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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में साइकिएट्री के एक प्रोफेसर हैं, डॉ. रॉबर्ट वेल्डिंगर। वे दुनिया की सबसे लंबी हैप्पीनेस स्टडी के मौजूदा डायरेक्टर हैं। 1938 में शुरू हुई हार्वर्ड की यह स्टडी पिछले 87 साल से चल रही है, जिसमें 10,000 से ज्यादा परिवारों की तीन पीढ़ियों का अध्ययन किया जा रहा है। इस स्टडी का मुख्य सवाल है- एक खुशहाल और लंबी जिंदगी का राज क्या है? इतने सालों तक सैकड़ों फैक्टर्स को देखने-समझने के बाद रिसर्चर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस शाश्वत और जटिल से जान पड़ने वाले सवाल का एक ही सीधा, सरल जवाब है- प्यार और रिश्ते।
मतलब ये कि न पैसा, न रुतबा, न ताकत, न सफलता। सिर्फ डाइट, एक्सरसाइज और अच्छी सेहत भी नहीं। सबसे बड़ी कुंजी है प्यार, परिवार और दोस्ती। इसे सोशल फिटनेस कहा जाता है, यानी रिश्तों को भी संभालना और समय देना उतना ही जरूरी है, जितना शरीर को फिट रखना।
‘गुड हैबिट्स’ कॉलम में आज हम दोस्तों और परिवार से कनेक्ट रहने की आदत पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- इसके क्या फायदे हैं?
- इसका मेंटल हेल्थ पर क्या असर होता है?
परिवार और दोस्तों से जुड़े रहना क्यों जरूरी है?
आजकल सोशल मीडिया पर हजारों दोस्त हैं, लेकिन असली जिंदगी में हम अकेले महसूस करते हैं। कई स्टडीज और वैज्ञानिक कहते हैं कि अच्छे रिश्ते हमें तनाव से बचाते हैं और सेहत को मजबूत बनाते हैं। हफ्ते में कम से कम कुछ घंटे अपनों के साथ बिताने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

रिश्ते हमें याद दिलाते हैं कि जिंदगी सिर्फ काम नहीं, बल्कि प्यार और साथ भी है। जब हम अपनों से बात करते हैं, तो दिल हल्का होता है और जीवन आसान लगता है।
परिवार और दोस्तों से जुड़े रहने के फायदे
यह आदत इतने फायदे देती है कि आप हैरान रह जाएंगे। यह छोटी-सी कोशिश आपकी जिंदगी को खुशहाल और स्वस्थ बना सकती है। आइए देखें कुछ मुख्य फायदे-

इन फायदों को समझें-
मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है
अपनों के साथ समय बिताने से डिप्रेशन और एंग्जाइटी कम होती है। आमने-सामने बात करने से भावनात्मक सहारा मिलता है, जो जीवन की मुश्किलों से लड़ने की ताकत देता है। स्टडीज दिखाती हैं कि अच्छे रिश्ते मानसिक बीमारियों को रोकते हैं।
बच्चों का पढ़ाई में प्रदर्शन अच्छा होता है
जब बच्चे परिवार के साथ समय बिताते हैं, तो वे बेहतर कम्युनिकेशन सीखते हैं और पढ़ाई पर ध्यान देते हैं। माता-पिता का साथ उन्हें मोटिवेट करता है। घर पर बातचीत से बच्चे स्कूल में अच्छा करते हैं।
व्यवहार से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं
परिवार का साथ बच्चों में हिंसा या नशे जैसी बुरी आदतों का खतरा कम करता है। अच्छे व्यवहार पर ध्यान देने से वे सकारात्मक रास्ता चुनते हैं। यह बच्चों को भावनाओं को सही तरीके से निकालने का मौका देता है।
आत्मविश्वास बढ़ता है
अपनों के साथ समय से सबका कॉन्फिडेंस बढ़ता है। माता-पिता बच्चे को समस्या सुलझाने और बात करने की स्किल्स सिखाते हैं। परिवार का प्यार हमें मूल्यवान महसूस कराता है।
पेरेंटिंग स्किल्स सीखते हैं
बच्चे परिवार में देखकर सीखते हैं कि कैसे प्यार और देखभाल करें। यह उन्हें भविष्य में अच्छे माता-पिता बनने की तैयारी देता है। भाई-बहनों के साथ खेलने से वे प्रैक्टिस करते हैं।
झगड़ों को सुलझाने का तरीका पता चलता है
परिवार में झगड़े होते हैं, लेकिन साथ रहकर हम बात करके सुलझाते हैं। यह हमें डिबेट करने और समस्या हल करने की स्किल्स सिखाता है। अच्छे रिश्ते हमें मजबूत बनाते हैं।
तनाव कम होता है
अपनों से बात करने से स्ट्रेस कम होता है। स्टडीज कहती हैं कि दोस्तों के साथ मुश्किलें शेयर करने से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है। यह हमें स्वस्थ तरीके से तनाव झेलने की आदत डालता है।
फ्लेक्सिब्लिटी और अनुकूलन क्षमता बढ़ती है
परिवार का साथ हमें लगता है कि हम अकेले नहीं हैं। यह हमें जीवन की चुनौतियों से लड़ने की हिम्मत देता है। अच्छे रिश्ते हमें अर्थपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
शारीरिक सेहत सुधरती है
परिवार के साथ घर का खाना खाने या बाहर घूमने से डाइट और फिटनेस बेहतर होती है। यह दिल, दिमाग और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। अपनों का साथ स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देता है।
जिंदगी लंबी होती है
अच्छे रिश्ते जीवन को 50% तक लंबा कर सकते हैं। मजबूत सोशल नेटवर्क वाले लोग ज्यादा स्वस्थ और खुश रहते हैं। यह सभी फायदों का नतीजा है।
परिवार और दोस्तों से जुड़े रहने का सही तरीका यह आदत बनाना आसान है। बस कुछ सरल तरीके अपनाएं और इसे रोजमर्रा का हिस्सा बनाएं।

