Gardening Tips: रसोई के कचरे को बनाएं सोना…जाने माली क्यों कहते हैं अमृतजल गार्डनिंग का असली राज

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Gardening Tips: अमृतजल पौधों के लिए प्राकृतिक टॉनिक है, जिसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है. यह ऑर्गेनिक खाद पौधों की बढ़त, फूल और फलने की क्षमता को बढ़ाती है. रसोई कचरे, गुड़ और पानी से बनने वाला यह घोल न सिर्फ मुफ्त है बल्कि पौधों के लिए बेहद पौष्टिक भी है.

हैदरबाद: बागवानी के शौकीन अक्सर अपने पौधों को हरा-भरा रखने के लिए महंगे केमिकल उर्वरक खरीदते हैं. पर क्या आप जानते हैं कि आपके आस-पास ही कुछ चीजें ऐसी हैं जो इन महंगे उत्पादों से कहीं ज्यादा असरदार हैं? अनुभवी माली इसे ‘अमृतजल’ या ‘लिक्विड गोल्ड’ कहते हैं.

यह एक शक्तिशाली ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइजर है जो न सिर्फ पौधों की ग्रोथ तेज करता है, बल्कि फलों-सब्जियों की संख्या और गुणवत्ता भी बढ़ा देता है.

अमृतजल इतना खास क्यों है?
अमृतजल एक प्राकृतिक टॉनिक है जो गाय के गोबर, गोमूत्र और गुड़ से बनता है. इसे पौधों के लिए ’संजीवनी बूटी’ माना जाता है क्योंकि इसमें पौधों के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम भरपूर मात्रा में होते हैं. साथ ही, इसमें मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीव मिट्टी की सेहत सुधारते हैं और उसे ज्यादा उपजाऊ बनाते हैं.

घर पर अमृतजल बनाने की सामग्री 
ताजा गाय का गोबर 1 किलो, गाय का गोमूत्र: 1 लीटर,  गुड़ 50 ग्राम, पानी 10 लीटर और एक बड़ा बर्तन या बाल्टी और इसे मिलाने के लिए लकड़ी की डंडी चाहिए होगी.

बनाने का तरीका
एक बड़े बर्तन में 1 किलो गोबर, 1 लीटर गोमूत्र और 50 ग्राम गुड़ डालें. लकड़ी की डंडी की मदद से इन्हें अच्छी तरह मिलाएं ताकि सारी गांठे खुल जाएं और मिश्रण एक समान हो जाए. अब इस मिश्रण में धीरे-धीरे 10 लीटर पानी मिलाएं. पानी डालते समय लगातार चलाते रहें ताकि सब कुछ अच्छी तरह घुल जाए फिर  बर्तन को ढककर किसी ठंडी और छायादार जगह पर 3 दिनों के लिए रख दें. इस 3 दिन की अवधि में इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम लकड़ी से हिलाते रहें. ऐसा करने से मिश्रण में ऑक्सीजन जाएगी जो लाभकारी सूक्ष्मजीवों के विकास में मदद करेगी.

इस्तेमाल का तरीका
तीन दिन बाद आपका अमृतजल इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाएगा  इस्तेमाल से पहले इसे कपड़े या महीन जाली से छान लें ताकि बचे हुए ठोस कण अलग हो जाएं फिर इसे सीधे इस्तेमाल न करें इसे पतला करना बेहद जरूरी है 1 भाग अमृतजल को 10 भाग पानी में मिलाकर ही पौधों में डालें जैसे 1 लीटर अमृतजल के लिए 10 लीटर पानी चाहिए इस पतले घोल को सीधा पौधों की जड़ों की मिट्टी में डालें आप इसका इस्तेमाल हर 15 से 20 दिन में एक बार कर सकते हैं.

Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion, career, politica…और पढ़ें

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