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Agriculture Tips: लंबे समय तक जलजमाव से कपास की जड़ों में ऑक्सीजन का संचार रुक जाता है. इससे पौधों की सेहत कमजोर होने लगती है और ऐसे में जड़ों पर फंगस का हमला हो जाता है. पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधा सूखने लगता है. किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों को नुकसान होता है.
गौरतलब है कि जिले के कई हिस्सों में बारिश का पानी खेतों में जमा हो गया है. लंबे समय तक जलभराव से कपास की जड़ों में ऑक्सीजन का संचार रुक जाता है, जिससे पौधों की सेहत कमजोर होने लगती है. ऐसी स्थिति में जड़ों पर फंगस का हमला हो जाता है. इससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पौधा सूखने लगता है. किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों का नुकसान होता है.
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, कपास की जड़ों में फंगस लगने से पौधों की पोषक तत्व लेने की क्षमता कम हो जाती है. शुरुआत में पौधों की निचली पत्तियां पीली दिखने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा कमजोर होकर गिर सकता है. यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो फसल का एक बड़ा हिस्सा खराब हो सकता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
उपचार के लिए खेतों में डालें दवाएं
एक्सपर्ट्स ने उपचार के लिए किसानों को रासायनिक दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी है. खरगोन के वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह ने लोकल 18 को बताया कि कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (ब्लू कॉपर) 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या कार्बेण्डाजिम एक ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर पौधों की जड़ों में ड्रेचिंग यानी टपकाने की विधि से डालना चाहिए. यह दवा सीधे जड़ों में असर करती है और फंगस को खत्म करने में मददगार होती है. इस प्रक्रिया को 10 से 15 दिनों के अंतराल पर दोहराने से फसल सुरक्षित रह सकती है.
दवाओं के साथ ये काम भी जरूरी
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि केवल दवा का प्रयोग करना पर्याप्त नहीं है. जब तक खेतों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक समस्या बार-बार सामने आएगी, इसलिए किसानों को चाहिए कि वे खेतों में नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी बाहर निकालें. साथ ही खेत की मिट्टी को भुरभुरा रखें ताकि जड़ों को हवा मिल सके और फंगस पनपने की संभावना कम हो जाए.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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