जंगल कटे, खेती बढ़ी… पर खाद की डिमांड नहीं बदली: कृषि विभाग रिकॉर्ड के हिसाब से डिमांड करता है; लाइन में खड़े हो रहे किसान – Guna News

रबी सीजन शुरू होते ही खाद की किल्लत एक बार फिर गंभीर संकट बनकर सामने आ गई है। हालात ऐसे हैं कि किसान रातभर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, महिलाएं बच्चों को साथ लेकर अंधेरे में नंबर लगा रही हैं और कई जगह हालात बेकाबू होने तक पहुंच गए।

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गुना में लाइन में लगी महिला की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। छतरपुर में खाद के लिए पहुंची छात्रा को नायब तहसीलदार ने थप्पड़ मार दिया, तो रीवा में भारी भीड़ और अव्यवस्था के चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। विधानसभा में भी विपक्ष लगातार खाद संकट का मुद्दा उठा रहा है।

सवाल यही है-आखिर हर साल खाद की ऐसी कमी क्यों होती है? कृषि विभाग हर सीजन भूमि रिकॉर्ड के आधार पर पर्याप्त डिमांड भेजने का दावा करता है, फिर भी किसान लाइन में खड़े रहते हैं। इस बार तो हालात इतने बिगड़े कि गुना में किसानों को रातभर केंद्रों पर रुकना पड़ा।

मामले को लेकर दैनिक भास्कर टीम ने किसानों, अधिकारियों और विशेषज्ञों से बात कर खाद की कमी को समझने की कोशिश की कि तैयारियों के बावजूद संकट क्यों गहराता है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

गुना में खाद के लिए किसान परेशान…तीन तस्वीरों में देखिए

गुना में खाद के लिए पुरुषों के साथ ही महिलाएं भी लगी हुई हैं।

महिलाएं भी रात को सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं, ताकि खाद मिल सके।

महिलाएं भी रात को सड़कों पर डेरा डाले हुए हैं, ताकि खाद मिल सके।

सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधायक जयवर्धन सिंह भी किसानों से मिलने पहुंचे।

सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधायक जयवर्धन सिंह भी किसानों से मिलने पहुंचे।

पहले ये तीन केस देख लीजिए…

1. गुना (26 नवंबर): लाइन में लगी महिला की मौत

कुशेपुर गांव की निवासी भूरियाबाई बागेरी डबल लॉक गोदाम के बाहर रात में लाइन में लगी थीं। अचानक उल्टियां शुरू हुईं। परिवार उन्हें पहले बमोरी और फिर गुना अस्पताल ले गया, जहाँ तक पहुंचते-पहुंचते उनकी मौत हो गई। प्रशासन का दावा है कि महिला की शुगर 450 थी, लेकिन पोस्टमार्टम न होने से संदेह भी बढ़ा।

घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और डबल लॉक गोदाम 18 से बढ़ाकर 33 कर दिए गए। वहीं टोकन सिस्टम लागू कर दिया गया। किसान रात में केंद्रों पर न रुकें, इसलिए अधिकारी रात में भी केंद्रों का निरीक्षण करते रहे। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद कुशेपुर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। परिवार को आर्थिक सहायता भी दी गई।

गुना के बागेरी खाद केंद्र पर महिला की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। वह लाइन में लगी थीं।

गुना के बागेरी खाद केंद्र पर महिला की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। वह लाइन में लगी थीं।

2. छतरपुर (3 दिसंबर): नायब तहसीलदार ने छात्रा को थप्पड़ मारा

घटना परा गांव में बुधवार की है। गुड़िया पटेल खाद लेने पहुंची थी। इस दौरान नायब तहसीलदार ऋतु सिंघई ने कहा-टोकन देने का समय सुबह 9 बजे का था और अब 11 बज रहे हैं। भीड़ बढ़ने के चलते टोकन बांटना कर दिया है। अब 6 दिसंबर से टोकन दिए जाएंगे।

छात्रा का कहना था कि उसने नायब तहसीलदार ऋतु सिंघई से कहा कि वह दो महीने से खाद लेने आ रही है, लेकिन नहीं मिल रही। उसने टोकन मांगा। ऋतु सिंघई ने कहा कि महिलाओं को टोकन नहीं मिलेंगे, केवल पुरुषों को मिलेंगे। दोबारा टोकन मांगा तो नायब तहसीलदार ने थप्पड़ मार दिया। गुड़िया पटेल ने बताया था कि वह एमए तीसरे सेमेस्टर की छात्रा है। 5 दिसंबर को उसकी परीक्षा है। वह पढ़ाई छोड़कर खाद लेने के लिए लाइन में लगी हुई है। एक महीने से खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

गुड़िया ने आरोप लगाया कि 15 ट्रक खाद रखी हुई है, लेकिन उसे ब्लैक में बेचा जा रहा है। गुड़िया ने कहा कि लगभग 250 महिलाएं रात 2 बजे से खाद के लिए लाइन में खड़ी हैं, लेकिन किसी को खाद नहीं मिल रही है। इस मामले का वीडियो भी सामने आया, जिसके बाद छतरपुर कलेक्टर ने नोटिस जारी कर नायब तहसीलदार ऋतु सिंघई से जवाब मांगा।

छतरपुर में महिलाओं और किसानों का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने मारपीट की।

छतरपुर में महिलाओं और किसानों का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने मारपीट की।

