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Agriculture News: देर से बोई जाने वाली गेहूं की इन किस्मों को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे ही इन गेहूं की वैरायटी को खेत में लगाएं. फसल को लगभग 5 से 6 बार पानी देना जरूरी है.
खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रबी सीजन की तैयारी शुरू हो गई है. जिन किसानों के खेत खाली हो चुके हैं, वे अब गेहूं की बुआई के लिए खेतों की तैयारी में जुट गए हैं लेकिन कई किसानों के खेत कपास और सोयाबीन की देर से कटाई के कारण समय पर खाली नहीं हो पाएंगे. ऐसे किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ खास गेहूं की वैरायटी सुझाई हैं, जिन्हें दिसंबर तक बोया जा सकता है. इन किस्मों से देरी के बावजूद भी अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है.
कठिया गेहूं की प्रमुख वैरायटी
डॉ सिंह ने आगे बताया कि कठिया गेहूं की वैरायटी में HI 8777, HI 8802, HI 8805, HI 8823, HI 8713, HI 8733 और HI 8759 प्रमुख हैं. इन किस्मों का उपयोग मैदा, दलिया, बाटी, ब्रेड और सूजी बनाने में किया जाता है. इन वैरायटियों से प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है. बाजार में इनका दाम भी अच्छा मिलता है क्योंकि व्यापारी इन्हें सीधे खेत से खरीद लेते हैं.
बुआई से पहले ध्यान रखें ये बातें
बता दें कि देर से बोई जाने वाली इन किस्मों को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे ही इन गेहूं की वैरायटी को लगाएं. फसल को लगभग पांच से छह बार पानी देना जरूरी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि सही किस्म का चयन और समय पर सिंचाई से किसान दिसंबर तक भी गेहूं की बुआई कर अच्छा उत्पादन पा सकते हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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