Gold and Silver: वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध की स्थिति में सोने की कीमतें आमतौर पर चढ़ती हैं, लेकिन बीते सोमवार को कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया. हफ्ते के पहले कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों के दाम फिसल गए. कल सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम 2690-2900 तक की गिरावट आई. MCX पर भी सोना 1.83 परसेंट गिरकर 1,55,566 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया.
चांदी में तो सोने के मुकाबले और भी बड़ी गिरावट देखी गई. कल चांदी की कीमत में प्रति किलो के हिसाब से 4232-5000 रुपये तक की बड़ी गिरावट आई है. इस दिन चांदी लगभग 2.11 परसेंट की गिरावट के साथ 2.53-2.55 लाख प्रति किलो के दायरे में कारोबार करती नजर आई. इससे साफ है सोने और चांदी दोनों की शुरुआत निचले स्तर पर हुई और इस पूरे कारोबारी सत्र में इन पर दबाव बने रहने की संभावना है.
जंग के माहौल में सस्ता हुआ सोना
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के समय सोने-चांदी जैसे कीमती धातुओं की कीमत बढ़ती है क्योंकि ‘सुरक्षित निवेश’ (safe-haven assets) के तौर पर इनकी मांग बढ़ती है. ऐसे में ईरान और अमेरिका में जंग के बीच सोने और चांदी की कम हुई कीमत वाकई में हैरान कर देने वाली बात है.
Lemonn Markets Desk के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के अनुसार, मौजूदा कीमतों में उतार-चढ़ाव में वैश्विक कारकों की अहम भूमिका है. उनका कहना है कि कीमतों में आई यह गिरावट मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी है. वह कहते हैं, ”कीमती धातुओं की कीमतों में आई गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं. कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100.15 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंकाएं बढ़ गई हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं.”
क्यों अचानक गिरी सोने की कीमत?
दरअसल, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का डर बढ़ जाता है क्योंकि इससे ट्रांसपोर्टेशन से लेकर लॉजिस्टिक्स, खेती-बाड़ी, कच्चे माल की लागत सभी बढ़ जाती हैं. इसी महंगाई को काबू में रखने के लिए अमेरिकी फेड रिजर्व (US Federal Reserve) ब्याज दरों को ऊंची रखता है. इससे बाजार में पैसों का बहाव कम हो जाता है क्योंकि ब्याज दरें से बढ़ने से बैंक से लोन लेना महंगा हो जाता है. ऐसे में लोग खरीदारी या निवेश कम कर देते हैं. जब बाजार में खरीदार कम होंगे, तो डिमांड अपने आप कम हो जाएंगी. डिमांड कम होने से दुकानदार कीमतें घटाने या स्थिर रखने पर मजबूर हो जाएंगे. इससे महंगाई का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा.
फेड रिजर्व जब भी ब्याज दरें ऊंची रखता है, तो अमेरिकी डॉलर मजबूत हो जाता है. चूंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सोना डॉलर में ही खरीदा जाता है इसलिए डॉलर के महंगा होने से सोने की मांग कम हो जाती है, जिससे कीमतें गिरने लगती हैं.
यह भी है एक वजह
इसके अलावा, जब भी क्रूड ऑयल की कीमत अचानक से बहुत बढ़ जाती है, शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट्स में माहौल गड़बड़ा सा जाता है. निवेशक अपने दूसरे घाटे को भरने या ‘मार्जिन कॉल’ को पूरा करने के लिए सोना बेचकर नकदी जुटाते हैं. कल कीमत में आई गिरावट की यह भी एक बड़ी वजह थी.
क्या करें निवेशक?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को ऐसे उतार-चढ़ाव वाले दौर में घबराकर कोई भी फैसला लेने से बचना चाहिए. कमोडिटीज में थोड़े समय के लिए कीमतों में गिरावट आना आम बात है, खासकर तब जब वैश्विक आर्थिक संकेत मिले-जुले हों. लॉन्ग टर्म में निवेश करने वालों के लिए यह एक सही मौका है.
कीमतों में इस तरह की गिरावट धीरे-धीरे खरीदारी करने के मौके दे सकती है, जो आगे चलकर मुनाफा करा सकता है क्योंकि एक्सपर्ट्स इस साल दिवाली तक सोने की कीमत के फिर से रिकॉर्ड हाई तक पहुंचने की उम्मीद लगा रहे हैं.
हालांकि विश्लेषकों का यह भी सुझाव है कि एक ही बार में सारा पैसा न लगाएं. जैसे कि अगर आपको 1 लाख रुपये का निवेश करना है, तो अभी सिर्फ 25000 ही लगाएं. अगर कीमतें गिरती हैं, तो थोड़ा और पैसे लगाएं. इस तरह से छोटी-छोटी रकम में निवेश करना बेहतर है. जानकार निवेशकों को यह भी सलाह देते हैं कि वे कच्चे तेल की कीमतें, महंगाई के रुझान और US फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नजर रखें क्योंकि इनका सोने-चांदी की कीमतों पर बहुत असर पड़ता है.
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