Ground Report Khargone Water Alert: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहलाने वाला इंदौर लगातार आठ वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा है. लेकिन हाल ही में जल प्रबंधन को लेकर सामने आई तस्वीरों ने प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर कर दी. इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से करीब 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं. लेकिन यह स्थिति केवल इंदौर तक सीमित नहीं है. मध्य प्रदेश के कई शहरों और कस्बों में आज भी लोग गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. ऐसा ही एक मामला खरगोन जिले से सामने आया है, जहां गंदा पानी पीने से 14 लोग बीमार हो गए हैं.
यह मामला जिले की धार्मिक और पवित्र नगरी मंडलेश्वर के वार्ड क्रमांक 8 का है. यहां 12 और 13 जनवरी को अचानक कई लोगों के बीमार होने की शिकायतें सामने आईं. सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा. नगर पालिका की जांच में पेयजल लाइन में लीकेज पाया गया, जिसे दुरुस्त किया गया. वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पीड़ित लोगों की जांच कर उपचार शुरू किया. फिलहाल किसी भी मरीज को अस्पताल में भर्ती नहीं करना पड़ा है और न ही कोई नया मामला सामने आया है.
ग्राउंड जीरो पर लोकल18 की पड़ताल
इस पूरे मामले की सच्चाई जानने लोकल18 की टीम भी ग्राउंड जीरो पर पहुंची. स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि गंदा पानी पीने से कई परिवारों के सदस्य बीमार पड़े. लोगों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और मुंह में छालों की शिकायत हुई. हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीम रोजाना चेकअप कर रही है, लेकिन लोगों का भरोसा अब नगर परिषद की पेयजल लाइन से उठ गया है. लोगों का कहना है कि वे अब नल का पानी पीने से बच रहे हैं. पीएचई प्लांट से डब्बों में पानी भरकर लाया जा रहा है. लोगों का दावा है कि अब भी पानी पूरी तरह साफ नहीं आ रहा है. वार्ड 8 में कई जगहों पर पाइपलाइन में लीकेज मौजूद है.
वार्ड 11 में भी गंभीर लापरवाही
सिर्फ वार्ड 8 ही नहीं, बल्कि मंडलेश्वर के वार्ड क्रमांक 11 में भी हालात चिंताजनक पाए गए. यहां नगर परिषद की पेयजल लाइन सीवेज की गंदी नाली में बिछी हुई मिली. कई स्थानों पर पाइपलाइन में लीकेज भी सामने आया है. इससे लोगों में डर है कि कहीं मंडलेश्वर भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति का शिकार न हो जाए. जांच में सामने आया कि नगर परिषद ने नई और पुरानी दोनों पेयजल लाइनें उसी नाली में डाल रखी हैं, जहां घरों से निकलने वाला सीवेज पानी बहता है. नालियां गंदगी और कीचड़ से भरी हुई हैं. कई जगह नल कनेक्शन के ढक्कन बंद नहीं थे, जिससे सीवेज का पानी पूरी पाइपलाइन में मिलने की आशंका बनी हुई है.
सीवेज नाली में डूबी है पेयजल लाइन
वार्ड 11 निवासी राधेश्याम भार्गव ने बताया कि उनके मोहल्ले में पिछले कई वर्षों से पानी की लाइन नाली में ही बिछी हुई है. इसी लाइन से पानी की सप्लाई होती है. अब नई लाइन भी पुरानी लाइन के पास ही बिछा दी गई है और नए कनेक्शन दे दिए गए हैं, लेकिन उसमें पानी नहीं आता. नालियों की नियमित सफाई नहीं होती, जिससे पाइपलाइन कीचड़ में डूबी रहती है.
बंद नहीं हुआ गंदा पानी आना
वहीं वार्ड 8 के दिनेश पाटीदार ने कहा कि अभी भी नल से शुरुआत के दो मिनट गंदा और फिर साफ पानी आता है. घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं, इसलिए बीमार होने का खतरा बना हुआ है. पानी से हल्की बदबू और कचरा आता है, इसलिए इस पानी का उपयोग सिर्फ घरेलू कामों के लिए किया जा रहा है. पीने के लिए पीएचई प्लांट से या फिर चिल्ड वाटर सेंटर से डब्बों में पानी लाया जा रहा है.
8 दिन तक गंदा पानी आता रहा
विजय पटेल ने बताया कि चार दिन पहले गंदा पानी पीने से उल्टी और दस्त की शिकायत हुई थी. उस समय पता नहीं था कि सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है. अब तबीयत ठीक है और लीकेज बंद कर दिया गया है. वहीं संजय पटेल ने कहा कि सात से आठ दिन तक गंदा पानी आता रहा, जिससे पेट दर्द की शिकायत हुई. इलाज चल रहा है, लेकिन पूरी तरह राहत नहीं मिली है. देवेंद्र राठौड़ ने बताया कि कई दिनों से मुंह में छाले हो रहे हैं. परिवार के अन्य सदस्यों को भी यही परेशानी है. पानी पूरी तरह साफ नहीं आता, इसलिए नल से आने वाले पानी को चार लेयर में छानकर और दवा डालकर पी रहे हैं.
वार्ड पार्षद ने लगाए गंभीर आरोप
वार्ड पार्षद नितिन पाटीदार ने आरोप लगाया कि यह स्थिति नगर परिषद की लापरवाही से बनी है. इंदौर के भागीरथपुरा की घटना से भी सबक नहीं लिया गया. न समय पर पार्षदों की बैठक हुई और न ही वार्डों में चेंबर और वाल्व की जांच की गई. नतीजा यह हुआ कि 14 लोग बीमार हो गए और कई जगह अब भी लीकेज बने हुए हैं.
14 लोगों को उल्टी, दस्त जैसी समस्याएं
शासकीय अस्पताल मंडलेश्वर के प्रभारी डॉ. स्वप्निल श्रीवास्तव ने बताया कि शिकायत मिलने पर पूरी टीम के साथ संबंधित वार्ड में जाकर सभी 14 पीड़ित लोगों की जांच की गई. पानी के सैंपल खरगोन और इंदौर भेजे गए हैं. कुछ लोगों को उल्टी, कुछ को दस्त और कुछ मुंह में छाले की समस्या हुई है, जिनका घर पर ही उपचार चल रहा है. स्वास्थ्य टीम रोजाना मरीजों की निगरानी कर रही है. नए मरीज सामने नहीं आए है.
क्या बोले नगर परिषद सीएमओ?
नगर परिषद के सीएमओ संजय रावल ने कहा कि वार्ड से सूचना मिलने पर वे स्वयं मौके पर पहुंचे थे. शुरुआत में गंदा पानी लीकेज की वजह से आया था. यह लीकेज एक रहवासी द्वारा बिना अनुमति सड़क खुदाई करने से हुआ था, जिसे तुरंत ठीक कर दिया गया. अगले दिन एसडीएम के साथ लोगों के घरों में जाकर पानी की जांच की गई, जिसमें पानी साफ पाया गया. सभी वार्डों से पानी के सैंपल पीएचई विभाग को भेजे गए हैं और रिपोर्ट सामान्य आई है. वार्ड 11 में नाली में डली पाइपलाइन को भी हटाया जा रहा है, उस लाइन में पानी की सप्लाई नहीं होती.
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