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Balaghat News: छात्राओं ने हॉस्टल वार्डन पर पिटाई का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उन्हें खाना भी अच्छा नहीं मिलता है. वह कभी दाल में आटा मिलाकर देती है, तो कभी सब्जी में आटा लगा देती है. खाने में इल्लियां निकलती हैं. हम ठीक से खाना नहीं खा पाते. जब भोजन ही ठीक नहीं खाएंगे, तो पढ़ेंगे कैसे.
बालाघाट. आदिवासियों के विकास के नाम पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है. कई सुविधाएं और कार्यक्रम विशेष पिछड़ी जनजाति के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए सरकार चलाती है लेकिन जमीन पर तस्वीरें अलग ही नजर आती हैं. शायद यहीं वजह है कि बालाघाट शहर में स्थित विशेष पिछड़ी जनजाति छात्रावास की दर्जनों छात्राओं ने अपनी हॉस्टल वार्डन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और पहुंच गईं कलेक्ट्रेट स्थित जनजातीय कार्य विभाग के दफ्तर. इतना ही नहीं, लड़कियों ने इस बार न सिर्फ हॉस्टल वार्डन की शिकायत की बल्कि तब तक हॉस्टल न लौटने की जिद की, जब तक मैडम को हटाया न जाए. लोकल 18 ने छात्राओं से बातचीत की और समझने की कोशिश की कि आखिर मामला क्या है.
लोकल 18 से बातचीत में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों ने बताया कि वह इस हॉस्टल में चार साल से रह रही हैं. तब से लेकर अब तक मैडम अवैध वसूली करती है. जो बच्चे हॉस्टल में आते हैं, उनसे 25 हजार रुपये तक वसूली करती है. वहीं पैसे न देने पर उन्हें टारगेट करते हुए वह मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है. कभी बिना आवेदन छुट्टी का बोलकर, तो कभी कोई और वजह बताकर. कई मामलों में तो मैडम लड़कियों की पिटाई तक करती है. यहां तक कि खाना भी अच्छा नहीं मिलता. कभी दाल में आटा मिलाकर देती है, तो कभी सब्जी में आटा लगा देती है. खाने में इल्लियां निकलती हैं. हम ठीक से खाना नहीं खा पाते हैं. जब खाना ही ठीक से नहीं खाएंगे, तो पढ़ेंगे कैसे.
बालाघाट विशेष पिछड़ी जनजाति हॉस्टल में चार साल से रह रही एक छात्रा ने बताया कि अब वह 12वीं में है. हॉस्टल में ट्यूशन होता था लेकिन ट्यूशन वाली मैडम से हॉस्टल वार्डन का विवाद हो गया, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है. अभी बोर्ड के पेपर चल रहे हैं और ट्यूशन भी बंद करवा दिया है. उनका कहना है कि यहां पर जिलेभर से लड़कियां पढ़ने के लिए आती हैं. उनके माता-पिता बड़ी उम्मीदों से शहर भेजते हैं लेकिन व्यवस्था ऐसी रहेगी, तो हमारा भविष्य कैसा होगा.
जिद पर अड़ गईं छात्राएं
छात्राओं ने जनजातीय कार्य विभाग के दफ्तर में धरना दिया और मांग पर अड़ी रहीं कि जब तक मैडम को नहीं हटाया जाता, तब तक वह हॉस्टल नहीं जाएंगी. इधर जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर का कहना है कि मामले में तत्काल कार्रवाई की गई है. एक कमेटी बनाकर जांच करवाई जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चियों के हित में ही फैसला लिया जाएगा.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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