मैदा हुआ पुराना अब रागी-बाजरा-गुड़ के बिस्किट का जमाना, महिलाओं का ब्रांड

Last Updated:

Khandwa News: स्मिता बरौले ने लोकल 18 से कहा कि शुरू में लोगों को इन बिस्किट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसलिए बेचने में थोड़ी परेशानी हुई. धीरे-धीरे जब लोगों ने इन्हें चखा और फायदे जाने, तो डिमांड बढ़ने लगी.

खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा में महिलाओं ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जहां सेहत और रोजगार दोनों साथ-साथ चल रहे हैं. अब मैदा के बिस्किट की जगह रागी, बाजरा और गुड़ से बने बिस्किट लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं. खास बात यह है कि इन बिस्किट को किसी बड़ी कंपनी ने नहीं बल्कि महिला समूह ने अपने हाथों से तैयार किया है और अब यह ब्रांड तेजी से फेमस हो रहा है. दरअसल खंडवा के ‘जय मां संतोषी’ महिला समूह की महिलाओं ने कोरोना काल के दौरान इस काम की शुरुआत की थी. उस समय रोजगार की समस्या भी थी और लोगों में सेहत को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही थी. ऐसे में महिलाओं ने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा बनाया जाए, जो हेल्दी भी हो और लोगों के काम भी आए. बस यहीं से रागी, बाजरा और गुड़ के बिस्किट बनाने की शुरुआत हुई.

जब लोकल 18 ने समूह की महिलाओं से बात की, तो उन्होंने बताया कि वे पूरी तरह शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल करती हैं. इन बिस्किट में मैदा और रिफाइन शुगर का उपयोग नहीं किया जाता बल्कि ज्वार, बाजरा, रागी और जौ जैसे मोटे अनाज और गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि ये बिस्किट सेहत के लिए फायदेमंद माने जा रहे हैं और कई डॉक्टर भी इन्हें खाने की सलाह दे रहे हैं. इस काम को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका स्मिता बरौले ने निभाई. उन्होंने नगर निगम के शहरी आजीविका मिशन के बारे में जानकारी ली और महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह तैयार किया. सभी महिलाओं ने मिलकर छोटी-छोटी बचत शुरू की, बैंक में खाता खुलवाया और फिर धीरे-धीरे इस काम को आगे बढ़ाया.

शुरू में बेचने में हुई थोड़ी परेशानी
स्मिता ने लोकल 18 से कहा कि शुरुआत में लोगों को इन बिस्किट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसलिए बेचने में थोड़ी परेशानी हुई लेकिन धीरे-धीरे जब लोगों ने इन्हें खाया और फायदे समझे, तो मांग बढ़ने लगी. आज उनके बनाए बिस्किट खंडवा के साथ-साथ इंदौर, भोपाल, देवास, जबलपुर और सनावद जैसे शहरों तक पहुंच रहे हैं. आज ‘आरंभ’ नाम से यह बिस्किट ब्रांड पहचान बना चुका है. इसके अलावा उनका समूह ज्वार, बाजरा, रागी और जौ से बने कई अन्य हेल्दी प्रोडक्ट भी तैयार कर रहा है. इन उत्पादों को खाने से बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पोषण मिल रहा है और यही वजह है कि बाजार में इनकी अच्छी डिमांड बनी हुई है.

दूसरों के लिए भी रोजगार के मौके
अगर हिम्मत और मेहनत हो, तो छोटी सी शुरुआत से भी बड़ा काम खड़ा किया जा सकता है. आज करीब 10 महिलाएं मिलकर इस काम को चला रही हैं और खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के मौके तैयार कर रही हैं. ऐसे में खंडवा की ये महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार को संभाल रही हैं बल्कि सेहतमंद भारत की दिशा में भी एक नई पहल कर रही हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *