₹30 में भरपेट नाश्ता!, झुमरी तिलैया के नंदी बाबा चौक पर उमड़ती भीड़

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सुबह का नाश्ता दिन की ऊर्जा का सबसे अहम हिस्सा होता है, और झुमरी तिलैया का नंदी बाबा चौक इस बात का बेहतरीन उदाहरण है. यहां रोज सुबह 6 बजे से ही नाश्ते के स्टॉल सज जाते हैं, जहां कचौड़ी, जलेबी, छोला और रायता जैसे स्वादिष्ट व्यंजन बेहद किफायती कीमत पर मिलते हैं. खास बात यह है कि महज ₹30 में भरपेट नाश्ता मिलने के कारण यहां हर वर्ग के लोग पहुंचते हैं, जिससे यह जगह न सिर्फ स्वाद का केंद्र बनी है, बल्कि स्थानीय रोजगार का भी एक बड़ा जरिया बन चुकी है. रिपोर्ट- ओम प्रकाश निरंजन

सुबह का नाश्ता दिनभर की ऊर्जा का सबसे अहम स्रोत माना जाता है. झुमरी तिलैया शहर में नंदी बाबा चौक के पास यह बखूबी नजर आती है. शहर के अलग-अलग हिस्सों में जहां फुटपाथ पर कई नाश्ते के स्टॉल लगते हैं.

वहीं नंदी बाबा चौक नाश्ते के लोकेशन के लिए एक खास पहचान बना चुका है. यहां रोजाना सुबह होते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. सुबह करीब 6 बजे से ही यहां आधे दर्जन से ज्यादा नाश्ते के स्टॉल सज जाते हैं. जो दिन के 11 बजे तक लोगों को स्वादिष्ट और सस्ता नाश्ता परोसते हैं.

खास बात यह है कि यहां मिलने वाला नाश्ता न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है. बल्कि जेब पर भी हल्का पड़ता है. यही वजह है कि मजदूर से लेकर ऑफिस जाने वाले लोग, छात्र और स्थानीय निवासी हर वर्ग के लोग यहां नाश्ता करने पहुंचते हैं.

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इन स्टॉल्स में सबसे चर्चित नाम है किशोर सिंह का जो पिछले 23 वर्षों से यहां नाश्ते का स्टॉल चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस काम की शुरुआत छोटे स्तर पर की थी. लेकिन लोगों के प्यार और भरोसे ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है. उनकी हमेशा कोशिश रहती है कि लोगों को कम कीमत में अच्छा और साफ-सुथरा नाश्ता मिले.

उन्होंने बताया कि यहां के मेन्यू में जलेबी, कचौड़ी, गुलाब जामुन, रायता, काबुली चना, सोयाबीन, राजमा और चना दाल से तैयार छोला शामिल हैं. इन सबका कॉम्बिनेशन लोगों को खासा पसंद आता है.

महज 30 रुपए की प्लेट में 4 कचौड़ी, जलेबी, छोला, प्याज और रायता दिया जाता है. जो स्वाद और मात्रा दोनों में संतोषजनक होता है. कई लोग शहर के दूसरे हिस्सों को छोड़कर खास तौर पर नंदी बाबा चौक पहुंचते हैं. यहां का माहौल भी लोगों को आकर्षित करता है.

नंदी बाबा चौक का यह नाश्ता बाजार न केवल स्वाद का केंद्र है. बल्कि यह स्थानीय रोजगार का भी एक बड़ा जरिया बन चुका है. कई परिवार इसी से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं.

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