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Gardening Tips: गमले में पौधे लगाते समय सबसे बड़ी समस्या कीटों और खाद के चुनाव की आती है. ऐसे में जरूरी है कि हम प्राकृतिक खाद और ऑर्गेनिक उपायों को प्राथमिकता दें. (रिपोर्ट: सावन /खंडवा)
आजकल शहरों और कस्बों में गार्डनिंग का शौक तेजी से बढ़ रहा है. जगह की कमी के बावजूद लोग छत, किचन, बालकनी और आंगन में गमलों में पौधे लगाकर अपने घर को हरा-भरा बना रहे हैं. किचन गार्डन का यह ट्रेंड न सिर्फ घर की खूबसूरती बढ़ाता है बल्कि ताजी और सेहतमंद सब्जियां और फल भी उपलब्ध कराता है.

गमले में पौधे लगाते समय सबसे बड़ी समस्या कीटों और खाद के चुनाव की आती है. गलत खाद डालने से पौधे सूख जाते हैं और ग्रोथ रुक जाती है. ऐसे में जरूरी है कि हम प्राकृतिक खाद और ऑर्गेनिक उपायों को प्राथमिकता दें. गमले में मिट्टी की मात्रा सीमित होती है. यदि इसमें केमिकल खाद डाल दी जाए, तो पौधे की जड़ें जल सकती हैं और यह कमजोर हो जाता है.

इसके बजाय वर्मी कंपोस्ट, गोबर की खाद या सिटी कंपोस्ट जैसी प्राकृतिक खाद पौधों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है. वर्मी कंपोस्ट को केंचुआ खाद भी कहा जाता है. इसमें पौधों की ग्रोथ के लिए जरूरी पोषक तत्व भरपूर होते हैं. इससे फूल और फल की गुणवत्ता बढ़ती है और सब्जियां भी स्वादिष्ट बनती हैं.

आजकल लोग छोटी सी बालकनी या छत पर भी गार्डनिंग कर रहे हैं. आत्मा परियोजना के तकनीकी प्रबंधक अजीत कुमार के अनुसार, किचन गार्डन का कॉन्सेप्ट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसमें लोग टमाटर, मिर्च, पालक जैसी सब्जियां तो लगाते ही हैं, साथ ही सजावटी फूल भी उगाते हैं. गमलों में पौधे खराब न हों, इसके लिए प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल सबसे बेहतर माना जाता है.

बरसात के मौसम में नमी ज्यादा होने के कारण गमलों में कीड़े लगना आम बात है. ऐसे में रासायनिक दवाइयों की बजाय नीम के तेल से बने कार्बनिक पेस्टिसाइड या घरेलू नुस्खे अपनाने चाहिए. नीम का छिड़काव करने से पौधे सुरक्षित रहते हैं और स्वास्थ्य पर भी कोई विपरीत असर नहीं पड़ता. यह पर्यावरण के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है.

अगर आपने गुलाब जैसे वूडी प्लांट लगाए हैं, तो उनमें थोड़ा-बहुत यूरिया या पोटाश दिया जा सकता है लेकिन बहुत कम मात्रा में. वहीं सीजनल फूल या सब्जियां जैसे- टमाटर, स्ट्रॉबेरी आदि को सिर्फ वर्मी कंपोस्ट और ऑर्गेनिक खाद ही देनी चाहिए क्योंकि इनमें जड़ें और तना काफी नाजुक होते हैं और केमिकल खाद से तुरंत सूख सकते हैं.

यदि आप नियमित रूप से गमलों में प्राकृतिक खाद डालते हैं और समय-समय पर नीम की दवा का छिड़काव करते हैं, तो बरसात के मौसम में पौधे हरे-भरे और लहलहाते दिखाई देंगे. किचन गार्डनिंग से न केवल घर की शोभा बढ़ती है बल्कि परिवार को ताजी और सुरक्षित सब्जियां और फल भी मिलते हैं.

यदि आप भी अपने घर की छत या बालकनी में गमलों में पौधे लगा रहे हैं, तो रासायनिक खाद से बचें और वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद जैसे प्राकृतिक विकल्पों का ही इस्तेमाल करें. यही पौधों की लंबी उम्र और अच्छी ग्रोथ का असली राज है.
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