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Success Story: गरीबी की वजह से 10वीं पास करने के बाद ही बृजकिशोर मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ा. लेकिन 10 वर्षों तक मजदूरी के बाद कुछ अपना करने का सोचा. फिर नौकीर छोड़ घर लौट जाए. इसके बाद तीन मशीन से अपनी शुरूआत कर आज लाखों का कारोबार बना लिया है.
पश्चिम चम्पारणः ‘हिम्मत–ए–मर्दा तो मदद–ए–खुदा’ ! ये कहावत आपसब ने अपने जीवन में कभी न कभी तो सुनी ही होगी. जो इंसान बिहड़ से बीहड़ परिस्थिति में भी हिम्मत रखता है, उसकी मदद खुद ईश्वर करते हैं. इस लेख में हम आपको एक ऐसे ही युवा की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने 2000 रुपए महीने की मजदूरी से 30 लाख रुपए सालाना तक की कमाई का सफर तय किया है. महज 42 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक ऐसा सेटअप खड़ा कर लिया है, जिसने दर्जनों लोगों को अच्छी तनख्वाह पर रोजगार दिया है. सफलता की यह कहानी जिले के बगहा-2 प्रखंड अंतर्गत आने वाले विनवलिया गांव निवासी बृजकिशोर की है.
दो हजार रुपए से शुरू की मजदूरी
वर्तमान में बृजकिशोर जिले के सबसे बड़े होजरी कपड़े के निर्माताओं में से एक हैं. यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि कभी दो हजार रुपए महीने की तनख्वाह पर दूसरे राज्य में मजदूरी करने वाले 42 वर्षीय बृजकिशोर आज हर महीने ढाई से तीन लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं. गरीबी की वजह से 10वीं पास करने के बाद ही बृजकिशोर को मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ा. लेकिन 10 वर्षों तक मजदूरी करने के बाद उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया, जो कई लोगों को अब भी सपने जैसा दिखता है.
2016 में शुरू किया खुद का कारोबार
बताते चलें कि बृजकिशोर के पिता एक छोटे स्तर के किसान थें, इस वजह से 2001 में मैट्रिक की परीक्षा पास कर उन्हें 17 वर्ष की ही उम्र में मजदूरी के लिए बाहर निकलना पड़ा. इस दौरान उन्हें गुड़गांव में कपड़े की एक फैक्ट्री में दो हजार रुपए मजदूरी पर काम मिल गया. 10 वर्षों तक काम करने के बाद बृजकिशोर की मासिक कमाई 8 हजार रुपए हो गई थी. लेकिन कुछ बड़ा करने की सोंच ने बृजकिशोर को रुकने नहीं दिया. इस बीच एक दिन काम छोड़कर वे घर आ गए. कुछ समय इधर-उधर बिताने के बाद 2016 में बचे हुए रुपए से उन्होंने तीन सिलाई मशीनें खरीद ली और होजरी कपड़े की सिलाई करने लगें.
आज करते हैं सालाना 30 लाख से ऊपर की आमदनी
बकौल बृजकिशोर, उस वक्त जिले में होजरी का काम करने वाले वे अकेले शख़्स थें. इस वजह से उनके पास होजरी कपड़े की सिलाई की डिमांड बढ़ने लगी. एक समय ऐसा आया जब उन्होंने 2022 में अपनी ही कमाई से 10 मशीनों का सेटअप बैठा लिया और फिर 2023 में PMEGP योजना से लोन लेकर खुद की फैक्ट्री बैठा ली. आज हालात ये है कि उनकी फैक्ट्री में उन्होंने दो दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार दिया है. विन चीटर, टी शर्ट, ट्रैक पैंट, सॉक्स, इनर वियर, शर्ट, जैकेट, स्पोर्ट्स वियर इत्यादि के निर्माण में उनकी फैक्ट्री जिले के टॉप 10 कारखानों में से एक है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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