फुएर्ते तिउना, ला कार्लोटा…ट्रंप ने वेनेजुएला के 5 ठिकानों को ही क्यों चुना?

नई दिल्‍ली. जनवरी 2026 की उस ठंडी सुबह जब पूरी दुनिया सो रही थी, वेनेजुएला की राजधानी काराकास धमाकों की गूंज से दहल उठी. आसमान में कम ऊंचाई पर उड़ते अमेरिकी लड़ाकू विमानों की गर्जना और जमीन पर होते एक के बाद एक सात बड़े विस्फोटों ने लैटिन अमेरिका में युद्ध का बिगुल फूंक दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों के बाद राष्‍ट्रपति निकोलस मदुरो को गिरफ्तार कर उनकी सत्ता को खत्‍म करने का दावा किया. फुएर्ते तिउना, ला कार्लोटा, एल वोल्कान, ला गुएरा पोर्ट, हिगुएरोत एयरपोर्ट जैसे 5 ठिकानों पर डोनाल्‍ड ट्रंप की आर्मी ने अटैक किया. अब बड़ा सवाल यह है कि इन ठिकानों को ही क्‍यों चुना गया. यहां ऐसा क्‍या खास था. चलिए हम आपको इसके बारे में बताते हैं.

अमेरिका के निशाने पर 5 रणनीतिक ठिकाने
अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के उन केंद्रों को ध्वस्त किया है, जहां से देश की सैन्य और संचार व्यवस्था संचालित होती है. ये ठिकाने सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

ठिकाना (Target) स्थान और प्रकृति सामरिक महत्व
फुएर्ते तिउना (Fuerte Tiuna) काराकास (मुख्य सैन्य अड्डा) वेनेजुएला का ‘पेंटागन’, जहाँ सैन्य मुख्यालय और मदुरो का आवास है।
ला कार्लोटा (La Carlota) राजधानी का मुख्य एयरबेस वायु सेना का केंद्र, जो शहर के बीच त्वरित सैन्य तैनाती के लिए उपयोग होता है।
एल वोल्कान (El Volcán) संचार और सिग्नल साइट यहाँ से पूरे देश का सैन्य संचार और रडार सिस्टम कंट्रोल किया जाता है।
ला गुएरा पोर्ट (La Guaira Port) मुख्य बंदरगाह वेनेजुएला का सबसे बड़ा समुद्री प्रवेश द्वार और रसद आपूर्ति का केंद्र।
हिगुएरोत एयरपोर्ट (Higuerote) मिरांडा राज्य का एयरबेस कैरेबियन सागर की निगरानी और तटीय रक्षा के लिए महत्वपूर्ण।

रणनीतिक और जियो-पॉलिटिक्स की दृष्टि से ये जगह क्यों हैं खास?
वेनेजुएला पर हुए ये हमले केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक गहरा जियो-पॉलिटिकल संदेश हैं. इन ठिकानों का चयन अत्यंत सोच-समझकर किया गया है:

1. सत्ता की धुरी को तोड़ना: फुएर्ते तिउना पर हमला सीधे निकोलस मदुरो के सुरक्षा घेरे को भेदने जैसा है. यह वह जगह है जहां से वेनेजुएला की सेना को आदेश मिलते हैं. इसे निष्क्रिय करने का अर्थ है सेना को बिना सिर का करना.

2. संचार व्यवस्था का ध्वस्तीकरण: एल वोल्कान पर प्रहार कर अमेरिका ने वेनेजुएला की आंखें और कान बंद करने की कोशिश की है. बिना रडार और संचार के मदुरो की सेना जवाबी हमले या विदेशी मदद (जैसे रूस या ईरान) से संपर्क करने में असमर्थ हो जाएगी.

3. आर्थिक और रसद नाकेबंदी: ला गुएरा पोर्ट और हवाई अड्डों को निशाना बनाकर अमेरिका ने देश की रसद सप्लाई लाइन काट दी है. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. इन बंदरगाहों पर नियंत्रण या इन्हें तबाह करने से तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है, जो मदुरो सरकार की आय का मुख्य स्रोत है.

4. विदेशी शक्तियों को चेतावनी: वेनेजुएला में रूस और ईरान की मौजूदगी अमेरिका के लिए हमेशा से चुनौती रही है. इन ठिकानों पर हमला कर वॉशिंगटन ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने घर के नजदीक (Backyard) में किसी भी विरोधी महाशक्ति के प्रभाव को बर्दाश्त नहीं करेगा.

अमेरिका की यह कार्रवाई दक्षिण अमेरिका में एक बड़े सत्ता परिवर्तन की भूमिका लिख सकती है. क्या यह हमला केवल नार्को-टेररिज्म के खिलाफ है या तेल के विशाल भंडार पर कब्जे की नई जंग? यह आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन काराकास के खंडहर होते ये ठिकाने गवाही दे रहे हैं कि भू-राजनीति की बिसात पर अब सीधा टकराव शुरू हो चुका है.

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