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Chaat Taste Secret: सड़क किनारे मिलने वाली तीखी चाट हो या घर में बना गर्मा-गरम रगड़ा, मटर के बिना हर डिश अधूरी लगती है. बाजार में दो तरह की मटर मिलती है एक हरी और पीली. क्योंकि, मटर की सही पसंद ही यह तय करती है कि आपकी चाट हल्की और ताजी लगेगी या फिर गाढ़ी और मसालेदार. अगर आप भी इस उलझन में रहते हैं कि किस डिश में कौन सी मटर का इस्तेमाल करें, तो यह खबर आपके बड़े काम की साबित होगी.
हरी और पीली मटर दोनों ही हमारी चाट का अहम हिस्सा हैं, लेकिन इनका फर्क सिर्फ रंग तक सीमित नहीं है. स्वाद, बनावट और इस्तेमाल के तरीके में इतना अंतर है कि ये आपकी चाट का पूरा अनुभव बदल देते हैं. सड़क किनारे मिलने वाली चाट से लेकर घर की रसोई तक, मटर की सही पसंद ही तय करती है कि आपका प्लेट कितना मजेदार बनेगा.
हरी मटर ताजगी का प्रतीक मानी जाती है. इसका रंग चमकीला हरा होता है और स्वाद हल्का मीठा व फ्रेश लगता है. जब इसे उबाला जाता है तो ये नरम रहती है और मुंह में जाते ही घुलने जैसा एहसास देती है. इसलिए इसे टिक्की, चाट और पुलाव में ज्यादा पसंद किया जाता है. इसकी खुशबू भी हल्की और मन को लुभाने वाली होती है, जो हर डिश में ताजगी जोड़ती है.
वहीं पीली मटर दरअसल सूखी हुई हरी मटर ही होती है, जिसे प्रोसेस करके सुखाया जाता है. इसका रंग हल्का पीला होता है और स्वाद में हल्की सी मिट्टी जैसी गहराई होती है. इसे पकाने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, लेकिन जब ये पक जाती है तो इसका टेक्सचर गाढ़ा और क्रीमी हो जाता है. यही वजह है कि इसे खासतौर पर रगड़ा या मसालेदार चाट में इस्तेमाल किया जाता है.
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चाट के स्वाद की बात करें तो हरी मटर हल्की और फ्रेश फ्लेवर देती है, जो मसालों के साथ मिलकर बैलेंस बनाती है. वहीं पीली मटर मसालों को ज्यादा अच्छे से सोखती है, जिससे चाट का स्वाद ज्यादा गाढ़ा और तीखा लगता है. अगर आपको हल्का और ताजा स्वाद पसंद है तो हरी मटर बेहतर है, लेकिन अगर आप मसालेदार और भरपूर स्वाद चाहते हैं तो पीली मटर का कोई मुकाबला नहीं.
टेक्सचर के मामले में भी दोनों में बड़ा फर्क है. हरी मटर उबलने के बाद दानेदार और सॉफ्ट रहती है, जिससे चाट में हल्कापन बना रहता है. दूसरी तरफ पीली मटर पकने के बाद थोड़ी मैश हो जाती है और गाढ़ा बेस तैयार करती है. यही गाढ़ापन रगड़ा पेटीज जैसी डिश को खास बनाता है. यानी टेक्सचर ही तय करता है कि आपकी चाट हल्की होगी या भारी और रिच.
पोषण के नजरिए से भी दोनों मटर फायदेमंद हैं. हरी मटर में विटामिन्स और फाइबर ज्यादा होते हैं, जो शरीर को हल्का और एनर्जेटिक महसूस कराते हैं. वहीं पीली मटर में प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है, जो पेट को देर तक भरा रखती है. इसलिए अगर आप हेल्दी चाट बनाना चाहते हैं तो अपनी जरूरत के हिसाब से मटर का चुनाव कर सकते हैं
हरी और पीली मटर का फर्क सिर्फ रंग का नहीं, बल्कि पूरी चाट के स्वाद, टेक्सचर और अनुभव का है. अगर आप अगली बार चाट बनाएं या खाएं, तो मटर की इस छोटी सी डिटेल पर जरूर ध्यान दें. यही छोटा सा बदलाव आपकी साधारण चाट को खास और यादगार बना सकता है, और हर बाइट में एक नया स्वाद जोड़ सकता है.
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