इन तरीकों को समझें-
रोज परिवार के साथ खाना खाएं
डिनर टेबल पर सब साथ बैठें, फोन दूर रखें। बातें करें, दिन की घटनाएं शेयर करें। यह रिश्तों को मजबूत बनाता है और खुशी बढ़ाता है। रिसर्च कहती है कि साथ खाने से बच्चे स्वस्थ आदतें सीखते हैं।
हफ्ते में दोस्तों से मिलें या कॉल करें
दोस्तों को फोन करें या मिलने जाएं। पुरानी यादें ताजा करें। यह अकेलेपन को दूर करता है और मूड अच्छा रखता है। वीडियो कॉल से भी काम चल सकता है अगर दूर हैं।
साथ घूमने-फिरने जाएं
पार्क में सैर करें, पिकनिक मनाएं या ट्रिप प्लान करें। यह नई यादें बनाता है और बॉन्डिंग बढ़ाता है। आउटडोर एक्टिविटी से सेहत भी सुधरती है।
इमोशंस शेयर करें
अपनी खुशी या दुख अपनों से कहें। सुनने का समय दें। यह भावनात्मक सहारा देता है और रिश्तों को गहरा बनाता है। स्टडीज दिखाती हैं कि शेयरिंग तनाव कम करती है।
छोटी-छोटी मदद करें
घर के कामों में मदद करें, दोस्त की जरूरत में साथ दें। यह विश्वास बढ़ाता है और रिश्ते मजबूत होते हैं। छोटी चीजें बड़ा फर्क डालती हैं।
खेल या हॉबी साथ पूरे करें
बोर्ड गेम खेलें, गाने सुनें या किताब पढ़ें। यह मजा देता है और साथ समय बिताने का बहाना बनता है। बच्चे इससे सीखते हैं।
जन्मदिन या त्योहार मनाएं
साथ सेलिब्रेट करें। यह खुशी फैलाता है और परिवार को एकजुट रखता है। छोटे सेलिब्रेशन भी काम करते हैं।
टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करें
सोशल मीडिया पर जुड़ें लेकिन असली मिलना न भूलें। ग्रुप चैट से प्लान बनाएं। लेकिन स्क्रीन टाइम कम रखें।
परिवार और दोस्तों से जुड़े रहने की आदत कैसे बनाएं?
नई आदत बनाने के लिए नियमित रहें। छोटे कदमों से शुरू करें।

परिवार और दोस्तों से दूर रहने के नुकसान
अगर अपनों से कटे रहेंis तो अकेलापन बढ़ता है। तनाव, डिप्रेशन और बीमारियां आ सकती हैं। बच्चे बुरी आदतों में पड़ सकते हैं। आत्मविश्वास कम होता है और जिंदगी छोटी लगती है। काम की क्वालिटी भी गिरती है।
छोटी, लेकिन अच्छी आदत
परिवार और दोस्तों से जुड़े रहना छोटी आदत है, लेकिन फायदे बड़े हैं। यह हमें खुश, स्वस्थ और मजबूत बनाती है। आज से शुरू करें, अपनों को कॉल करें, मिलें और प्यार बांटें। रिश्ते हमारी सबसे बड़ी दौलत हैं, इन्हें संभालें और जिंदगी को सुंदर बनाएं।
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