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Gardening Tips: पत्तियों वाली अजवाइन एक औषधीय पौधा है, जिसे घर में आसानी से उगाया जा सकता है. यह डायबिटीज, गैस, पेट दर्द, कब्ज, सर्दी-खांसी और दमा जैसी समस्याओं में तेज राहत देता है. इसकी तेज खुशबू खाने का स्वाद बढ़ाती है और कई रेस्टोरेंट इसे दाने वाली अजवाइन के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं.
रोहतास जिले के शिवपुर गांव के प्रगतिशील किसान स्यंदन सुमन इन दिनों उस पौधे की खेती कर रहे हैं, जिसे आमतौर पर ‘पत्तियों वाली अजवाइन’ कहा जाता है. यह पारंपरिक अजवाइन से अलग होती है और एक छोटे झाड़ी जैसे पौधे के रूप में घर के आंगन में आसानी से उग जाती है. सुमन बताते हैं कि यह पौधा आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है और अब धीरे-धीरे लोगों में इसकी पहचान बढ़ रही है.

पत्तियों वाली अजवाइन को अंग्रेजी में ओरेगेनो कहा जाता है. इसमें मौजूद थाइमोल और कारवाक्रोल जैसे तत्व डायबिटीज, गैस, अपच, कब्ज और पेट दर्द में तेज असर दिखाते हैं. सुमन के मुताबिक, गांव में कई लोग इसे घरेलू नुस्खे के रूप में अपना चुके हैं और रोजमर्रा की छोटी-छोटी समस्याओं में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है.

स्यंदन सुमन बताते हैं कि यह पौधा सिर्फ पेट के लिए ही नहीं, बल्कि सर्दी, खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी जैसी दिक्कतों में भी राहत देता है. इसकी पत्तियां हल्की गर्म तासीर वाली होती हैं, जो बलगम को ढीला करने और सांस लेने में आसानी देने में मदद करती हैं. गांव के बुजुर्ग इसे पारंपरिक दवा का बेहतरीन विकल्प मानते हैं.

इस पौधे की पत्तियों में इतनी तेज और ताजगी भरी खुशबू होती है कि यह किसी भी खाने को तुरंत स्वादिष्ट बना देती है. सुमन बताते हैं कि आसपास के कई छोटे होटल अब दाने वाली अजवाइन की जगह इसकी पत्तियों का इस्तेमाल करना शुरू कर चुके हैं. प्लेट सजाने से लेकर तड़का लगाने तक, इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है.

स्यंदन सुमन के मुताबिक, इसकी पत्तियों के पकौड़े बहुत स्वादिष्ट बनते हैं और बारिश के मौसम में लोग इसे खास पसंद करते हैं. इसकी चटनी भी जबरदस्त सुगंध और स्वाद देती है. घरों में इसे अजवाइन दानों के विकल्प के रूप में तेजी से अपनाया जा रहा है और महिलाएं इसे नए-नए व्यंजनों में आजमा रही हैं.

करीब दस साल पहले एक दोस्त से जानकारी मिलने के बाद सुमन ने अपने गार्डन में इसकी खेती शुरू की थी. यह पौधा कम पानी और कम देखभाल में तेजी से बढ़ जाता है. सुमन इसे अपने घर के दरवाजे और बाउंड्री के पास भी लगाते हैं, जहां इसकी खुशबू हवा में फैलती रहती है. यह सजावट के साथ-साथ दवा का भी काम करता है.

जैसे-जैसे लोगों को इसके फायदे पता चल रहे हैं, वैसे-वैसे इसकी मांग भी बढ़ रही है. कई लोग इसे ताज़ी पत्तियों के रूप में खरीदते हैं, जबकि कुछ इसे सुखाकर चाय और दवा के रूप में इस्तेमाल करते हैं. गांव के आसपास के बाजारों में इसकी नियमित बिक्री शुरू हो चुकी है और छोटे किसान भी इससे प्रेरित हो रहे हैं.

सुमन का मानना है कि पत्तियों वाली अजवाइन न केवल सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह किसानों के लिए कम लागत में बेहतर आमदनी देने वाली फसल भी बन सकती है. इसके पौधे जल्दी तैयार हो जाते हैं और बार-बार टूटकर फिर से बढ़ते रहते हैं. वे चाहते हैं कि अधिक किसान इस औषधीय पौधे की खेती अपनाएं ताकि इसकी मांग पूरी हो सके और लोग प्रकृति के इस अनमोल वरदान का लाभ उठाएं.
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