3 घंटे पहले
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गुरुवार, 5 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है। ये व्रत घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा की जाती है और दिन भर निराहार रहकर व्रत किया जाता है। शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्र को अर्घ्य दिया जाता है, इसके बाद व्रत करने वाले भक्त खाना खाते हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गुरुवार और चतुर्थी के योग में भगवान गणेश, विष्णु जी, गुरु ग्रह के साथ ही चंद्रदेव की भी विशेष पूजा की जाती है। जानिए इस दिन कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…
चतुर्थी पर स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद घर के मंदिर में चतुर्थी व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। संकल्प के बाद भगवान गणेश की पूजा करें। जल, दूध, पंचामृत और फिर जल से भगवान को स्नान कराएं। नए वस्त्रों से और फूल से गणेश जी का श्रृंगार करें। कुमकुम, चंदन, चावल, दूर्वा, अबीर, गुलाल आदि पूजन सामग्री अर्पित करें। मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। गणेश जी के मंत्र श्री गणेशाय नम: का जप करें।
जो लोग चतुर्थी व्रत करते हैं, उन्हें दिनभर निराहार रहना चाहिए। अगर भूखे रहना मुश्किल हो तो एक समय फलाहार और फलों का सेवन सकते हैं। दूध और फलों का रस भी पी सकते हैं।
शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। चंद्रदेव के मंत्र ऊँ सों सोमाय नम: का जप करें। गणेश जी की पूजा करें। इस तरह ये व्रत पूरा होता है। इसके बाद व्रत करने वाले भक्त खाना खा सकते हैं।
ऐसे कर सकते हैं भगवान विष्णु की पूजा
गुरुवार को गणेश पूजा के बाद विष्णु जी और महालक्ष्मी का अभिषेक करना चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और भगवान को स्नान कराएं। दूध के बाद शुद्ध जल से अभिषेक करें। हार-फूल और नए वस्त्रों से भगवान का श्रृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
गुरु ग्रह को चढ़ाएं हल्दी की गांठ
ज्योतिष में गुरु ग्रह (बृहस्पति) को गुरुवार का कारक ग्रह माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें गुरुवार को गुरु ग्रह की पूजा करनी चाहिए। गुरु ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए गुरुवार को शिवलिंग पर चने की दाल और हल्दी की गांठ चढ़ाएं। चंदन का लेप लगाएं और पीले फूलों से शिवलिंग का श्रृंगार का करें। धूप-दीप जलाएं। बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। गुरु ग्रह के मंत्र ॐ बृं बृहस्पतये नमः का जप करना चाहिए।
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