और लागत दांव पर लग जाती है. विपणन संघ केंद्र पर किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है. कई किसान 20–20 किलोमीटर दूर से उम्मीद लेकर पहुंचे, लेकिन निराश होकर लौट गए. किसान शुभम बताते हैं,“सरकार ने गलत समय पर चोट कर दी है. अगर अभी खाद नहीं मिली, तो फसल पर सीधा असर पड़ेगा.”
जमीन के हिसाब से भी नहीं मिल रही पूरी खाद
किसानों का कहना है कि खाद वितरण में भी मनमानी चल रही है. 20 एकड़ खेत वाले किसान को जहां 20 बोरी मिलना चाहिए, वहां सिर्फ 10 बोरी ही दी जा रही है. ऐसे में किसान पूरी बोवनी कैसे करे? आधे खेत में खाद डालें और आधे में छोड़ दें? किसानों की यह समस्या सिर्फ खंडवा तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई इलाकों का हाल भी यही है.
फसल पर भारी असर पड़ेगा
किसानों का मानना है कि डीएपी बोवनी के शुरुआती चरण में बेहद जरूरी है. अगर समय पर न मिले, तो गेहूं की बढ़वार पर सीधा असर पड़ता है. इससे पैदावार कम हो जाती है और किसान को नुकसान उठाना पड़ता है. स्थानीय किसान कहते हैं कि अगर जल्द ही खाद की सप्लाई नहीं बढ़ाई गई, तो नुकसान करोड़ों में जाएगा और मेहनत पानी में बह जाएगी.
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