पहले न्योता ठुकराया, अब फोन पर खरी-खोटी; ट्रंप से क्यों भिड़ रहा कनाडा?

Trump vs Carney: अमेरिका और कनाडा के रिश्ते तल्ख हो चुके हैं. अब बात जुबानी जंग तक आ चुकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ अब कनाडा खुलकर खड़ा नजर आ रहा है. पहले ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के न्योते को ठुकराना और अब फोन कॉल में साफ-साफ जवाब देना… यह इशारा करता है कि कनाडा अब अमेरिका की लाइन पर चलने को तैयार नहीं है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका से रिश्तों में अब कुछ भी ‘नॉर्मल’ नहीं बचा है. उनके इस बयान से साफ नजर आ रहा है कि कनाडा ट्रंप की बार-बार बेइज्जती कर रहा है.

मार्क कार्नी का यह रुख सिर्फ बयानबाजी नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक संतुलन का संकेत भी है. दावोस में दिए गए भाषण से लेकर ट्रंप के साथ 30 मिनट की फोन कॉल तक, कार्नी हर मंच पर अमेरिका की ट्रेड और टैरिफ नीति पर सवाल उठा रहे हैं. ट्रंप प्रशासन जहां इसे कनाडा की ‘हिमाकत’ मान रहा है, वहीं कनाडा के भीतर इसे राष्ट्रीय हितों की रक्षा के तौर पर देखा जा रहा है. यही टकराव अब दोनों देशों के रिश्तों को एक नए मोड़ पर ले आया है.

दावोस भाषण से क्यों भड़के ट्रंप?

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से मार्क कार्नी ने बिना नाम लिए अमेरिका पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि दुनिया की बड़ी ताकतें अब व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं. टैरिफ के जरिए दबाव बनाया जा रहा है. सप्लाई चेन की कमजोरियों का फायदा उठाया जा रहा है. कार्नी ने मिडिल पावर्स से एकजुट होने की अपील की थी. यह संदेश सीधे-सीधे ट्रंप की नीति पर वार था.

ट्रंप ने खुद मार्क कार्नी को फोन किया.

‘बोर्ड ऑफ पीस’ का न्योता क्यों ठुकराया गया

ट्रंप ने कनाडा को अपने प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता दिया था. लेकिन दावोस भाषण के कुछ ही दिनों बाद यह न्योता वापस ले लिया गया. माना जा रहा है कि कार्नी का सख्त रुख ट्रंप को नागवार गुजरा. कनाडा ने इसे अमेरिकी दबाव की राजनीति का हिस्सा माना और दूरी बना ली.

फोन कॉल में क्या हुआ ट्रंप और कार्नी के बीच

ट्रंप ने खुद मार्क कार्नी को फोन किया. करीब 30 मिनट की बातचीत हुई. इसमें ट्रेड, टैरिफ, यूक्रेन युद्ध, वेनेजुएला संकट और आर्कटिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि कार्नी ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने दावोस में जो कहा, वही उनका आधिकारिक रुख है. उन्होंने किसी भी बयान से पीछे हटने से इनकार कर दिया.

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी के दावे पर विवाद

यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दावा किया कि फोन कॉल में कार्नी अपने बयान ‘वॉक बैक’ कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कार्नी आक्रामक तरीके से अपने शब्दों से पीछे हटे. लेकिन कार्नी ने इसे पूरी तरह गलत बताया. उन्होंने कहा, ‘मैंने ट्रंप से वही कहा जो मैंने दावोस में कहा था.’ यह बयान सीधे-सीधे अमेरिकी प्रशासन को चुनौती देता है.

क्या कनाडा जानबूझकर ट्रंप को चुनौती दे रहा है?

हां, लेकिन यह चुनौती राष्ट्रीय हितों के नाम पर है.

क्या दावोस भाषण से रिश्ते बिगड़े?

दावोस भाषण ने टकराव को खुला कर दिया.

ट्रंप क्यों नाराज हैं?

क्योंकि कनाडा खुलकर अमेरिकी टैरिफ नीति का विरोध कर रहा है.

क्या ट्रेड वॉर की आशंका है?

अगर टैरिफ पर सहमति नहीं बनी, तो हालात बिगड़ सकते हैं.

क्या कनाडा अकेला है?

नहीं, कई मिडिल पावर्स कार्नी की सोच से सहमत हैं.

क्या बढ़ेगा टकराव?

कई एक्सपर्ट का मानना है कि ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति और कार्नी की मुखर कूटनीति आने वाले महीनों में अमेरिका-कनाडा रिश्तों को और तनावपूर्ण बना सकती है. हालांकि कार्नी यह साफ कर चुके हैं कि वे टकराव नहीं बल्कि बराबरी के रिश्ते चाहते हैं.

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