3. रीवा (2 सितंबर): रात में भगदड़ और लाठीचार्ज

रीवा की सबसे बड़ी करहिया मंडी में हजारों किसान खाद लेने के लिए जुट गए। लाइन में बच्चे, बुज़ुर्ग और करीब 200 से ज्यादा महिलाएं भी थीं, जिनमें कई अपने गोद में छोटे बच्चों को लिए बैठी नजर आईं। रात करीब 2 बजे तेज बारिश शुरू हुई तो भगदड़ की स्थिति बन गई। भीगने और ठंड से बचने के लिए कोई शॉल ओढ़े था, कोई पॉलीथिन, जबकि कुछ ने तो टीन शेड तक सिर पर रख लिया। किसानों का आरोप था कि कालाबाजारी के कारण उन्हें घंटों नहीं, बल्कि रातभर लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है।

इसी दौरान रात 12 बजे के बाद नाराज किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। किसानों का आरोप है कि खाद नहीं दे पा रही सरकार उल्टे उन पर लाठी चला रही है। घटना के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई और सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।

रीवा खाद के लिए खड़े किसानों पर लाठीचार्ज के दूसरे दिन उमरी में किसानों में भगदड़ मच गई।

रीवा खाद के लिए खड़े किसानों पर लाठीचार्ज के दूसरे दिन उमरी में किसानों में भगदड़ मच गई।

70 हजार मीट्रिक टन खाद की डिमांड भेजी

गुना जिले के प्रभारी उपसंचालक कृषि (DDA) संजीव शर्मा ने बताया कि जिले में राजस्व और कृषि विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार कुल 3.36 लाख हेक्टेयर बोवनी क्षेत्र है। इसी आधार पर हर साल रबी और खरीफ सीजन के लिए खाद की डिमांड भेजी जाती है।

इस वर्ष रबी सीजन के लिए विभाग ने 70 हजार मीट्रिक टन खाद की मांग भेजी है। अब तक जिले में लगभग 35 हजार मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति हो चुकी है और इसका वितरण भी किया गया है।

51 हजार हेक्टेयर जंगल की जमीन पर खेती

कृषि विभाग खाद की डिमांड केवल उस जमीन के आधार पर भेजता है, जो रिकॉर्ड में खेती योग्य दर्ज है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गुना जिले में बड़ी मात्रा में जंगल काटकर खेती शुरू की गई है। ये जमीनें अब भी राजस्व रिकॉर्ड में वन क्षेत्र ही दर्ज हैं। मई में NGT में सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार, जिले की 51 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे कर खेती की जा रही है, जो गुना की कुल भूमि का 23.12% है।

हालांकि यह जमीन रिकॉर्ड में कृषि भूमि नहीं मानी जाती, इसलिए विभाग इसकी खाद डिमांड नहीं भेजता। लेकिन यहां खेती करने वाले किसान भी खाद की जरूरत रखते हैं। नतीजा यह होता है कि 3.36 लाख हेक्टेयर दर्ज खेती के लिए आने वाला खाद इन्हीं अतिरिक्त 51 हजार हेक्टेयर में भी बंट जाता है।

इसी वजह से वास्तविक रिकॉर्ड वाले किसानों तक खाद समय पर और पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता, और हर साल किल्लत बढ़ती जाती है।

एक्सपर्ट व्यू…10-12 किलो यूरिया पर्याप्त

एक्सपर्ट्स के अनुसार गेहूं की फसल में प्रति बीघा लगभग 10–12 किलोग्राम यूरिया पर्याप्त होता है। इसे तीन चरणों में बांटकर डालना चाहिए, ताकि पौधे को नाइट्रोजन संतुलित मात्रा में मिलती रहे और मिट्टी की उत्पादकता पर दुष्प्रभाव न पड़े।

समय से पहले बोवनी, खाद की मांग अचानक बढ़ी

गुना जिले के प्रभारी उपसंचालक कृषि संजीव शर्मा के अनुसार, सामान्यतः रबी सीजन में बोवनी 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच होती है। बोवनी से पहले किसान पलेवा यानी खेतों में पानी डालते हैं, जिसके बाद ही बुवाई शुरू होती है।

लेकिन इस बार स्थिति बदली। अक्टूबर में अच्छी बारिश होने से खेतों में पर्याप्त नमी बनी रही और किसानों को पलेवा करने की जरूरत नहीं पड़ी। यही वजह रही कि गेहूं की बोवनी तय समय से पहले कर दी गई।

अब जल्दी बोवनी होने के कारण गेहूं की फसल में जल्द ही दोबारा पानी देने की जरूरत पड़ रही है। किसान आमतौर पर इसी समय खाद भी डालते हैं। इसलिए इस बार खाद की मांग सामान्य से काफी पहले बढ़ गई है, जबकि सप्लाई नियमित समय के अनुसार ही आ रही है। इसी असंतुलन के चलते बड़ी संख्या में किसान खाद लेने के लिए केंद्रों पर पहुंच रहे हैं।

किसानों ने खाद की मात्रा भी बढ़ाई

गुना जिले के प्रभारी उपसंचालक कृषि संजीव शर्मा ने बताया कि पहले किसान दो सिंचाई पर यूरिया का उपयोग करता था। यानी पहली सिंचाई पर 25 किलो और दूसरी सिंचाई पर 25 किलो प्रति बीघा। अब किसानों ने धीरे धीरे इसकी मात्रा बढ़ा दी है। अब एक बार में ही एक बीघा में एक कट्टा (50 किलो) डालने लगे हैं। इस वजह से यूरिया की खपत लगभग दोगुनी हो गई है।

उन्होंने बताया कि हम लोग किसानों को सलाह भी देते हैं कि नाइट्रोजन उर्वरकों को कम से कम दो से तीन बार में डालना चाहिए। बोवनी के समय तो बिल्कुल नहीं डालना चाहिए। आजकल किसान बुवाई के समय भी डालने लगे हैं। अंधाधुंध प्रयोग भी लगातार बढ़ रहा है।

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