FOMO तो था ही, अब आ गया JOMO, GenZ ने ये क्या नया इनवेंट कर दिया?

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आज के डिजिटल दौर में GenZ के बीच एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां पहले हर सोशल मीडिया प्लान, पार्टी और इवेंट में शामिल होने का दबाव यानी फोमो हावी था, वहीं अब उसकी जगह जोमो ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. युवा अब हर चीज में भागदौड़ करने के बजाय सुकून भरी जिंदगी को चुन रहे हैं.

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छूट जाने की खुशी है JOMO.

पहले जहां हर किसी को डर रहता था कि कहीं कुछ मिस न हो जाए यानी FOMO, वहीं अब नई पीढ़ी ने इस सोच को पूरी तरह पलट दिया है. GenZ अब हर पार्टी, हर प्लान और हर ट्रेंड का हिस्सा बनने के दबाव से बाहर निकल रही है और “JOMO” यानी चीजों को मिस करके भी खुश रहने की आदत अपना रही है. यह नया ट्रेंड बताता है कि हर जगह होना जरूरी नहीं, बल्कि अपने सुकून और खुशी को चुनना ज्यादा जरूरी है.

कुछ सालों पहले तक सोशल मीडिया का असर इतना ज्यादा था कि लोग हर चीज में शामिल रहना चाहते थे. दोस्तों की पार्टी हो, ट्रिप हो या कोई नया ट्रेंड, हर जगह मौजूद रहना जरूरी लगता था. अगर कोई चीज छूट जाती, तो मन में कमी और पछतावा महसूस होता था. इसी वजह से लोग अपनी जरूरत से ज्यादा व्यस्त रहने लगे.

धीरे-धीरे यह आदत दबाव में बदल गई. लोग अपने आराम और शांति को नजरअंदाज करके सिर्फ दूसरों के साथ कदम मिलाने में लगे रहे. इससे मानसिक थकान, तनाव और खुद की तुलना करने की आदत बढ़ती गई, जो लंबे समय में सेहत के लिए नुकसानदायक साबित होने लगी.

अब क्यों बढ़ रहा है जोमो का चलन
अब नई पीढ़ी इस दबाव से बाहर निकलना चाहती है. लगातार फोन और सोशल मीडिया से जुड़े रहने से लोग थक चुके हैं. इसलिए अब वे अपनी जिंदगी को थोड़ा धीमा और शांत बनाना चाहते हैं. जोमो का मतलब है—जानबूझकर कुछ चीजों को छोड़ देना और उसमें भी खुश रहना. यानी अगर आपका मन नहीं है कहीं जाने का, तो आप बिना किसी पछतावे के घर पर रह सकते हैं. यह सोच लोगों को अपने हिसाब से जिंदगी जीने की आजादी देती है.

लाइफस्टाइल में कैसे आ रहा है बदलाव? 
अब लोगों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं. पहले जहां हर वीकेंड बाहर जाने की प्लानिंग होती थी, अब लोग घर पर रहकर आराम करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. वे अपने लिए समय निकाल रहे हैं, किताबें पढ़ रहे हैं, परिवार के साथ समय बिता रहे हैं या बस सुकून से बैठना सीख रहे हैं. इसके साथ ही लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी कम कर रहे हैं. अब हर पल को दिखाने की बजाय उसे महसूस करना ज्यादा जरूरी समझा जा रहा है. कम लेकिन सच्चे रिश्तों को अहमियत दी जा रही है, जिससे जीवन में संतुलन बना रहे.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

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