इजराइल-हमास युद्ध के बीच, गाजा की महिलाओं की दिल दहला देने वाली दास्तान

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गाजा पट्टी में जारी इजराइल-हमास युद्ध ने न सिर्फ घरों को उजाड़ा है, बल्कि महिलाओं की जिंदगी को एक ऐसी अंधेरी गली में धकेल दिया है.

फोटो साभार : AP

युद्ध की आग में जलते हुए उस मां का दिल कितना टूटता होगा, जब अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए उसे अपने शरीर को क‍िसी के सामने परोसना पड़े? भूखे बच्‍चों का पेट भरने के ल‍िए उसे उन मर्दों की भूख म‍िटानी पड़े, जो उसे 2 न‍िवाले देने का वादा करता है…. गाजा पट्टी में जारी इजराइल-हमास युद्ध ने न सिर्फ घरों को उजाड़ा है, बल्कि महिलाओं की जिंदगी को एक ऐसी अंधेरी गली में धकेल दिया है, जहां भोजन के बदले शारीरिक संबंध बनाने की मजबूरी बन गई है. ऐसी एक-दो नहीं बल्‍कि कई महिलाओं ने अपनी आंसू भरी आंखों से ये दास्‍तां सुनाई कि कैसे भूख और बेबसी ने उन्हें इस दलदल में फंसा दिया.

एसोस‍िएट‍िड प्रेस (AP) ने अपनी एक स्‍पेशल रिपोर्ट में छह महिलाओं की दिल छू लेने वाली कहानियां बयां की है, जो युद्ध की क्रूरता को दिखा रही हैं. गाजा पट्टी, जहां इजराइल की घेराबंदी और सहायता पर पाबंदी ने हालात को नर्क जैसा बना दिया है. यहां 90% से ज्यादा लोग घर छोड़कर भाग चुके हैं, नौकरियां छिन गई हैं, और भोजन की कमी ने हर घर को तबाह कर दिया है. महिलाएं, जो परिवार की रीढ़ होती हैं, अब सबसे ज्यादा शोषण का शिकार हो रही हैं. सहायता वितरण से जुड़े पुरुषों द्वारा उन्हें सेक्स के बदले भोजन, पैसा या नौकरी का लालच दिया जा रहा है. एसोसिएटेड प्रेस (एपी) से बात करने वाली ये महिलाएं डर से नाम नहीं बतातीं, लेकिन उनकी आवाज में वह दर्द है जो पूरी दुनिया को जगाने के लिए काफी है.

Deepika Sharma

दीपिका शर्मा प‍िछले 5 सालों से News18 Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्‍शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र…और पढ़ें

दीपिका शर्मा प‍िछले 5 सालों से News18 Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्‍शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र… और पढ़ें

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इजराइल-हमास युद्ध के बीच, गाजा की महिलाओं की दिल दहला देने वाली दास्तान

एक और 35 साल की विधवा ने सहायता केंद्र पर अपना नंबर दिया, जहां एक UNRWA यूनिफॉर्म वाला आदमी था. रात को उसके फोन आने लगे – सेक्सुअल डिमांड्स के. उसने UNRWA में शिकायत की, लेकिन वहां से जवाब म‍िला कि उन्‍हें फोन र‍िकॉर्ड‍िंग या ऐसा ही कोई सबूत चाहिए. लेकिन इस मह‍िला के पास रिकॉर्डिंग करने वाला फोन ही नहीं था. वह कहती है, “मैं अपमानित महसूस कर रही थी.” जबकि UNRWA की कम्युनिकेशंस डायरेक्टर जूलियट टौमा कहती हैं कि उनकी एजेंसी में शोषण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है, और शिकायत के लिए सबूत जरूरी नहीं. लेकिन व्यक्तिगत मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं की गई.

वहीं एक 29 साल की मां ने बताया कि उसके चार बच्चे हैं, और एक सहायता वर्कर ने उसे पोषण सप्लीमेंट्स के बदले “शादी” (सेक्सुअल संबंध) का प्रस्ताव दिया. उसने मना किया, लेकिन कहती है, “मैं पूरी तरह अपमानित महसूस कर रही थी. मुझे अपने बच्चों के लिए मदद मांगनी पड़ी. अगर मैं नहीं करती, तो कौन करता?” ये मह‍िलाएं सिर्फ भोजन चाहती हैं, लेकिन बदले में अपनी गरिमा खो रही हैं.

फोटो साभार : AP

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