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अगर आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति नींद में उंगलियां हिलाता है, जैसे मोबाइल चला रहा हो, तो यह सिर्फ आदत नहीं बल्कि मानसिक बीमारी का संकेत हो सकता है. दुनियां के चर्चित मनोवैज्ञानिक इंजीनियर आर शंकर ने इस बीमारी को लेकर लोकल 18 पर पूरी अपडेट दी है.
बेगूसराय: अक्सर लोगों के साथ एक अजीब स्थिति देखने को मिलती है, जब व्यक्ति गहरी नींद में होता है, लेकिन उसकी उंगलियां इस तरह हिलती रहती हैं, जैसे वह मोबाइल चला रहा हो. परिवार के लोग इसे सामान्य आदत या थकान का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मनोविज्ञान की भाषा में यह एक तरह की मानसिक समस्या मानी जाती है. इस विषय पर लोकल 18 से बातचीत में चर्चित मनोवैज्ञानिक इंजीनियर आर शंकर ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं. देखिए दुनिया के चर्चित मनोवैज्ञानिक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.
Understanding and Fixing Your Memory Issues नामक पुस्तक जिसे दुनिया के 150 देश में पढ़ा जाता है इसके लेखक दुनिया के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और एसोसिएट मेंबर ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया Er R. Shankar बताते हैं कि इंसान दिनभर जिन गतिविधियों को अत्यधिक तन्मयता के साथ करता है, वहीं गतिविधियां उसके अवचेतन मन में दर्ज हो जाती हैं. खासतौर पर लंबे समय तक मोबाइल फोन चलाना, स्क्रीन पर लगातार ध्यान लगाए रखना और मानसिक रूप से उसी काम में डूबे रहना इसका बड़ा कारण है. जब व्यक्ति सोता है, तब शरीर भले ही आराम की स्थिति में चला जाता है, लेकिन दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता. ऐसे में दिन की वो ही आदतें नींद में भी दोहराई जाती हैं और उंगलियों की हरकत शुरू हो जाती हैं.
ब्रेन की हार्मनी बिगड़ने से बढ़ती है समस्या
मनोवैज्ञानिक के अनुसार, इस स्थिति में व्यक्ति के ब्रेन का होमियोस्टैटिक बैलेंस यानी आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है. हार्मोनिक सिस्टम में गड़बड़ी आने लगती है, जिससे दिमाग सही तरीके से रिलैक्स नहीं कर पाता. यही वजह है कि नींद के दौरान भी न्यूरो एक्टिविटी असामान्य बनी रहती है. इसे केवल आदत या मजाक समझना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि समय के साथ यह समस्या गहरी मानसिक परेशानी का रूप ले सकती है.
इलाज संभव, घबराने की जरूरत नहीं
इंजीनियर आर शंकर का कहना है कि यह बीमारी लाइलाज नहीं है. यदि समय रहते ब्रेन की हार्मनी को दोबारा मेंटेन कर लिया जाए, तो व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो सकता है. इसके लिए दिमाग के विशेष हिस्सों की न्यूरो-इलेक्ट्रिकल कनेक्टिविटी पर काम करना होता है. न्यूरो सेंसिटिविटी में आवश्यक अल्टरेशन और अल्ट्रासोन जैसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए ब्रेन को दोबारा संतुलन में लाया जाता है.
3 से 4 दिनों में ठीक होने का दावा
सबसे राहत की बात यह है कि सही उपचार मिलने पर यह समस्या बहुत जल्दी ठीक हो सकती है. मनोवैज्ञानिक के मुताबिक इस बीमारी को ठीक करने के लिए हार्मनी को मेंटेन करने के लिए मरीज/इंसान ब्रेन के उसके पार्टिकुलर पर्सन के न्यूरो electrical condectivity में ultrason करना पड़ेगा. न्यूरो सेंसिटिविटी में अल्टरेशन करना पड़ेगा. तब यह बीमारी बहुत ही आसानी से तीन से चार दिनों में ठीक हो जाएगा. विशेषज्ञों की मानें तो छोटी-सी दिखने वाली यह समस्या समय रहते समझ ली जाए, तो बड़ी मानसिक बीमारी बनने से रोकी जा सकती है.
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