बाबा का सपना नातिन ने किया पूरा, UPPCS एग्जाम में मारी बाजी

अमेठी: कहते हैं कि सफल होने के लिए किसी बहुत बड़े संसाधन की जरूरत नहीं, कम संसाधनों में भी सफलता की ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है. अमेठी के एक छोटे से गांव से निकलकर पूरे जिले का नाम रोशन करने वाली स्नेहा की भी कुछ ऐसी कहानी है. परिवार का और खासकर उनके बाबा ओमप्रकाश शुक्ला का सपना था कि स्नेहा सफल बनें और अधिकारी बनें.

उनका सपना स्नेहा ने पूरा कर दिया और स्नेहा का चयन पीसीएस में चयन हुआ है. स्नेहा को यह असफलता चौथे प्रयास में मिली है. अब स्नेहा नायब तहसीलदार बनेगी. पीसीएस बनने के बाद स्नेहा के शुभचिंतक उनके घर पहुंचकर उन्हें मिठाई खिलाकर उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं. आपको बता दें कि यूपीपीएससी में स्नेहा की 92वीं रैंक आई है.

पिता हरियाणा में इंटर कॉलेज में प्राचार्य
अमेठी तहसील क्षेत्र के कुड़वा डालव गांव की रहने वाली स्नेहा के पिताजी वर्तमान समय में हरियाणा में इंटर कॉलेज में प्राचार्य हैं, जबकि स्नेहा खुद सुल्तानपुर जिले के धम्मौर स्थित हनुमत इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान की प्रवक्ता हैं. स्नेहा चार बहनों में सबसे बड़ी हैं और उनके एक चचेरे भाई उमेश कुमार शुक्ला हैं. स्नेहा की मां हाउसवाइफ हैं .स्नेहा की शादी गौरीगंज तहसील क्षेत्र के पंडरी गांव के रहने वाले विपुल पांडेय के साथ नवंबर 2025 में हुई थी. उनके पति सहायक अध्यापक हैं.

स्नेहा की प्रारंभिक शिक्षा यहीं पर हुई और उन्होंने एक से छह तक की पढ़ाई गांव के बगल ही सरस्वती शिशु मंदिर में की. उसके बाद स्नेहा ने 12 तक की शिक्षा हरियाणा में पिताजी के पास की और एक बार फिर वह अमेठी लौटीं, जहां उन्होंने आरआरपीजी कॉलेज अमेठी से ग्रेजुएशन किया. सुल्तानपुर जिले के केएनआईटी कॉलेज से उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. स्नेहा के सफलता की जानकारी मिलते ही गांव के साथ ही शुभ चिंतक उनके घर पहुंच रहे हैं और उनकी सफलता पर उन्हें बधाई दे रहे हैं.

बाबा का सपना किया पूरा
अपनी सफलता पर स्नेहा ने कहा कि उनके यहां तक पहुंचने में उनके परिवार का पूरा साथ रहा है. उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेशों में जाकर ज्यादा पढ़ाई का मौका नहीं मिला, लेकिन घर में ही रहकर पढ़ाई की. इसके साथ ही हनुमत इंटर कालेज में भी पढ़ाती थी. उन्होंने कहा कि उनके बाबा का सपना था कि मैं सरकारी अधिकारी बनूं. बाबा का नवंबर 2025 में निधन हो गया. आज वो होते तो खुशी से झूम उठते. यह बताते वक्त स्नेहा थोड़ी भावुक हुईं.

उन्होंने कहा कि बाबा का सपना था कि मैं अधिकारी बनूं और मैं अधिकारी बन गई और मुझे नायाब तहसीलदार का पद मिला है. अब प्रशासन का भी अनुभव मिलेगा. शिक्षा के बाद अब नए क्षेत्र में जाना होगा और फील्ड का काम करना होगा, तो नया अनुभव मिलेगा.

बचपन से ही मेहनती थीं स्नेहा
वहीं स्नेहा के बड़े भाई उमेश शुक्ला सामान्य किसान हैं. उन्होंने भी लोकल 18 से बातचीत कर स्नेहा की सफलता बताई. उन्होंने कहा कि स्नेहा बहुत ही मेहनती और संघर्षशील लड़की है. उन्होंने कभी किसी चीज से हार नहीं मानी. घर वालों का पूरा सहयोग मिला और आज वह सफल हुई हैं, तो पूरे समाज को एक खुशी का पल दे रही हैं. उन्होंने कहा कि आज की बेटी, बेटों से कम नहीं हैं. आज परिवार में और गांव में पहली सरकारी अधिकारी स्नेहा बनी हैं, यह बहुत ही गौरव का पल है. हम सब काफी खुश हैं और समाज का लोगों का धन्यवाद है.

छोटी बहन ने दी शुभकामनाएं
वहीं स्नेहा की छोटी बहन प्रतिमा ने भी स्नेहा को शुभकामना दी. उन्होंने कहा कि मेरी बड़ी बहन स्नेहा दीदी ही मेरी प्रेरणा रही हैं. इसी प्रेरणा को लेकर हमने बहुत कुछ सीखा है और आगे बहुत कुछ सीखेंगे. मेरे बाबा चाहते थे कि घर में कोई एक सरकारी अधिकारी बने और दीदी ने उनका सपना पूरा कर दिया, जिससे हम सब बहुत खुश हैं.

उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे जा रही हैं और बेटों के बराबर काम कर रही हैंस तो मुझे लगता है कि इससे कोई फर्क नहीं है. संसाधनों के अभाव में भी सफलता स्थापित की जा सकती है और सबको अपने कार्य पर ध्यान देकर आगे इसी तरह क्षेत्र और समाज का नाम रोशन करना चाहिए.

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