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Agri Tips: घने कोहरे से चने की फसल पीली पड़ रही है और कॉलर रॉट व विल्ट जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं. खंडवा के कृषि एक्सपर्ट ने बीज उपचार व दवा छिड़काव की सलाह दी है. इसके लिए किसान को कुछ उपयोगी दवा का चयन करना होगा. जानें…
Agri Tips: लगातार पड़ रहे घने कोहरे का असर अब रबी फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है. खासकर खेतों में खड़ी चने की फसल पीली पड़ने लगी है. उसमें कीट व बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है. इससे किसान चिंतित हैं, क्योंकि यह समस्या नई तरह की दिखाई दे रही है. तेजी से फसलों को प्रभावित कर रही है. इस साल खंडवा में रबी सीजन के दौरान करीब 3 लाख हेक्टेयर रकबे में फसलों की बोवनी की गई है.
इसमें सबसे अधिक लगभग 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चने की खेती की गई है, जबकि बाकी रकबे में गेहूं और अन्य रबी फसलें बोई गई हैं. पिछले दो से तीन दिन से जिले में लगातार घना कोहरा छाया हुआ है, जिसके कारण फसलों को पर्याप्त धूप नहीं मिल पा रही है. नमी बढ़ने से चने की फसल में कीट व्याधि और फफूंदजनित बीमारियां तेजी से फैलने लगी हैं.
ये दो बीमारियां खतरनाक
किसान अब कृषि अधिकारियों और विशेषज्ञों से सलाह लेकर फसलों के बचाव में जुट गए हैं. LOCAL 18 से बातचीत में जय कृषि किसान क्लिनिक के एक्सपर्ट सुनील पटेल बताते हैं कि चने की फसल में सामान्यतः दो प्रमुख बीमारियां देखने को मिलती हैं. पहली कॉलर रॉट और दूसरी विल्ट. कॉलर रॉट आमतौर पर अंकुरण के 10 से 12 दिनों बाद दिखाई देने लगती है, जबकि विल्ट का असर फसल की 40 से 45 दिन की अवस्था में नजर आता है.
बीज उपचार जरूरी, ऐसे करें
इन बीमारियों से बचाव के लिए सबसे जरूरी कदम बीज उपचार है. सुनील पटेल के अनुसार, किसान बीज उपचार के लिए जैविक विकल्प के रूप में ट्राइकोडर्मा का उपयोग कर सकते हैं. इसे 5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से इस्तेमाल करना चाहिए. वहीं, रासायनिक विकल्प के तौर पर कार्बेन्डाजिम और मैंकोजेब के संयोजन का उपयोग किया जा सकता है, जिसकी मात्रा 2 ग्राम प्रति किलो बीज रखी जाती है. इसके अलावा बाजार में उपलब्ध एलोरा जैसे उत्पाद का भी उपयोग किया जा सकता है, जिसे 2 मिली प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचार में लिया जाता है. सही तरीके से बीज उपचार करने से शुरुआती अवस्था में ही बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है.
बीज उपचार नहीं कर पाए तो ये काम करें
विशेषज्ञ बताते हैं कि अंकुरण के 10 से 15 दिन बाद यदि मौसम में नमी बनी रहे तो फफूंदनाशक दवा थियोफेनेट मिथाइल का छिड़काव किया जा सकता है. इसकी मात्रा करीब 250 ग्राम प्रति एकड़ रखनी चाहिए. वहीं जब चने की फसल 40 से 45 दिन की अवस्था में पहुंच जाए, तो कैप्टन प्लस हेक्जा का छिड़काव करने से विल्ट जैसी बीमारियों से राहत मिलती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मौसम को देखते हुए किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार शुरू करना चाहिए. समय पर सही दवा और सलाह अपनाकर चने की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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