बारिश से कपास की जड़ों में आया फंगस, एक्सपर्ट ने बताया अब क्या करें

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Agriculture Tips: लंबे समय तक जलजमाव से कपास की जड़ों में ऑक्सीजन का संचार रुक जाता है. इससे पौधों की सेहत कमजोर होने लगती है और ऐसे में जड़ों पर फंगस का हमला हो जाता है. पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधा सूखने लगता है. किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों को नुकसान होता है.

खरगोन. मध्य प्रदेश का खरगोन जिला कपास उत्पादन के लिए पूरे देश में जाना जाता है. यहां दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में किसान बीटी कॉटन की खेती करते हैं, जिसे ‘सफेद सोना’ कहा जाता है. बीते दिनों हुई भारी बारिश के बाद खेतों में पानी भर गया, जिससे कपास की फसल प्रभावित हो रही है. कई किसानों ने शिकायत की कि पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं और उनकी ग्रोथ रुक रही है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका कारण कपास की जड़ों में लगने वाला फंगस है, जो तेजी से फैल रहा है.

गौरतलब है कि जिले के कई हिस्सों में बारिश का पानी खेतों में जमा हो गया है. लंबे समय तक जलभराव से कपास की जड़ों में ऑक्सीजन का संचार रुक जाता है, जिससे पौधों की सेहत कमजोर होने लगती है. ऐसी स्थिति में जड़ों पर फंगस का हमला हो जाता है. इससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पौधा सूखने लगता है. किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों का नुकसान होता है.

फंगस के लक्षण और पहचान
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, कपास की जड़ों में फंगस लगने से पौधों की पोषक तत्व लेने की क्षमता कम हो जाती है. शुरुआत में पौधों की निचली पत्तियां पीली दिखने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा कमजोर होकर गिर सकता है. यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो फसल का एक बड़ा हिस्सा खराब हो सकता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.

उपचार के लिए खेतों में डालें दवाएं
एक्सपर्ट्स ने उपचार के लिए किसानों को रासायनिक दवाओं का उपयोग करने की सलाह दी है. खरगोन के वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह ने लोकल 18 को बताया कि कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (ब्लू कॉपर) 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या कार्बेण्डाजिम एक ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर पौधों की जड़ों में ड्रेचिंग यानी टपकाने की विधि से डालना चाहिए. यह दवा सीधे जड़ों में असर करती है और फंगस को खत्म करने में मददगार होती है. इस प्रक्रिया को 10 से 15 दिनों के अंतराल पर दोहराने से फसल सुरक्षित रह सकती है.

दवाओं के साथ ये काम भी जरूरी
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि केवल दवा का प्रयोग करना पर्याप्त नहीं है. जब तक खेतों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक समस्या बार-बार सामने आएगी, इसलिए किसानों को चाहिए कि वे खेतों में नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी बाहर निकालें. साथ ही खेत की मिट्टी को भुरभुरा रखें ताकि जड़ों को हवा मिल सके और फंगस पनपने की संभावना कम हो जाए.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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