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Khargone News: मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना में खास दस्ते बनाए जाते थे, जिनके पास घोड़पड़ (Indian Monitor Lizard) होते थे. इनकी मदद से सैनिक रस्सी बांधकर किलों की ऊंची दीवारों पर आसानी से चढ़ जाते थे.
खरगोन. पुराने समय में जब राजा-महाराजा युद्ध के लिए निकलते थे, तो उनके साथ हाथी, घोड़े और ऊंट जैसे जानवर भी होते थे, जिनकी अपनी-अपनी भूमिका थी लेकिन इनके अलावा एक ऐसा जीव भी सेना में शामिल होता था, जिसे किले फतह करने का गुप्त हथियार कहा जा सकता है. मध्य प्रदेश के खरगोन और निमाड़ क्षेत्र में इसे घोड़पड़ (Indian Monitor Lizard) कहा जाता है. इसकी पकड़ इतनी मजबूत होती है कि यह आसानी से ऊंची दीवारों पर चढ़ सकती है और अपने शरीर से कई गुना ज्यादा भार भी खींच सकती है.
एक्सपर्ट से जानें घोड़पड़ की खासियत
वन्यजीव विशेषज्ञ महादेव पटेल लोकल 18 को बताते हैं कि घोड़पड़ दिखने में छिपकली जैसी होती है. इसका वजन 5 से 7 किलो तक और लंबाई करीब साढ़े चार फीट तक होती है. इसके नाखून एक से 1.5 सेंटीमीटर लंबे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसानी से किसी भी कठोर सतह पर पकड़ बना लेती है. यही वजह है कि यदि इसकी कमर पर रस्सी बांध दी जाए, तो यह लगभग 150 किलो वजन तक खींच सकती है. यहां तक कि दो-तीन सैनिक भी इस रस्सी को पकड़कर दीवारों पर चढ़ सकते हैं.
आज जंगलों में घोड़पड़ की संख्या कम हो गई है लेकिन खरगोन जिले के कई इलाकों में यह अब भी दिखाई देती है. कभी-कभी यह बस्तियों तक आ जाती है. कई इलाकों में लोग इसका मांस भी खाते है. हालांकि वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियमों के तरह इसे किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाना अपराध माना गया है. बारिश में मौसम में इनकी उपस्थिति ज्यादा होती है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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