बुरहानपुर में धुलेंडी के अवसर पर गायत्री परिवार ने लालबाग रोड स्थित श्रीकृष्ण मंगल परिसर में प्राकृतिक रंगों की होली का आयोजन किया। बुधवार सुबह 8 बजे से 10 बजे तक चले इस वार्षिक आयोजन में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। इस आयोजन के लिए गायत्री परिवार ने एक दिन पहले विशेष रूप से प्राकृतिक रंग तैयार किए थे। इनमें टेसू के फूलों का रस, नीम का रस, चुकंदर का रस, सुगंधित अष्टगंध, चंदन, हल्दी, मुल्तानी मिट्टी, काली मिट्टी, भस्म और गुलाबजल शामिल थे। इन रंगों का निर्माण गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं, श्रीराम गुरुकुल के आचार्यों और विद्यार्थियों द्वारा किया गया था। गायत्री परिवार के मनोज तिवारी और संजय राठौड़ ने बताया कि रासायनिक रंगों और हानिकारक गुलाल के डर से लोग होली के उत्साहपूर्ण पर्व से दूर होते जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, गायत्री परिवार ने प्राकृतिक रंगों के माध्यम से होली की पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक संस्कृति को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक उबटन, मुल्तानी और काली मिट्टी के उपयोग से त्वचा के रोमछिद्र खुलते हैं, त्वचा सुगंधित और स्वच्छ बनती है, जिससे कई त्वचा रोगों से बचाव होता है। प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ सुरेश चौधरी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह शरीर को रोगमुक्त रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोजन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर नृत्य भी किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। दीपक कापड़िया ने जानकारी दी कि परिसर में केवल प्राकृतिक रंगों की ही व्यवस्था थी और बाहर से किसी भी प्रकार के रासायनिक रंग या गुलाल लाना पूर्णतः वर्जित था। चार तस्वीरों में देखिए होली… .